लखनऊ: उत्तर प्रदेश में सड़कों पर सफर अब पहले के मुकाबले कहीं अधिक सुरक्षित होता जा रहा है। राज्य सरकार और यूपी पुलिस द्वारा चलाए जा रहे ‘जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट’ (JFD) अभियान के बेहद उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं। आंकड़ों की मानें तो वर्ष 2026 के शुरुआती महीनों में सड़क दुर्घटनाओं (Road accidents in UP) के ग्राफ में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे प्रदेश के यातायात प्रबंधन को एक नई मजबूती मिली है।
उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कृष्णा ने हाल ही में आयोजित एक प्रेस वार्ता में सड़क सुरक्षा के आंकड़ों को साझा किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 की तुलना में 2026 में सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में 7.43 प्रतिशत की कमी आई है। इतना ही नहीं, इस दौरान सड़क हादसों में होने वाली मौतों के आंकड़ों में भी 11.55 प्रतिशत की उल्लेखनीय गिरावट देखी गई है। घायलों की संख्या में भी 8.05 प्रतिशत का सुधार दर्ज किया गया है, जो यह दर्शाता है कि पुलिस की मुस्तैदी धरातल पर काम कर रही है।
प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली मौतों को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए जनवरी 2026 से राज्य के सभी 7 पुलिस कमिश्नरेट और 68 जिलों में यह विशेष योजना लागू की गई है।
डीजीपी ने जानकारी दी कि अभियान को प्रभावी बनाने के लिए 487 चिह्नित थानों में 573 'क्रिटिकल कॉरिडोर' टीमों का गठन किया गया है। ये टीमें केवल कागजों पर नहीं बल्कि सड़क पर आधुनिक उपकरणों के साथ तैनात हैं। इन टीमों को निम्नलिखित संसाधनों से लैस किया गया है:
इस अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धि मानवीय जीवन की रक्षा है। आंकड़ों के अनुसार, 2026 की पहली तिमाही में ही 450 से अधिक लोगों की जान बचाई गई है। औसतन देखा जाए तो यूपी पुलिस की इस पहल से प्रतिदिन लगभग 5 लोग काल के गाल में समाने से बच रहे हैं। साथ ही, रोजाना होने वाले हादसों की संख्या में भी 5 से 6 की कमी आई है।
"हमारा उद्देश्य केवल चालान काटना नहीं, बल्कि सुरक्षित सफर सुनिश्चित करना है। तीन या उससे अधिक मौतों वाली दुर्घटनाओं को अब 'स्पेशल रिपोर्ट' श्रेणी में रखा गया है ताकि उनकी वैज्ञानिक जांच हो सके और भविष्य में ऐसी गलतियों को रोका जा सके।" - राजीव कृष्णा, डीजीपी
रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश के 18 परिक्षेत्रों में से 13 और 8 पुलिस जोनों में से 6 जोन में दुर्घटना दर और मृत्यु दर में भारी कमी आई है। यह संतुलित सुधार दर्शाता है कि योजना का क्रियान्वयन पूरे प्रदेश में एक समान रूप से प्रभावी रहा है। डीजीपी ने यह भी स्पष्ट किया कि सड़क सुरक्षा के साथ-साथ पुलिस कानून-व्यवस्था के अन्य संवेदनशील मामलों पर भी गंभीर है। किसी भी प्रकार की लापरवाही या अपराध बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। उत्तर प्रदेश में 'जीरो फैटेलिटी' मिशन न केवल आंकड़ों में सफल हो रहा है, बल्कि यह आम जनता के बीच सुरक्षित ड्राइविंग के प्रति जागरूकता भी पैदा कर रहा है। यदि इसी गति से सुधार जारी रहा, तो यूपी सड़क सुरक्षा के मामले में देश के लिए एक रोल मॉडल बन सकता है।
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