सुबह जल्दी उठना सेहत का राज या कुछ और, जानें असली कारण

खबर सार :-
Health tips: हम बचपन से सुनते आ रहे हैं कि, सुबह जल्दी उठना सेहत के लिए फायदेमंद होता है। कई लोग इसे सफ़लता से भी जोड़कर देखते हैं, लेकिन इस बात में कितनी सच्चाई है, चलिए जानते हैं?

सुबह जल्दी उठना सेहत का राज या कुछ और, जानें असली कारण
खबर विस्तार : -

Success mantra: बचपन से हमें यही सिखाया जाता है कि सुबह जल्दी उठने से हमारा शरीर स्वस्थ्य रहता है, लेकिन आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में काम का इतना प्रेशर होता है कि रात में देर से नींद लगती है और सुबह जल्दी उठने में काफी देर हो जाती है। दिनभर के काम को लेकर जिस बात की चिंता सता रही होती है, रात में बिस्तर पर जाने की बाद वही बात मन में चलने लगती है और शरीर आराम करने के बजाय इन्हीं चीजों में उलझकर रह जाता है, लेकिन आपको यह पता होना चाहिए कि नींद शरीर के लिए मरम्मत का काम करता है। अगर यह साइकल बिगड़ता है तो इसका असर हमारे काम और जीवन दोनों में देखने को मिलती है।

क्या जल्दी उठना सफ़लता की निशानी

सुबह जल्दी उठाना हमने हमेशा अपने बड़ों से सीखा है। इसे हमेशा से अनुशासन और प्रोडक्टिविटी से जोड़कर देखा जाता है। हमें शुरू से ही यह सिखाया जाता है कि सुबह की धूप हमारे शरीर के लिए बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, लेकिन जानकारों के अनुसार हमारे लिए रोजाना 7 से 8 घंटे की नींद जरूरी होती है। ये मायने नहीं रखता कि आप रात में सो रहे हैं या दिन में जरूरत इस बात की है कि आप डेली 7, 8 घन्टे सोते हैं या नहीं। अगर आप पर्याप्त नींद नहीं लेते हैं तो इससे आपके शरीर में सूजन हो सकती है। आपके फेफड़ों को प्रभावित कर सकता है और आपकी इम्यून सिस्टम को कमजोर कर सकता है, जिससे आपके शरीर में रोगों से लड़ने की क्षमता कमजोर होने लगती है।

देर से उठने पर क्या होगा

आजकल काम के प्रेसर के कारण रात को देर से सोना और सुबह जल्दी उठना, डेली का रूटीन बन गया है, लेकिन अगर आप देर से उठते हैं तो इसका आपके शरीर पर क्या असर होगा? चलिए जानते हैं। सुबह देर से उठने का असर नींद की क्वालिटी पर पड़ता है। अच्छी नींद और REM स्लीप कम हो जाती है। यह शरीर की बेहतर मरम्मत के लिए सबसे ज्यादा जरूरी होता है। अगर आप देर से सोते हैं और सुबह जल्दी उठते हैं तो REM नींद पूरी नहीं हो पाती है। अगर आपके शरीर को भरपूर नींद मिलती है तो मांसपेशियां रिकवर कर पाती हैं और शरीर में ऑक्सीजन का लेवल बेहतर होता है। जिन लोगों को अस्थमा या लंग्स की समस्या होती है उन्हें इसका बुरा असर पड़ सकता है।

बॉडी क्लॉक

हमारे दिमाग में एक बॉडी क्लॉक मौजूद होता है, जिसे सर्कैडियन रिदम कहा जाता है। यह शरीर को रोशनी और अंधेरे का संकेत देती है कि कब जागना है कब सोना है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के अनुसार सिस्टम मेलाटोनिन और कोर्टिसोल जैसे हार्मोन को नियंत्रित करता है, जिससे शरीर को जागने का संकेत मिलता है। जब नींद की लय इससे मिल जाती है तो शरीर बेहतर तरीके से काम करने लगता है।

अन्य प्रमुख खबरें