नई दिल्लीः प्राचीन काल से ही लहसुन का प्रयोग औषधीय रूम में किया जाता रहा है। सफेद छिलकों वाला लहसुन दिखने में जितना अच्छा लगता है, उसमें प्रकृति ने उतने की अनमोल गुणों की खान दे रखी हैं। यह लहसुन खाने में जायका बढ़ाने के साथ-साथ आयुर्वेद में खास स्थान है। शोध से पता चला है कि सफेद रंग का लहसुन कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने के साथ-साथ कैंसर को कम करने में भी कारगर है।
लहसुन का वैज्ञानिक नाम 'एलियम सैटिवम एल' है और इसकी उत्पत्ति मध्य एशिया से मानी जाती है। लैटिन भाषा में एलियम का अर्थ बल्बनुमा पौधा और सैटिवम का अर्थ पौधे की खास प्रजाति होता है। इसकी पैदावार भारत, चीन, फिलीपीन्स, ब्राजील, मैक्सिको जैसे देशों में बड़े पैमाने पर होती है। पुराने समय से लहसुन का इस्तेमाल औषधीय प्रयोजन के लिए किया जाता रहा है। आयुर्वेद और रसोई के नजरिए से लहसुन को खाने में इस्तेमाल किया जाता है। शोध से पता चला है कि लहसुन को पीसने से 'ऐलिसन' नामक यौगिक मिलता है, जो 'एंटीबायोटिक' गुणों से भरा होता है। इसके साथ ही इसमें प्रोटीन, एंजाइम और विटामिन बी, सैपोनिन और फ्लैवोनॉइड जैसे पदार्थ पाए जाते हैं। आयुर्वेद में माना गया है कि लहसुन के प्रयोग से कई प्रकार के रोगों से बचा जा सकता है। भोजन में इसका सेवन करने से दमा, बहरापन, कोढ़, बलगम, बुखार, हृदय रोग और क्षय रोगों को दूर करने में मदद मिलती है।
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की एक रिपोर्ट के मुताबिक लहसुन का सेवन करने से ब्लड शुगर में सुधार हो सकता है, जो डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद हो सकता है। लहसुन के सेवन से भूख भी बढ़ती है और पाचन तंत्र पूरी तरह ठीक रहता है। साथ ही यह डायबिटीज, टीयूएफएस, डिप्रेशन और कैंसर जैसी बीमारियों में भी काफी कारगर माना गया है। हृदय रोग के लिए लहसुन को ‘अमृत’ की संज्ञा दी गई है। हृदय रोग का मुख्य कारण रक्त वाहिनियों और धमनियों का सिकुड़ जाना है और इनमें कोलेस्ट्रॉल जम जाता है, जिसके कारण शरीर में रक्त-प्रवाह ठीक प्रकार से नहीं हो पाता। धमनियों के सिकुड़ जाने और उनमें कोलेस्ट्रॉल का जमाव होने के कारण रक्त का प्रवाह बाधित होता है। यह स्थिति एथेरोस्क्लेरोसिस कहलाती है, जिसमें धमनियों की दीवारों पर प्लाक (कोलेस्ट्रॉल, वसा और अन्य पदार्थों का जमाव) जमा हो जाते हैं। ऐसे में लहसुन के प्रयोग से सिकुड़ी हुई धमनियां साफ हो जाती हैं और व्यक्ति हृदय रोग से मुक्ति पा सकता है।
हमने बचपन से ही अपने घरों में लहसुन, धनिया और पुदीना की चटनी का इस्तेमाल होते देखा है। यह खाने में टेस्ट होने के साथ ही शरीर के लिए भी लाभप्रद होती है। लहसुन में अनेकों औषधीय गुण होते हैं। लहसुन, पुदीना, जीरा, धनिया, काली मिर्च और सेंधा नमक की चटनी खाने से रक्तचाप कम होता है। वहीं, इसकी दो-तीन तुर्रियां चबा लेने से हार्ट फेल होने की नौबत नहीं आती, ऐसे में नियमित रूप से लहसुन का इस्तेमाल दूध के साथ करना चाहिए। लहसुन के सेवन से हृदय पर पड़ने वाला गैस का दबाव कम हो जाता है। यह कोलेस्ट्रॉल को समाप्त करता है तथा हृदय रोगी को नया जीवन देता है।
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