UP Budget 2026: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने बुधवार को विधानसभा में राज्या का ऐतिहासिक बजट पेश किया। योगी सरकार के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना द्वारा पेश किया गया 9,12,696.35 करोड़ रुपये का यह बजट पिछले साल की तुलना में करीब 12.9 प्रतिशत बड़ा है। साल 2026-27 यह बजट उत्तर प्रदेश के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा बजट है। इस बजट में राज्य के बेसिक शिक्षा व्यवस्था (basic education) को मज़बूत करने पर खास फ़ोकस किया गया है। बजट के प्रस्तावों से साफ़ पता चलता है कि सरकार प्राथमिक और उच्च प्राथमिक शिक्षा के ढांचे में बड़े बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रही है।
बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने बजट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार ने बेसिक शिक्षा को सबसे ज़्यादा प्राथमिकता दी है। उनके मुताबिक यह बजट केवल धनराशि का प्रावधान नहीं, बल्कि हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण, समान और संस्कारयुक्त शिक्षा पहुंचाने का स्पष्ट संकल्प है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के माध्यम से सामाजिक न्याय और समान अवसर सुनिश्चित करना सरकार की प्रतिबद्धता है और पेश किया गया बजट उस दिशा में एक अहम कदम है।
उन्होंने कहा कि बजट में बेसिक शिक्षा (basic education) के लिए 77,622 करोड़ रुपये का बहुत ज़्यादा एलोकेशन दिया गया है। यह धनराशि परिषदीय विद्यालयों के आधारभूत ढांचे को मजबूत करने, शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने और छात्रों के सर्वांगीण विकास पर केंद्रित रहेगी। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इन नियमों से राज्य के प्राइमरी एजुकेशन सिस्टम को नई रफ्तार मिलेगी।
सबसे अहम प्रावधान कक्षा 1 से 8 तक परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले सभी स्टूडेंट्स के लिए है। फ्री यूनिफॉर्म, स्कूल बैग, जूते, मोजे और स्टेशनरी देने की स्कीम के लिए 650 करोड़ रुपये दिए गए हैं। इसका मकसद यह है कि संसाधनों के अभाव में कोई भी बच्चा पढ़ाई से पढ़ाई से वंचित न रहे। इसके साथ ही सरकार प्रत्येक जिले में दो-दो मुख्यमंत्री मॉडल कम्पोजिट स्कूल स्थापित करने की योजना पर कार्य किया जा रहा है। राज्य के 75 जिलों में कुल 150 ऐसे स्कूल बनाने का प्रस्ताव है, जो मॉडर्न सुविधाओं, डिजिटल क्लासरूम और उन्नत शैक्षणिक संसाधनों से लैस किया जाएगा।
हर जिले में एक मुख्यमंत्री अभ्युदय स्कूल बनाने का भी प्लान है, जिससे गांव और शहर के छात्रों को एक जैसी क्वालिटी की शिक्षा मिल सके। बालिका शिक्षा को ध्यान में रखते हुए, जिन विकास खंडों में कस्तूरबा गांधी गर्ल्स स्कूल नहीं हैं, वहां नए आवासीय विद्यालय बनाने के लिए 580 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इससे दूर-दराज के इलाकों की लड़कियों को सुरक्षित और अच्छी शिक्षा पाने का मौका मिलेगा।
बजट में टीचरों और स्टाफ के लिए भी खास प्रावधान किए गए हैं। परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों, नॉन-टीचिंग स्टाफ और संविदा और मानदेय पर काम करने वाले कर्मचारियों के लिए कैशलेस मेडिकल सुविधाएं शुरू करने की योजना है। इसके लिए 358 करोड़ दिए गए हैं, ताकि शिक्षाकर्मियों को हेल्थ सिक्योरिटी का फायदा मिल सके।
समग्र शिक्षा योजना के तहत, सभी प्राइमरी स्कूलों को स्मार्ट स्कूल बनाने के लिए 300 करोड़ रुपये दिए गए हैं। डिजिटल बोर्ड, ICT उपकरण और मॉडर्न टीचिंग मटीरियल के ज़रिए बच्चों को नई टेक्नोलॉजी से जोड़ने की तैयारी चल रही है। सहायता प्राप्त गैर-सरकारी स्कूलों में सेफ्टी ऑडिट के बाद खराब पाए गए संस्थानों के रखरखाव और मजबूती के लिए भी 300 करोड़ रुपये दिए गए हैं।
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