बदलते मौसम में इम्युनिटी बढ़ाने का योगिक उपाय: सूर्यभेदन प्राणायाम

खबर सार :-
सूर्यभेदन प्राणायाम बदलते मौसम में शरीर को अंदर से मजबूत बनाने का प्राकृतिक और प्रभावी तरीका है। यह न केवल इम्युनिटी बढ़ाता है, बल्कि ऊर्जा, पाचन और मानसिक संतुलन में भी सुधार करता है। सही विधि और नियमित अभ्यास से यह प्राणायाम संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए वरदान साबित हो सकता है।

बदलते मौसम में इम्युनिटी बढ़ाने का योगिक उपाय: सूर्यभेदन प्राणायाम
खबर विस्तार : -

Suryabhedana Pranayama: ठंड के मौसम में बार-बार बदलाव के कारण सर्दी, खांसी, जुकाम और वायरल संक्रमण की समस्या आम हो गई है। ऐसे में शरीर की प्रतिरक्षा क्षमता को मजबूत बनाए रखना बेहद जरूरी है। योगशास्त्र में प्राणायाम को जीवन शक्ति को संतुलित और सक्रिय करने का प्रभावी साधन माना गया है। इन्हीं प्राणायामों में सूर्यभेदन प्राणायाम को इम्युनिटी बढ़ाने के लिए विशेष रूप से लाभकारी माना गया है।

क्या है सूर्यभेदन प्राणायाम

सूर्यभेदन प्राणायाम में ‘सूर्य’ का अर्थ ऊर्जा और गर्मी से है, जबकि ‘भेदन’ का मतलब जाग्रत करना। इस प्राणायाम में दाहिनी नासिका, जिसे पिंगला नाड़ी या सूर्य नाड़ी कहा जाता है, से श्वास ली जाती है। इससे शरीर के भीतर ऊष्मा और ऊर्जा का संचार होता है। हठयोग प्रदीपिका सहित कई प्राचीन योग ग्रंथों में इसे आठ प्रमुख कुम्भकों में शामिल किया गया है।

आयुष मंत्रालय की सलाह

आयुष मंत्रालय के अनुसार, सूर्यभेदन प्राणायाम शरीर को अंदर से गर्म रखता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है। विशेष रूप से सर्दियों और ठंडे मौसम में इसका अभ्यास फायदेमंद माना गया है। हालांकि, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और अधिक गर्मी से परेशान लोगों को इसे करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।

सूर्यभेदन प्राणायाम करने की विधि

इस प्राणायाम को करना काफी आसान है। इसमें सबसे पहले सुखासन, पद्मासन या किसी भी आरामदायक ध्यान मुद्रा में बैठ जाएं। अब बाईं नासिका को अंगूठे से बंद करें और दाहिनी नासिका से धीरे-धीरे गहरी सांस लें। सांस भरने के बाद दोनों नासिकाएं बंद कर कुछ सेकंड तक सांस रोकें। इसके बाद बाईं नासिका से धीरे-धीरे सांस छोड़ें। इसे एक चक्र माना जाता है। यह प्राणायाम सुबह खाली पेट 10 से 15 चक्र करना लाभकारी होता है।

स्वास्थ्य को मिलने वाले लाभ

योग विशेषज्ञों के अनुसार, सूर्यभेदन प्राणायाम के नियमित अभ्यास से सर्दी-जुकाम, नाक बंद होना और कफ से जुड़ी समस्याओं में राहत मिलती है। आयुर्वेद में इसे शरीर की अग्नि को प्रज्वलित करने वाला माना गया है। यह पाचन शक्ति को मजबूत करता है, फेफड़ों की क्षमता बढ़ाता है और शरीर को ऊर्जावान बनाता है। साथ ही, यह मानसिक एकाग्रता और जीवन शक्ति को भी जागृत करता है।

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