झांसीः सरकार ने कंडम वाहनों को सड़क से हटाने के लिए कुछ साल पहले स्क्रैप योजना लागू की थी। इस योजना में सड़कों पर धुआं उगल रहे पुराने वाहनों और पूरी तरह कंडम हो चुके वाहनों को स्क्रैप करने की योजना बनाई गई थी। इस योजना का उद्देश्य है कि लोग अपने पुराने वाहनों को कंडम करवाकर स्क्रैपिंग के बाद नया वाहन खरीदें। स्क्रैपिंग के बाद उन्हें एक प्रमाण पत्र मिलेगा जिसके आधार पर उन्हें नया वाहन खरीदने पर टैक्स में छूट देने का प्रावधान किया गया है।
यह योजना प्रदूषण कम करने और सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बनाई गई थी। इससे कंडम और पुराने वाहन सड़क पर खुद के लिए और दूसरे वाहनों के लिए खतरा नहीं बनेंगे। अपनी उम्र पूरी कर चुके कंडम वाहन सड़क पर खतरा बन गए हैं। सरकार ने करीब 3 साल पहले इस योजना को लागू किया था। लेकिन यह अभी भी पूरी तरह से लागू नहीं हो पाई है।
इस वजह से वाहनों को कंडम करने के बाद प्रमाण पत्र जारी न होने से लोगों को नए वाहन की खरीद पर टैक्स में छूट का लाभ नहीं मिल पा रहा है। सरकार की इस योजना के तहत जिले में करीब तीन स्क्रैप सेंटर खोले जाने थे। शुरुआत में इसके लिए आवेदन मांगे गए थे, लेकिन बड़ागांव में स्क्रैप सेंटर खोलने के लिए केवल एक ही आवेदन आया। उसने भी कुछ दिन प्रक्रिया पूरी की और फिर हाथ खड़े कर दिए।
इस संबंध में सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी डॉ. सुजीत सिंह ने बताया कि शासन स्तर से स्क्रैप सेंटर खोलने के लिए आवेदन मांगे गए थे। शुरुआत में दो फर्मों ने रुचि दिखाते हुए आवेदन किया था, लेकिन बाद में केवल एक ही आगे आई और उसने भी सेंटर खोलने से इनकार कर दिया। इसे लेकर योजना आयोग की टीम ने सर्वे किया था। एमएसटीसी पोर्टल पर सरकारी वाहनों की नीलामी और स्क्रैपिंग की जा रही है। जल्द ही जेम पोर्टल पर यह व्यवस्था शुरू होने वाली है, जिस पर लोग अपने वाहनों की नीलामी कर सकेंगे और उन्हें कंडम करने के बाद प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा।
जिसके आधार पर उन्हें नया वाहन खरीदने पर टैक्स में छूट दी जाएगी। अनुमान है कि जिले में एक लाख से अधिक वाहन अपनी आयु पूरी कर चुके हैं, जिनमें से कुछ वाहन चोरी-छिपे सड़कों पर दौड़ रहे हैं और पर्यावरण व सड़क सुरक्षा को चौपट कर रहे हैं। यहां यह भी गौर करने वाली बात है कि फर्म यहां स्क्रैप सेंटर खोलने में रुचि क्यों नहीं दिखा रही है, क्या स्क्रैप सेंटर खोलने की शर्तें फर्म के लिए उपयुक्त नहीं हैं या फिर उनमें कुछ ऐसी शर्तें हैं जिन्हें स्क्रैप सेंटर खोलने वाला व्यक्ति पूरा नहीं कर पा रहा है। इसलिए सरकार को इस दिशा में भी विचार करना चाहिए।
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