पीलीभीतः जिले की ग्राम पंचायत मल्लपुर खजूरिया में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन के कथित दुरुपयोग का मामला सामने आया है। क्षेत्र पंचायत सदस्य ने जिलाधिकारी को पत्र देकर आरोप लगाया है कि पिछले कई महीनों से की गई शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई नहीं की गई तो वह जिलाधिकारी कार्यालय के सामने आत्महत्या करने को मजबूर होंगे।
बताया जा रहा है कि ग्राम पंचायत मल्लपुर खजूरिया में वर्ष 2021 से विकास कार्यों में भारी अनियमितताओं के आरोप लग रहे हैं। क्षेत्र पंचायत सदस्य महेश कुशवाहा और अन्य ग्रामीणों का कहना है कि गांव में कई योजनाओं के तहत विकास कार्य कागजों में दिखाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है। आरोप है कि ग्राम निधि से करीब 50 लाख रुपये और प्रशासनिक व्यय के नाम पर कई लाख रुपये खर्च दर्शाए गए, जबकि धरातल पर इन कार्यों का सही तरीके से क्रियान्वयन नहीं हुआ।
ग्रामीणों के अनुसार पंचायत में नाली निर्माण, इंटरलॉकिंग सड़क और अन्य विकास कार्यों को कागजों में पूरा दिखा दिया गया, लेकिन मौके पर इन कार्यों की स्थिति संतोषजनक नहीं है। इसी मामले को लेकर महेश कुशवाहा, मेवाराम, शिवम कुमार, दिनेश और बृजबिहारी समेत कई ग्रामीणों ने 23 जुलाई 2024 और 26 सितंबर 2025 को शपथ पत्र के साथ जिलाधिकारी को लिखित शिकायत दी थी। शिकायत में पंचायत के विकास कार्यों और प्रधान द्वारा अर्जित की गई संपत्ति की जांच कराने की मांग की गई थी।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इन शिकायतों के बावजूद करीब 19 महीनों तक कोई जांच नहीं कराई गई और मामला ठंडे बस्ते में पड़ा रहा। इससे नाराज होकर क्षेत्र पंचायत सदस्य महेश कुशवाहा ने जिलाधिकारी को एक और पत्र भेजा, जिसमें उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई तो वह जिलाधिकारी कार्यालय के सामने आत्महत्या कर लेंगे।
आत्महत्या की चेतावनी मिलने के बाद प्रशासन हरकत में आया। जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) रोहित भारती को जांच के आदेश दिए। इसके बाद एक जांच कमेटी का गठन किया गया और टीम गांव पहुंची। जांच टीम ने गांव में पहुंचकर नाली, इंटरलॉकिंग सड़क सहित अन्य विकास कार्यों की फीता लगाकर माप-तौल की और ग्रामीणों से भी जानकारी ली।
हालांकि शिकायतकर्ता महेश कुशवाहा जांच से संतुष्ट नजर नहीं आए। उनका आरोप है कि जांच अधिकारी केवल औपचारिकता पूरी कर रहे हैं और जांच निष्पक्ष नहीं की गई। उनका कहना है कि जांच टीम ने प्रधान के पक्ष में रिपोर्ट तैयार करने की कोशिश की है, जबकि वास्तविक स्थिति कुछ और है।
अब पूरे मामले पर ग्रामीणों की नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी है। गांव के लोगों का कहना है कि यदि जांच निष्पक्ष तरीके से की जाए तो विकास कार्यों में हुई अनियमितताओं की सच्चाई सामने आ सकती है। फिलहाल यह देखना बाकी है कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और आरोपों की सच्चाई जांच में किस हद तक सामने आती है।
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