श्रीगंगानगर: भारतीय रेलवे में ट्रेनों का आपस में तालमेल हमेशा से सबसे जरूरी रहा है। बड़े स्टेशनों की असलियत इसी बात पर टिकी होती है कि एक तरफ से आने वाली ट्रेन के यात्री दूसरी तरफ जाने वाली ट्रेन को आसानी से पकड़ सकें। लेकिन, आजकल रेलवे के अलग-अलग विभागों के बीच आपसी तालमेल की कमी और समय सारणी (टाइम टेबल) में किए गए मनमाने बदलावों (Change Timing of Haridwar Intercity) ने यात्रियों के सफर को आरामदायक बनाने के बजाय परेशानी का सबब बना दिया है। ताजा मामला श्रीगंगानगर से अबोहर और बठिंडा होते हुए हरिद्वार जाने वाली हरिद्वार इंटरसिटी एक्सप्रेस (14815) का है। रेलवे ने ट्रेन के चलने के समय में जो छोटा सा बदलाव किया है, उसने पंजाब जाने वाले सैकड़ों श्रद्धालुओं और रोज सफर करने वाले यात्रियों को बीच रास्ते में फंसा दिया है।
दरअसल, पंजाब के मालवा इलाके (अबोहर, मलोट, बठिंडा, पटियाला) से बड़ी संख्या में श्रद्धालु सालासर धाम और खाटूश्याम जी के दर्शन करने राजस्थान जाते हैं। वापसी में ये लोग रींगस से शाम करीब 7:11 बजे चलने वाली अरावली एक्सप्रेस (14702) लेते हैं। अरावली एक्सप्रेस सुबह 4:15 बजे श्रीगंगानगर पहुंचती है। पहले हरिद्वार इंटरसिटी के चलने का समय सुबह 4:20 बजे था। ये 5 मिनट यात्रियों के लिए एक प्लेटफॉर्म से दूसरे पर जाने के लिए काफी थे। यात्री आराम से उतरकर अगली ट्रेन पकड़ लेते थे और समय पर घर पहुंच जाते थे।
रेलवे के नए टाइम टेबल के हिसाब से हरिद्वार इंटरसिटी अब 4:20 के बजाय 4:10 बजे ही श्रीगंगानगर से चल देती है। वहीं, अरावली एक्सप्रेस के पहुंचने का समय अब भी 4:15 बजे ही है। नतीजा यह होता है कि जब अरावली एक्सप्रेस स्टेशन पर आती है, उससे ठीक 5 मिनट पहले हरिद्वार इंटरसिटी जा चुकी होती है। इस खराब मैनेजमेंट की वजह से यात्रियों के पास अब सिर्फ एक ही रास्ता बचता है-सुबह 6:10 बजे चलने वाली दिल्ली इंटरसिटी (12482) का इंतजार करना। महज 5 मिनट के अंतर की वजह से बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को कड़ाके की ठंड या चिलचिलाती गर्मी में दो घंटे तक रेलवे स्टेशन पर ही बैठना पड़ता है।
अबोहर के 'श्याम प्रेमी रेल यात्रा संघ' के अध्यक्ष विजय दहूजा ने इस समस्या पर चिंता जताई है। उन्होंने बताया कि हर महीने ग्यारस पर सैकड़ों श्रद्धालु खाटूधाम जाते हैं। वापसी में थके-हारे यात्रियों के लिए सुबह-सुबह दो घंटे स्टेशन पर बैठना किसी सजा जैसा है। यात्रियों का कहना है कि रात भर की लंबी यात्रा के बाद शरीर काफी थक जाता है, ऐसे में प्लेटफॉर्म पर दो घंटे का फालतू इंतजार करना मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान करने वाला है। खासकर बुजुर्गों और छोटे बच्चों के लिए हालत और भी खराब हो जाती है, क्योंकि खुले प्लेटफॉर्म पर बैठने का सही इंतजाम नहीं है और मौसम की वजह से अक्सर उनकी तबीयत बिगड़ने लगती है। श्रद्धालुओं ने नाराजगी जताते हुए कहा कि रेलवे के ऐसे अजीब फैसलों से आम जनता का भरोसा टूट रहा है। ट्रेनों का तालमेल न होने की वजह से अब लोग मजबूरी में निजी बसों से सफर करने लगे हैं, जिससे रेलवे की कमाई को भी नुकसान हो रहा है।
इस गड़बड़ी और यात्रियों की तकलीफ को लेकर अब स्थानीय नेता और रेलवे से जुड़े पुराने सदस्य भी सामने आए हैं। जेडआरयूसीसी के पूर्व सदस्य भीम शर्मा ने बताया कि यह सीधे तौर पर काम करने के तरीके में लापरवाही का मामला है। उन्होंने कहा, "हमने इस बड़ी समस्या के बारे में पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री निहालचंद को बता दिया है। ट्रेनों के बीच का यह समय अब यात्रियों के लिए सिरदर्द बन गया है। हमारी कोशिश है कि जल्द ही बड़े अफसरों के साथ मीटिंग करके हरिद्वार इंटरसिटी का पुराना समय (सुबह 4:20 बजे) फिर से शुरू करवाया जाए।" बड़े स्टेशनों पर ट्रेनों का समय मिलाना केवल एक नियम नहीं, बल्कि यात्रियों की सुविधा का सबसे बड़ा जरिया है। अगर रेलवे इंटरसिटी के समय को फिर से 10 मिनट पीछे कर देता है, तो इससे रेलवे के काम पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन सैकड़ों यात्रियों का सफर आसान हो जाएगा। यात्रियों की मांग है कि रेलवे प्रशासन अपनी जिद छोड़े और लोगों की भलाई के लिए टाइम टेबल में तुरंत सुधार करे।
अन्य प्रमुख खबरें
कपड़ा गोदाम में लगी भीषण आग, लाखों के नुकसान की आशंका
विकासोन्मुख कार्य योजना की तृतीय त्रैमासिक समीक्षा बैठक आयोजित, जिला कलेक्टर ने की अध्यक्षता
प्रतिबंधित दवाओं को लेकर निर्देश, जिला कलेक्टर ने जारी की गाइडलाइन
शाहपुरा जिला चिकित्सालय में चिकित्सकों के अभाव से वरिष्ठ नागरिक परेशान
जिला न्यायालय में वकीलों की बैठक, सामूहिक बीमा योजना पर बनी सहमति
झांसी डिफेंस कॉरिडोर में MSME टेक्नोलॉजी सेंटर की सौगात, 200 करोड़ से होगा निर्माण
आठवां सामूहिक विवाह सम्मेलन हुआ संपन्न, डॉ. संदीप सरावगी ने दिया आशीर्वाद
वंशी पहाड़पुर ‘सूखा शिला’ क्षेत्र में अवैध खनन पर सख्ती, ऊंची दीवार बनेगी सुरक्षा कवच
चाकसू में चला सफाई का महाअभियान, निरंकारी सेवादारों ने दिया ये संदेश
भीलवाड़ा में भरा ऐतिहासिक मायरा, मेवाड़ क्षेत्र में बना चर्चा का केंद्र
कुशीनगर में हनुमान एवं सरस्वती प्रतिमा का प्राण-प्रतिष्ठा एवं अनावरण समारोह संपन्न