कुशीनगर में हनुमान एवं सरस्वती प्रतिमा का प्राण-प्रतिष्ठा एवं अनावरण समारोह संपन्न

खबर सार :-
श्री जगदीश सेवा न्यास, गौरी श्री रामपुर, कुशीनगर द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में  मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा और अनावरण किया गया। यह समारोह क्षेत्र में शिक्षा, संस्कृति एवं आध्यात्मिक मूल्यों के समन्वय का एक प्रेरणादायी उदाहरण बनकर उभरा।

कुशीनगर में हनुमान एवं सरस्वती प्रतिमा का प्राण-प्रतिष्ठा एवं अनावरण समारोह संपन्न
खबर विस्तार : -

कुशीनगर: श्री जगदीश सेवा न्यास, गौरीश्री रामपुर, कुशीनगर द्वारा भगवान हनुमान जी एवं ज्ञान की देवी सरस्वती जी की मूर्तियों का विधिवत प्राण-प्रतिष्ठा एवं अनावरण समारोह भव्य रूप से संपन्न हुआ। कार्यक्रम में क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों, शिक्षाविदों एवं श्रद्धालुओं की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र थे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश सरकार के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता गोपाल नारायण सिंह, माननीय कुलाधिपति, गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय, जमुहार (बिहार) ने की।

समारोह के प्रारंभ में श्री जगदीश सेवा न्यास के सचिव एवं अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ. बालमुकुंद पांडेय ने सभी अतिथियों एवं आगंतुकों का स्वागत एवं परिचय प्रस्तुत किया।

विद्यार्थियों को किया प्रेरित

अपने संबोधन में मुख्य अतिथि कलराज मिश्र ने शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षा व्यक्ति के व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करती है। उन्होंने ‘जगदीश पब्लिक स्कूल’ की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान क्षेत्र के छात्रों के लिए प्रकाशस्तंभ सिद्ध हो रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों को निरंतर परिश्रम कर लक्ष्य प्राप्ति हेतु प्रेरित किया तथा शिक्षा के क्षेत्र में सरकार की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत में शिक्षा मानवता, राष्ट्रीयता एवं राष्ट्रीय एकीकरण के लिए परमावश्यक है। सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं धार्मिक अनुष्ठान समाज में अपनत्व एवं आत्मीयता की भावना को सुदृढ़ करते हैं।

विशिष्ट अतिथि ने शिक्षा को बताया किस्मत की कुंजी

कार्यक्रम में उपस्थित आचार्य ईश्वर शरण विश्वकर्मा, पूर्व अध्यक्ष, उच्चतर सेवा चयन आयोग एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष, अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना ने धर्म एवं शिक्षा की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि धर्म जीवन के प्रति आशावादी दृष्टिकोण प्रदान करता है, जिससे छात्रों में आत्मानुशासन एवं चरित्र-निर्माण को बल मिलता है।

विशिष्ट अतिथि दयाशंकर सिंह ने सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि शिक्षा वह कुंजी है जो व्यक्ति की किस्मत के द्वार खोल देती है। उन्होंने अपने मंत्रालय को पारदर्शी एवं उत्तरदायी बनाने हेतु उठाए गए कदमों की जानकारी भी साझा की।

कई गणमान्य लोग रहे मौजूद

अध्यक्षीय भाषण में गोपाल नारायण सिंह ने धर्म की उपादेयता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि धर्म मनुष्य को ‘सत्य’ की ओर ले जाता है, जिससे वह अपने ‘स्व’ को पहचानकर जीवन का लक्ष्य प्राप्त करता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा से ही उच्च विचार एवं उच्च प्रत्यय का निर्माण संभव है।

समारोह में प्रोफेसर रजनीश कुमार शुक्ला, प्रोफेसर एस.पी. बंसल, संजय जी, अस्मित शर्मा, शत्रुंजीत सिंह, मुकेश उपाध्याय, डॉ. सुधाकर मिश्रा एवं प्रोफेसर ए.के. दुबे सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कार्यक्रम के उपरांत जलपान एवं भोजन की उत्तम व्यवस्था की गई। 

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