Chhath Puja 2025: लोक आस्था के महापर्व छठ के तीसरे दिन यूपी-बिहार समेत देशभर में भक्ति और आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। रविवार शाम को लाखों श्रद्धालु डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए नदियों, तालाबों और झीलों के किनारे जमा हुए। कई बड़े नेताओं ने भी परंपरा का पालन करते हुए भगवान भास्कर को अर्घ्य दिया और समाज में सुख, शांति और खुशहाली की कामना की। इस दौरान छठ घाटों पर बड़ी संख्या में लोग जमा हुए। चार दिन के इस महापर्व के तीसरे दिन सोमवार को बड़ी संख्या में छठ व्रती डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए गंगा तट समेत विभिन्न तालाबों और जलाशयों पर पहुंचे।
इस बीच, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री आवास पर डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया, जबकि उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने तारापुर में अपने पैतृक घर पर अर्घ्य दिया। सीएम नीतीश ने अपने परिवार के सदस्यों के साथ मुख्यमंत्री आवास एक अणे मार्ग पर छठ पूजा की। भगवान भास्कर को अर्घ्य देने की व्यवस्था की गई थी। उन्होंने यहां भगवान भास्कर को अर्घ्य दिया। इस मौके पर उनके परिवार के अलावा कई अधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद थे। उधर डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने अपने परिवार के सदस्यों के साथ तारापुर में डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया और बिहार के विकास, तरक्की और खुशहाली की प्रार्थना की।
इसके अलावा पटना के अलग-अलग छठ घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। पटना नगर निगम इलाके में छठ व्रतियों के लिए गंगा किनारे करीब 102 घाटों के साथ-साथ करीब 45 पार्कों और 63 तालाबों पर डूबते सूर्य को अर्घ्य देने की व्यवस्था की गई थी। सभी घाटों पर श्रद्धालुओं ने पहुंचकर भगवान भास्कर की पूजा की। गंगा किनारे बने छठ घाटों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। इन सभी जगहों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।
पटना की सभी सड़कों को रंग-बिरंगी दूधिया लाइटों और आकर्षक तोरणों से सजाया गया है। छठ घाट पर जाने में भक्तों को कोई दिक्कत न हो, इसके लिए युवाओं और बच्चों ने मोहल्लों से लेकर गलियों तक पक्की सड़कों पर झाड़ू लगाई और पानी छिड़का। रविवार शाम को भक्तों ने खरना किया और खरना का प्रसाद लेने के लिए लोग देर रात तक भक्तों के घरों का चक्कर लगाते रहे।
बता दें कि खरना के साथ ही भक्तों का 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू हुआ था। तीसरे दिन डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया गया। जबकि पर्व के चौथे और आखिरी दिन यानी मंगलवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद ही भक्तों का व्रत खत्म होगा। इसके बाद फिर से भक्त अन्न-जल ग्रहण करेंगे और 'पारण' करेंगे।
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