पीलीभीत: उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में किसान नेता बलजिंदर सिंह की गिरफ्तारी के बाद किसानों और प्रशासन के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। मंगलवार को बड़ी संख्या में किसान संगठनों के कार्यकर्ताओं ने पूरनपुर कोतवाली के मुख्य गेट पर डेरा डाल दिया और पुलिस प्रशासन के खिलाफ उग्र नारेबाजी की।
मामले की शुरुआत पूरनपुर मंडी से हुई, जहां किसानों की फसल की बिक्री और व्यवस्थाओं को लेकर किसान नेता बलजिंदर सिंह खासे नाराज दिखे। बताया जा रहा है कि मंडी की अव्यवस्थाओं से क्षुब्ध होकर बलजिंदर सिंह ने जिलाधिकारी (DM) ज्ञानेंद्र सिंह के कार्यालय में फोन किया। आरोप है कि फोन कॉल के दौरान किसान नेता का पारा सातवें आसमान पर था। उन्होंने कथित तौर पर डीएम के पीए (PA) से बात करते हुए जिलाधिकारी को मंडी में 'भगा-भगा कर मारने' जैसी विवादित और धमकी भरी बातें कहीं। इस बातचीत का एक ऑडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
जिलाधिकारी के प्रति अभद्र भाषा और जान से मारने की धमकी को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने त्वरित एक्शन लिया। पुलिस ने वायरल ऑडियो और मिली शिकायत के आधार पर कार्रवाई करते हुए किसान नेता बलजिंदर सिंह को हिरासत में ले लिया। जैसे ही उनकी गिरफ्तारी की खबर फैली, किसान संगठनों में रोष व्याप्त हो गया।
बलजिंदर सिंह की गिरफ्तारी की सूचना जैसे ही क्षेत्र में फैली, विभिन्न किसान संगठनों के कार्यकर्ता लामबंद होकर तुरंत पूरनपुर कोतवाली पहुंच गए। आक्रोशित किसानों ने कोतवाली के मुख्य गेट पर ही धरना देना शुरू कर दिया और इस पूरी पुलिसिया कार्रवाई को पूरी तरह से दमनकारी करार दिया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने पूरनपुर कोतवाली पुलिस और जिला प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की, जिससे वहां का माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया। प्रदर्शनकारी किसानों का स्पष्ट रूप से कहना है कि नेताजी केवल मंडी में किसानों को आ रही व्यावहारिक समस्याओं और उनके अधिकारों की बात कर रहे थे, लेकिन प्रशासन उनकी आवाज सुनने के बजाय उसे दबाने की कोशिश कर रहा है। किसानों ने दो टूक शब्दों में मांग की है कि बलजिंदर सिंह को बिना शर्त तुरंत रिहा किया जाए, अन्यथा यह आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है।
कोतवाली परिसर और आसपास के इलाकों में तनाव को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस अधिकारी किसानों को समझाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन किसान अपनी मांग पर अड़े हुए हैं। अब देखना यह होगा कि क्या किसान संगठनों के इस भारी दबाव के आगे प्रशासन झुकता है और बलजिंदर सिंह को रिहा करता है, या फिर कानून की सख्ती बरकरार रहती है। फिलहाल, मंडी से शुरू हुआ यह विवाद अब कोतवाली की दहलीज तक पहुंच चुका है और पीलीभीत की राजनीति में इस घटना ने हलचल पैदा कर दी है।
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