T20 World Cup 2026 : छोटी टीमों के बेखौफ अंदाज ने उड़ाए बड़ी टीमों के होश, मुश्किल से जीत की दहलीज पार कर पा रहीं दिग्गज टीमें

खबर सार :-
आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 का धमाकेदार आगाज हो चुका है। 20 टीमों वाले इस बड़े टूर्नामेंट में शामिल छोटी टीमें अपने खेल से सबको आश्चर्यचकित कर रही हैं। वर्ल्ड कप के पहले मुकाबले में पाकिस्तान को नीदरलैंड की कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा। अमेरिका के खिलाफ भारत एक समय बड़े संकट की स्थिति में पहुंच गया था। नेपाल के सामने इंग्लैंड जैसी बड़ी टीम हारते-हारते बची। आने वाले मुकाबलों में बड़ा उलटफेर भी देखने को मिल सकता है।

T20 World Cup 2026 : छोटी टीमों के बेखौफ अंदाज ने उड़ाए बड़ी टीमों के होश, मुश्किल से जीत की दहलीज पार कर पा रहीं दिग्गज टीमें
खबर विस्तार : -

T20 World Cup 2026 : टी20 विश्व कप 2026 की शुरुआत बेहद रोमांचक रही है। 20 टीमों के इस बड़े टूर्नामेंट से पहले यह अनुमान लगाया जा रहा था कि बड़ी टीमें कमजोर मानी जाने वाली टीमों के खिलाफ आसानी से जीत दर्ज करेंगी। लेकिन अब तक खेले गए मुकाबलों ने इन धारणाओं को काफी हद तक चुनौती दी है। कई मैच ऐसे रहे हैं, जहां अप्रत्याशित नतीजे बहुत ही कम अंतर से टल गए और बड़ी टीमें किसी तरह शर्मिंदगी से बच पाईं। 

टी20 फॉर्मेट : परिणामों की अनिश्चितता ही सबसे बड़ी पहचान

क्रिकेट जैसे खेल के किसी भी वैश्विक आयोजन में 20 टीमों की मौजूदगी किसी भी स्तर पर काफी ज्यादा है। विश्व कप जैसी प्रतियोगिताओं में यह तर्क अक्सर दिया जाता रहा है कि कम टीमों के साथ टूर्नामेंट कराने से गुणवत्ता बेहतर रहती है और दर्शकों को उच्च स्तर का क्रिकेट देखने को मिलता है।

बड़े प्लेटफॉर्म पर छोटी टीमों को अक्सर दरकिनार भी किया जाता रहा है, लेकिन टी20 विश्व कप 2026 ने अपनी शुरुआत से ही यह दिखा दिया है कि टी20 फॉर्मेट को हल्के में नहीं लिया जा सकता और परिणामों की अनिश्चितता ही इसकी सबसे बड़ी पहचान है।

हर ग्रुप में मजबूत टीमों के साथ शामिल हैं कागजों पर कमजोर टीमें 

अगर ग्रुप स्टेज पर नजर डालें, तो हर ग्रुप में एक या दो मजबूत टीमों के साथ कई ऐसी टीमें शामिल हैं जिन्हें कागजों पर कमजोर माना जाता है। भारत के ग्रुप में नामीबिया, नीदरलैंड और अमेरिका जैसी टीमें हैं। ग्रुप बी में श्रीलंका और ऑस्ट्रेलिया के साथ जिम्बाब्वे, ओमान और आयरलैंड को रखा गया है।

ग्रुप सी में वेस्टइंडीज और इंग्लैंड के साथ इटली, नेपाल और स्कॉटलैंड हैं, जबकि ग्रुप डी में न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका के साथ अफगानिस्तान, यूएई और कनाडा शामिल हैं। कागजों पर ये मुकाबले एकतरफा लग सकते हैं, लेकिन जब टी20 फॉर्मेट में टीमें मैदान पर उतरती हैं, तो यही मुकाबले रोमांचक और प्रतिस्पर्धी बन जाते हैं। विश्व कप की शुरुआत ने ही यह संदेश दे दिया था। 

