Pilibhit News : उत्तर प्रदेश के कई जिलों में प्रकृति का कहर किसानों पर टूट पड़ा है। जनपद पीलीभीत सहित राज्य के विभिन्न हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से जारी मूसलाधार बारिश और तेज हवाओं ने खेती-किसानी को गहरे संकट में डाल दिया है। कटाई के लिए पूरी तरह तैयार खड़ी गेहूं की सुनहरी फसल अब खेतों में बिछ गई है, जिससे अन्नदाता के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी हो गई हैं। पीलीभीत में स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई है। यहाँ गेहूं की फसल पककर तैयार थी और किसान बस कटाई की शुरुआत करने ही वाले थे। लेकिन अचानक बदले मौसम के मिजाज ने उनकी महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया। तेज हवाओं के साथ हुई भारी बारिश के कारण गेहूं के पौधे जमीन पर गिर गए हैं। जानकारों का मानना है कि फसल के गिरने से दानों की गुणवत्ता खराब हो जाएगी और पैदावार में भारी गिरावट आएगी।
किसानों का दर्द इस बार केवल फसल बर्बाद होने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी उस मेहनत के मिट्टी में मिलने का है जिसे उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर सींचा था। हाड़ कंपाने वाली कड़ाके की ठंड और अंधेरी रातों में जंगली जानवरों व आवारा पशुओं से फसल को बचाने के लिए किसानों ने खेतों में जागकर पहरा दिया था। अपनी जान की परवाह किए बिना जिस फसल को उन्होंने जैसे-तैसे पालकर बड़ा किया, वह आज बेमौसम बारिश के कारण बर्बाद हो गई है। पीलीभीत के एक पीड़ित किसान ने सिसकते हुए अपनी व्यथा साझा की और बताया कि उन्होंने अपनी रातों की नींद सिर्फ इसलिए हराम की थी ताकि आवारा पशुओं से अनाज बचा सकें और अपने बच्चों का पेट भर सकें। लेकिन कुदरत के इस क्रूर प्रहार ने उनकी महीनों की तपस्या को एक झटके में मिट्टी में मिला दिया है। आज वही किसान, जो कल तक पशुओं से अपनी उपज बचा लाया था, प्रकृति की इस मार के आगे पूरी तरह बेबस और लाचार नजर आ रहा है।
केवल पीलीभीत ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के तमाम अन्य जनपदों में भी स्थिति चिंताजनक है। कई इलाकों में बारिश के साथ भारी ओलावृष्टि भी हुई है। ओलों की मार ने सरसों और गेहूं की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान पहुँचाया है। खेतों में पानी भर जाने से जो फसल बची भी है, उसके सड़ने का डर पैदा हो गया है।
प्राकृतिक आपदा की इस भारी तबाही के बाद अब प्रदेश का अन्नदाता पूरी तरह टूट चुका है। जिन किसानों ने कर्ज लेकर बुवाई की थी, उनके सामने अब जीवन-यापन का गहरा संकट खड़ा हो गया है। आज किसानों की सारी उम्मीदें केवल उत्तर प्रदेश सरकार पर टिकी हैं। पीड़ित किसानों ने प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि तत्काल प्रभाव से फसलों के नुकसान का सटीक सर्वे यानी गिरदावरी कराई जाए, ताकि नुकसान का सही आकलन हो सके। इसके साथ ही, प्रभावित किसानों को जल्द से जल्द उचित मुआवजा राशि प्रदान करने और कृषि ऋण की वसूली में राहत देने की भी अपील की गई है। देखा जाए तो बेमौसम की इस मार ने एक बार फिर यह कड़वा सच उजागर कर दिया है कि भारतीय खेती आज भी काफी हद तक मौसम के रहमोकरम पर ही निर्भर है। अब सबकी नजरें शासन और प्रशासन पर टिकी हैं कि वे कितनी तत्परता से इन संकटग्रस्त किसानों की सुध लेते हैं और उन्हें इस भीषण आर्थिक आपदा से उबारने के लिए क्या ठोस कदम उठाते हैं।
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