भारत में AI Impact Summit 2026: अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की एंट्री, वैश्विक एआई नीति पर होगी बड़ी चर्चा

खबर सार :-
एआई इम्पैक्ट समिट 2026 भारत को वैश्विक एआई नीति और इनोवेशन के केंद्र में लाने का बड़ा अवसर है। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की भागीदारी से भारत-अमेरिका तकनीकी सहयोग को नई दिशा मिलेगी। वहीं, वित्तीय स्थिरता और जिम्मेदार एआई उपयोग पर बढ़ता फोकस यह दिखाता है कि आने वाले समय में एआई सिर्फ अवसर नहीं, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी भी होगा।

भारत में AI Impact Summit 2026: अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की एंट्री, वैश्विक एआई नीति पर होगी बड़ी चर्चा
खबर विस्तार : -

AI Impact Summit 2026: भारत इस महीने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय तकनीकी आयोजन की मेजबानी करने जा रहा है। एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में दुनिया के 100 से ज्यादा देशों के 500 से अधिक स्टार्टअप्स, नीति निर्माता, टेक लीडर्स और निवेशक हिस्सा लेंगे। यह सम्मेलन भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के वैश्विक हब के रूप में और मजबूत स्थिति में लाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई करेंगे माइकल क्रैट्सियोस

व्हाइट हाउस ने पुष्टि की है कि अमेरिका की ओर से विज्ञान और प्रौद्योगिकी नीति कार्यालय (OSTP) के निदेशक माइकल क्रैट्सियोस इस सम्मेलन में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। क्रैट्सियोस भारत में एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान अमेरिका की नई एआई रणनीति और नीतिगत प्राथमिकताओं को साझा करेंगे।

ट्रंप के एआई एक्सपोर्ट्स प्रोग्राम पर अपडेट

समिट के दौरान माइकल क्रैट्सियोस अमेरिका एआई एक्सपोर्ट्स प्रोग्राम पर अपडेट देंगे। यह कार्यक्रम एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के जरिए शुरू किया गया था, जिसका मकसद अमेरिकी टेक स्टैक को वैश्विक साझेदार देशों से जोड़ना और एआई इनोवेशन में अमेरिका की लीडरशिप को मजबूत करना है। भारत इस रणनीति में एक अहम साझेदार के रूप में देखा जा रहा है।

अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन शामिल

इस उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल में कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। इनमें आर्थिक मामलों के अवर सचिव जैकब हेलबर्ग, अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए वाणिज्य विभाग के अवर सचिव विलियम किमिट, और उद्योग एवं सुरक्षा के लिए वाणिज्य विभाग के अवर सचिव जेफरी केसलर प्रमुख हैं। इन अधिकारियों की मौजूदगी से यह साफ है कि अमेरिका इस समिट को रणनीतिक रूप से बेहद अहम मान रहा है।

बेसेंट का बयान: वित्तीय स्थिरता की नई चुनौती

अमेरिका के वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट ने कांग्रेस को बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब वित्तीय प्रणाली की मजबूती और जोखिम दोनों का बड़ा कारक बन चुका है। उन्होंने कहा कि एआई वित्तीय स्थिरता के लिए चार शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल है, जिनमें वित्तीय बाजार, साइबर सुरक्षा और विनियामक आधुनिकीकरण भी शामिल हैं।

जिम्मेदार एआई उपयोग पर जोर

बेसेंट के मुताबिक, रेगुलेटरी संस्थाएं पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर के साथ मिलकर एआई के जिम्मेदार इस्तेमाल पर काम कर रही हैं। इसका उद्देश्य पूरे वित्तीय सिस्टम में जोखिमों की निगरानी करना और सिस्टम की रेजिलिएंस को बेहतर बनाना है। उन्होंने कहा कि एआई का इस्तेमाल तेजी से बैंकों और वित्तीय बाजारों में बढ़ रहा है।

बैंकों में बढ़ता एआई का दखल

बेसेंट ने स्पष्ट किया कि बैंक और वित्तीय संस्थान एआई का उपयोग रिस्क मैनेजमेंट, कम्प्लायंस और ऑपरेशनल एफिशिएंसी के लिए कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि शोरगुल से हटकर उन मुद्दों पर ध्यान देना जरूरी है, जो अमेरिका और वैश्विक वित्तीय स्थिरता के लिए सबसे ज्यादा अहम हैं।

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