नीदरलैंड जैसी टीम को हराने में पाकिस्तान के छूटे पसीने

ओपनिंग मुकाबले में पाकिस्तान को नीदरलैंड जैसी टीम को हराने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ा। नीदरलैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 19.5 ओवर में 147 रन बनाए। जवाब में पाकिस्तान की टीम लक्ष्य तक तो पहुंच गई, लेकिन एक समय ऐसा भी आया जब वह मुकाबले में काफी पिछड़ती नजर आ रही थी। अनुभव ने अंत में पाकिस्तान की मदद जरूर की, लेकिन यदि नीदरलैंड की ओर से फील्डिंग में कुछ कम गलतियां हुई होतीं या मौके बेहतर तरीके से भुनाए गए होते, तो नतीजा पलट सकता था।

अमेरिका के सामने भारत की हालत हो गई थी पतली

उसी दिन एक और मुकाबले में मेजबान और डिफेंडिंग चैंपियन भारत की टीम अमेरिका के खिलाफ उतरी। भारत ने यह मैच 29 रनों से जीता, लेकिन स्कोरलाइन इस मुकाबले की असली तस्वीर नहीं दिखाती। वास्तव में भारतीय टीम एक समय गंभीर दबाव में थी। 14 ओवर में भारत का स्कोर 6 विकेट पर 77 रन था और 16.4 ओवर में 118 रन पर सात विकेट गिर चुके थे। ऐसे हालात में सूर्यकुमार यादव की 49 गेंदों पर 84 रनों की कप्तानी पारी निर्णायक साबित हुई, जिसने न केवल भारत को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया बल्कि टीम को शुरुआती शर्मिंदगी से भी बचाया।

न्यूजीलैंड के सामने अफगान लड़ाकों ने दर्ज कराई मजबूत मौजूदगी

रविवार को भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला, जब अफगानिस्तान और न्यूजीलैंड आमने-सामने थे। अफगानिस्तान भले ही अब क्रिकेट का नया नाम न हो, लेकिन बुनियादी ढांचे, संसाधनों और अनुभव के लिहाज से वह अब भी शीर्ष टीमों से पीछे है। इसके बावजूद अफगान टीम ने जिस तरह का खेल दिखाया, वह काबिले-तारीफ रहा।

अफगानिस्तान ने 20 ओवर में छह विकेट पर 182 रन बनाए और न्यूजीलैंड के शुरुआती दो विकेट सिर्फ 14 रन पर गिरा दिए। भारत के खिलाफ हालिया सीरीज से मिले अनुभव और मानसिक मजबूती ने न्यूजीलैंड को इस मुकाबले में वापसी का रास्ता दिखाया, लेकिन अफगान खिलाड़ियों ने अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

नेपाल जैसी टीम से हारते-हारते बची इंग्लैंड जैसी मजबूत टीम 

रविवार का सबसे चौंकाने वाला मुकाबला नेपाल के नाम रहा, जब उसने इंग्लैंड जैसी मजबूत टीम को पूरी तरह चुनौती दी। इस मैच का स्कोरबोर्ड ही इसकी कहानी बयान करता है। इंग्लैंड ने 20 ओवर में सात विकेट पर 184 रन बनाए, जिसके जवाब में नेपाल ने छह विकेट पर 180 रन बनाकर मुकाबले को आखिरी ओवर तक खींच लिया। अंतिम ओवर में सैम करन की सधी हुई गेंदबाजी (जिसमें उन्होंने छह गेंदों पर सिर्फ पांच रन दिए) इंग्लैंड के काम आई। वरना नेपाल की झोली में एक ऐतिहासिक जीत जाती दिख रही थी।

बड़े उलटफेरों का गवाह बनेगा यह टी20 विश्व कप 

इन शुरुआती नतीजों ने यह साफ कर दिया है कि टी20 विश्व कप 2026 अब सिर्फ बड़ी टीमों का खेल नहीं है। भले ही अनुभव और परिस्थितियों का फायदा अभी भी मजबूत टीमों के पास हो, लेकिन छोटी टीमों के लिए यह विश्व कप जीत और हार से ज्यादा मुकाबले की टक्कर में टिके रहने की लड़ाई बन चुका है। अब तक वे इस कसौटी पर काफी हद तक सफल भी रही हैं। ग्रुप स्टेज आगे बढ़ने के साथ यह उम्मीद और मजबूत हो गई है कि यह विश्व कप कुछ बड़े उलटफेरों का भी गवाह बनेगा।
 

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