UGC Protest: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों के खिलाफ देश भर में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। एक ओर जहां UGC का तर्क है कि उच्च शिक्षा संस्थानों में बढ़ते जाति-आधारित भेदभाव और आत्महत्याओं को रोकने के लिए 'इक्विटी स्क्वॉड' (मॉनिटरिंग टीमें) का गठन और कड़ी कार्रवाई ज़रूरी है, तो वहीं दूसरी तरफ सामान्य वर्ग के छात्र और कई संगठन इसे 'एकतरफा और दमनकारी' बताकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
इस बीच बहुजन समाज पार्टी (BSP) की प्रमुख व यूपी पूर्व सीएम मायावती ने उच्च शिक्षा संस्थानों में कमेटियों के लिए UGC द्वारा बनाए गए नए नियमों का बचाव किया है। मायावती ने कहा कि सामान्य वर्ग के कुछ लोगों द्वारा इस कदम का विरोध पूरी तरह से गलत है। उन्होंने कहा कि सामान्य वर्ग के कुछ लोगों द्वारा इस कदम का विरोध बिल्कुल भी जायज नहीं है।
मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर लिखा, "देश के उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव को दूर करने और सुलझाने के लिए सरकारी कॉलेजों और प्राइवेट यूनिवर्सिटी में समानता समितियां बनाने के लिए UGC के नए नियमों का सामान्य वर्ग के कुछ लोग जातिवादी मानसिकता के साथ विरोध कर रहे हैं, जो इसे अपने खिलाफ भेदभाव और साजिश मान रहे हैं। यह बिल्कुल भी सही नहीं है।"
मायावती ने नए UGC नियमों को लेकर सवाल भी उठाए हैं। उन्होंने कहा, "पार्टी का मानना है कि ऐसे नियमों को लागू करने से पहले अगर सभी को भरोसे में लिया जाता तो बेहतर होता, और इससे देश में सामाजिक तनाव नहीं होता। सरकार और सभी संस्थानों को इस पर निश्चित रूप से ध्यान देना चाहिए।" बसपा सुप्रीमो ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में दलितों और पिछड़े वर्गों को इन समुदायों के स्वार्थी और भ्रष्ट नेताओं के भड़काऊ बयानों से गुमराह नहीं होना चाहिए, जिनकी आड़ में वे लगातार घटिया राजनीति करते हैं। "हम इन वर्गों के लोगों से अपील करते हैं कि वे विशेष रूप से सावधान रहें।"
बता दें कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने 13 जनवरी को उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने वाले नियम 2026' लागू किए थे। इन नियमों के तहत, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जाति-आधारित भेदभाव को रोकने के लिए विशेष समितियां, हेल्पलाइन और निगरानी टीमें बनाने के निर्देश दिए गए हैं। UGC के नए नियमों का मकसद कैंपस में जाति, धर्म, लिंग, जन्म स्थान, विकलांगता आदि के आधार पर होने वाले भेदभाव को पूरी तरह से खत्म करना है।
ये टीमें खास तौर पर SC, ST और OBC छात्रों की शिकायतों पर ध्यान देंगी।
ये नियम सभी उच्च शिक्षा संस्थानों (यूनिवर्सिटी और कॉलेजों) में समानता समितियां बनाना अनिवार्य करते हैं, जो शिकायतों की जांच करेंगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगी (जैसे डिग्री रोकना, संस्थान की मान्यता रद्द करना आदि)। हालांकि, नए नियमों के बाद यूजीसी का जबरदस्त विरोध हो रहा है। खासकर सामान्य वर्ग ने सोशल मीडिया के जरिए अपना विरोध जताया है। सामान्य वर्ग के छात्रों का कहना है कि नए नियम कॉलेज और यूनिवर्सिटी कैंपस में उनके खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा दे सकते हैं। इससे कॉलेजों में अराजकता फैलेगी।
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