भीलवाड़ा में उमड़ा आस्था का महाकुंभ: पंडित प्रदीप मिश्रा ने दिया बेटियों को शस्त्र और बहू को शास्त्र सिखाने का संदेश

खबर सार :-
भीलवाड़ा में पंडित प्रदीप मिश्रा की शिव महापुराण कथा का ऐतिहासिक शुभारंभ। जानें क्यों पंडित जी ने कहा- "बेटियों को शस्त्र चलाना सिखाओ और बहू पढ़ाओ, देश बचाओ"। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

भीलवाड़ा में उमड़ा आस्था का महाकुंभ: पंडित प्रदीप मिश्रा ने दिया बेटियों को शस्त्र और बहू को शास्त्र सिखाने का संदेश
खबर विस्तार : -

भीलवाड़ा (राजस्थान): मेवाड़ की वीर धरा भीलवाड़ा में बुधवार को भक्ति और सामाजिक चेतना का एक ऐसा अनूठा संगम देखने को मिला, जिसने शहर के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय लिख दिया है। मेडिसिटी ग्राउंड में आयोजित 'श्री शिव महापुराण कथा' के प्रथम दिन ही जनसैलाब इस कदर उमड़ा कि करीब 11 लाख वर्ग फीट में फैला आयोजन स्थल भी छोटा नजर आने लगा। विख्यात कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा (सीहोर वाले) ने व्यासपीठ से न केवल शिव महिमा का बखान किया, बल्कि समाज को एक नई दिशा देने वाला नारा भी दिया।

 ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से गुंजायमान हुआ मेडिसिटी ग्राउंड

जैसे ही कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा संकटमोचन हनुमान मंदिर के महंत बाबूगिरी महाराज के साथ मंच पर पधारे, पूरा वातावरण "श्री शिवाय नमस्तुभ्यं" के जयघोष से सराबोर हो गया। पहले दिन की उपस्थिति ने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए; अनुमान के मुताबिक, साढ़े चार लाख वर्ग फीट के विशाल डोम के बाहर भी लाखों श्रद्धालु खुले आसमान के नीचे बैठकर कथा श्रवण करने को मजबूर थे।

 बेटियों को शस्त्र और बहुओं को शिक्षा: पंडित मिश्रा का आह्वान

वर्तमान समय में महिलाओं की सुरक्षा पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए पंडित प्रदीप मिश्रा ने समाज को झकझोरने वाला संदेश दिया। उन्होंने कहा कि बेटियों को केवल घर के कामकाज और संस्कारों तक सीमित न रखें। "बेटियों को इतना सामर्थ्यवान बनाओ कि वे अपनी रक्षा स्वयं कर सकें। अब समय आ गया है कि बेटियों को तलवार चलाना और आत्मरक्षा के गुण सिखाए जाएं। वे निर्भर नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बननी चाहिए।" इसके साथ ही उन्होंने एक नया मंत्र देते हुए कहा, “बहु पढ़ाओ-देश बचाओ”। उन्होंने तर्क दिया कि यदि घर की बहू शिक्षित होगी, तो वह आने वाली कई पीढ़ियों को संस्कारित और मजबूत बना सकेगी।

 सोना नहीं, रुद्राक्ष धारण करने की सलाह

श्रद्धालुओं को व्यावहारिक नसीहत देते हुए पंडित मिश्रा ने एक मर्मस्पर्शी बात कही। उन्होंने भक्तों से अपील की कि वे कथा में भारी सोने-चांदी के आभूषण पहनकर न आएं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "यदि गले में सोना होगा तो चोर की नजर होगी, लेकिन यदि गले में रुद्राक्ष होगा तो स्वयं महादेव की नजर होगी।"

 भजनों पर झूमे लाखों श्रद्धालु

कथा के दौरान जब पंडित जी ने "दमादम भोले शंकर" और "भोले आपकी कृपा से सब काम हो रहा है" जैसे भजनों की प्रस्तुति दी, तो माहौल पूरी तरह शिवमय हो गया। हजारों की संख्या में महिलाएं और पुरुष अपने स्थान पर खड़े होकर झूमने लगे। श्रद्धा का आलम यह था कि लोगों की आँखों से भक्ति के आंसू छलक उठे।

प्रशासनिक व्यवस्थाएं और आगामी कार्यक्रम

भीलवाड़ा में उमड़ी इस भीषण भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन और आयोजन समिति ने बेहद पुख्ता और कड़े इंतजाम किए हैं। शहर की यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए प्रमुख मार्गों पर वन-वे ट्रैफिक सिस्टम लागू किया गया है और वाहनों के लिए शहर के अलग-अलग हिस्सों में विशेष पार्किंग जोन बनाए गए हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आयोजन स्थल पर छाया, ठंडे पेयजल और आपातकालीन प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था की गई है, जहाँ सैकड़ों स्वयंसेवक मुस्तैदी से अपनी सेवाएँ दे रहे हैं।

यह कथा प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक निरंतर जारी रहेगी। पहले दिन की कथा के समापन पर आयोजन समिति के सदस्यों द्वारा व्यासपीठ की भव्य आरती उतारी गई। इस दौरान पंडित प्रदीप मिश्रा ने भावुक होते हुए कहा कि पिछले वर्ष कई बाधाओं के कारण यह कथा संभव नहीं हो पाई थी, लेकिन आज बाबा महाकाल की असीम कृपा से ही यह ऐतिहासिक आयोजन सफल हो रहा है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि जब तक महादेव की स्वयं की इच्छा न हो, तब तक कोई भी व्यक्ति उनके दरबार तक नहीं पहुँच सकता।

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