Reduce Belly Fat : बढ़ती तोंद सिर्फ दिखने भर की समस्या नहीं है, बल्कि सेहत के लिए एक गंभीर चेतावनी भी है। विशेषज्ञों का मानना है पेट पर जमा चर्बी यानी बेली फैट शरीर के भीतर अनेक बीमारियों का आधार बनती है। खासतौर पर वह फैट जो त्वचा के नीचे ही नहीं, बल्कि आंतों और लिवर के आसपास जमा होता है, उसे विसरल फैट कहा जाता है और यही सबसे ज़्यादा खतरनाक माना जाता है। बड़ी तोंद हृदय रोग, डायबिटीज, फैटी लिवर, हाई बीपी, हार्मोनल असंतुलन जैसी कई स्थितियों की शुरुआत कर सकती है। इसलिए इसे हल्के में लेना नुकसानदायक हो सकता है। कुछ साधारण लेकिन नियमित रूप से अपनाए गए लाइफस्टाइल बदलावों से न केवल तोंद कम होती है बल्कि संपूर्ण स्वास्थ्य में भी आश्चर्यजनक सुधार देखा जा सकता है।
पर्याप्त पानी पीने से मेटाबॉलिज़्म बेहतर होता है और पेट भरा महसूस होता है जिससे अनावश्यक स्नैकिंग कम होती है। पानी, ग्रीन टी, डिटॉक्स वॉटर, ब्लैक टी या ब्लैक कॉफी जैसे पेय पदार्थ वजन घटाने की प्रक्रिया को तेज करते हैं। शरीर जब हाइड्रेटेड रहता है, तो कैलोरी बर्निंग अधिक प्रभावी होती है।
मिठाइयां, चॉकलेट, केक, पेस्ट्री, कैंडी और मीठे स्नैक्स शरीर में शुगर और खराब फैट की मात्रा बढ़ाते हैं। ये फूड आइटम्स लंबे समय तक शरीर में जमा होकर वजन बढ़ाने और पेट की चर्बी बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभाते हैं। नियमित रूप से मीठा खाने से लिवर पर भी दबाव बढ़ता है, जो आगे चलकर मेटाबॉलिक बीमारियों का कारण बन सकता है।
दालें, अंडे, ओट्स, हरी सब्ज़ियां, बादाम और अन्य प्रोटीन युक्त आहार धीरे पचते हैं और लंबे समय तक भूख नहीं लगने देते। इससे ओवरईटिंग कम होती है और कैलोरी सेवन नियंत्रित रहता है। वजन घटाने के लिए प्रोटीन बेहद महत्वपूर्ण मैक्रोन्यूट्रिएंट है, खासकर पेट की चर्बी कम करने के लिए।
ज्यादा नमक खाने से शरीर में पानी रुकने लगता है और ब्लोटिंग की समस्या पैदा होती है। सोडियम मेटाबॉलिज़्म को धीमा भी करता है जिससे फैट बर्निंग कम होती है। रात 8 बजे के बाद भोजन कम करें और तैलीय या नमकीन चीजों से दूरी बनाए रखें ताकि मेटाबॉलिक प्रोसेस स्मूद बना रहे।
ब्राउन राइस, ओट्स, गेहूं और अन्य होल ग्रेन फूड्स में मौजूद सॉल्युबल और इनसॉल्युबल फाइबर पाचन को बेहतर करते हैं और फैट घटाने में मदद करते हैं। इसके विपरीत, मैदे से बनी चीजें, रिफाइंड ब्रेड, बिस्किट और प्रोसेस्ड स्नैक्स वजन बढ़ाने और तोंद जमा करने के बड़े कारण हैं। होल ग्रेन्स धीरे-धीरे पचते हैं और ब्लड शुगर को संतुलित रखते हैं। तोंद कम करना कठिन जरूर है, लेकिन सही आदतों को लगातार अपनाया जाए तो कुछ ही हफ्तों में परिवर्तन दिखाई देने लगता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि शरीर के इस संकेत को नज़रअंदाज़ न करें और जल्दी से जल्दी स्वस्थ दिनचर्या अपनाएं।
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