UPRVUNL अधिकारी एसोसिएशन की बड़ी मांग, स्थानांतरण नीति शून्य करने का प्रस्ताव
खबर सार :-
UPRVUNL के अधिकारी एसोसिएशन ने राष्ट्र हित और देश में ईंधन की बचत को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष की वार्षिक स्थानांतरण नीति को शून्य (स्थगित) करने की मांग की है। एसोसिएशन द्वारा एक पत्र प्रबंध निदेशक को सौंपा गया है।
खबर विस्तार : -
सोनभद्रः लखनऊ उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (UPRVUNL) के अधिकारी एसोसिएशन ने इस वर्ष की वार्षिक स्थानांतरण नीति को शून्य यानी स्थगित करने की मांग उठाई है। एसोसिएशन ने राष्ट्रहित, ईंधन बचत और आर्थिक संसाधनों के संरक्षण का हवाला देते हुए उत्पादन निगम के प्रबंध निदेशक को एक आधिकारिक पत्र भेजकर इस संबंध में नीतिगत निर्णय लेने का अनुरोध किया है। इस प्रस्ताव को बिजली विभाग में एक दूरदर्शी और व्यावहारिक पहल के रूप में देखा जा रहा है।
पीएम मोदी के संबोधन का उल्लेख
एसोसिएशन ने अपने पत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया संबोधन का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में ईंधन संरक्षण अत्यंत आवश्यक हो गया है। पत्र के अनुसार, मध्य पूर्व में जारी युद्ध संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की भारी कमी और कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ रहा है और आर्थिक विकास प्रभावित होने की आशंका है।
एसोसिएशन ने कहा कि प्रधानमंत्री ने देशवासियों से ईंधन बचत के लिए यातायात कम करने, खाद्य तेल के सीमित उपयोग और सरकारी एवं कॉर्पोरेट क्षेत्रों में वर्क फ्रॉम होम जैसी व्यवस्थाओं को बढ़ावा देने की अपील की है। इसी अपील को आधार बनाते हुए अधिकारी एसोसिएशन ने उत्पादन निगम के शीर्ष प्रबंधन के समक्ष स्थानांतरण नीति को इस वर्ष के लिए शून्य घोषित करने का सुझाव रखा है।
स्थानांतरण से होता है अतिरिक्त खर्च
प्रस्ताव में कहा गया है कि सामान्य और नियमित प्रशासनिक तबादलों पर रोक लगाई जाए, जबकि पदोन्नति के कारण होने वाले अनिवार्य स्थानांतरण और कर्मचारियों के पारस्परिक या स्वैच्छिक तबादलों को पहले की तरह जारी रखा जाए। एसोसिएशन का मानना है कि इससे विभागीय कार्य प्रभावित नहीं होंगे और प्रशासनिक संतुलन भी बना रहेगा।
अधिकारी एसोसिएशन ने अपने पत्र में तर्क दिया है कि हर वर्ष बड़े पैमाने पर होने वाले स्थानांतरणों के कारण कर्मचारियों और उनके परिवारों को लंबी दूरी की यात्रा करनी पड़ती है। इससे ईंधन की खपत बढ़ती है और विभाग पर स्थानांतरण भत्ता (TA) सहित अन्य प्रशासनिक खर्चों का अतिरिक्त बोझ पड़ता है। यदि इस वर्ष स्थानांतरण नीति स्थगित कर दी जाती है, तो ईंधन की प्रत्यक्ष बचत के साथ-साथ करोड़ों रुपये के अनावश्यक खर्चों पर भी रोक लगाई जा सकती है।
प्रस्ताव पर व्यापक चर्चा
एसोसिएशन का कहना है कि यह कदम केवल विभागीय हित तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा संरक्षण और आर्थिक बचत में भी योगदान देगा। अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान परिस्थितियों में सरकारी संस्थानों को भी जिम्मेदारी निभाते हुए ऐसे कदम उठाने चाहिए, जो देश की अर्थव्यवस्था और संसाधनों को मजबूती दें।
बिजली विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच इस प्रस्ताव को लेकर व्यापक चर्चा हो रही है। कई लोग इसे राष्ट्रभक्ति और जिम्मेदार प्रशासनिक सोच से प्रेरित पहल मान रहे हैं। वहीं कुछ कर्मचारियों का मानना है कि स्थानांतरण रुकने से पारिवारिक और सामाजिक स्थिरता भी बनी रहेगी, जिससे कार्य क्षमता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
अब सभी की नजर उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड के शीर्ष प्रबंधन पर टिकी है कि वह इस महत्वपूर्ण और संवेदनशील प्रस्ताव पर क्या निर्णय लेता है। यदि यह प्रस्ताव स्वीकार होता है, तो इसे राज्य के अन्य विभागों के लिए भी एक उदाहरण माना जा सकता है।
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