Supreme Court से पवन खेड़ा को मिली सशर्त अग्रिम जमानत, जांच में सहयोग अनिवार्य, विदेश यात्रा पर रोक

खबर सार :-
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला संतुलित नजर आता है, जिसमें एक ओर आरोपी को राहत दी गई है तो दूसरी ओर जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सख्त शर्तें भी लगाई गई हैं। पवन खेड़ा को फिलहाल गिरफ्तारी से राहत तो मिली है, लेकिन उन्हें हर कदम पर कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा। यह मामला आगे भी राजनीतिक और कानूनी रूप से अहम बना रहेगा।

Supreme Court से पवन खेड़ा को मिली सशर्त अग्रिम जमानत, जांच में सहयोग अनिवार्य, विदेश यात्रा पर रोक
खबर विस्तार : -

Pawan Kheda Anticipatory Bail: पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को उन्हें सशर्त अग्रिम जमानत प्रदान कर दी। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि यह राहत पूर्ण स्वतंत्रता नहीं है और उन्हें जांच एजेंसियों के साथ पूरी तरह सहयोग करना होगा। कोर्ट के आदेश के मुताबिक, जब भी पुलिस जांच के सिलसिले में बुलाएगी, खेड़ा को संबंधित थाने में उपस्थित होना अनिवार्य होगा। अदालत ने यह भी सख्ती से कहा कि वे किसी भी परिस्थिति में सबूतों को प्रभावित या उनके साथ छेड़छाड़ नहीं करेंगे। इसके अलावा, बिना सक्षम न्यायालय की अनुमति के देश से बाहर जाने पर भी रोक लगा दी गई है।

ट्रायल कोर्ट को अतिरिक्त शर्तें लागू करने का अधिकार

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में ट्रायल कोर्ट को यह अधिकार भी दिया है कि यदि आवश्यक हो तो वह अतिरिक्त शर्तें लागू कर सकता है। इससे साफ है कि अदालत इस मामले को गंभीरता से देख रही है और जांच प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाए रखना चाहती है। अपने फैसले में अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जमानत पर विचार करते समय जिन तथ्यों और दस्तावेजों का उल्लेख किया गया है, उनका अंतिम निर्णय पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया गया है कि वह स्वतंत्र रूप से कानून के अनुसार आगे की कार्यवाही करे और किसी भी टिप्पणी से प्रभावित न हो।

Supreme Court ने सुनवाई के बाद सुरक्षित रखा था फैसला

इस मामले में 30 अप्रैल को सुनवाई हुई थी। जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस एएस चंदुरकर की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। इसके बाद अब यह महत्वपूर्ण आदेश जारी किया गया है। पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब पवन खेड़ा ने असम के मुख्यमंत्री की पत्नी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि उनके पास कई पासपोर्ट हैं और विदेशों में अघोषित संपत्तियां हैं। इन आरोपों के बाद रिनिकी भुइयां सरमा ने खेड़ा और अन्य के खिलाफ गुवाहाटी क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई। मामला भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज किया गया।

हाईकोर्ट ने खारिज कर दी थी अग्रिम जमानत याचिका

इस कानूनी लड़ाई में एक दिलचस्प मोड़ तब आया जब 24 अप्रैल को गुवाहाटी हाईकोर्ट ने खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद उन्होंने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। इससे पहले तेलंगाना उच्च न्यायालय ने उन्हें सात दिनों की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी, लेकिन असम पुलिस की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने उस राहत पर अंतरिम रोक लगा दी थी।

जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करना अनिवार्य

सुप्रीम कोर्ट ने उस समय खेड़ा को निर्देश दिया था कि वे गुवाहाटी हाईकोर्ट का रुख करें। अब जब सर्वोच्च अदालत ने सशर्त अग्रिम जमानत दे दी है, तो उन्हें तत्काल गिरफ्तारी से राहत मिल गई है। हालांकि, यह स्पष्ट कर दिया गया है कि मामला अभी समाप्त नहीं हुआ है। जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। अदालत के इस फैसले से जहां एक ओर खेड़ा को अस्थायी राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर यह संदेश भी गया है कि जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करना अनिवार्य होगा।

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