Happy Birthday 'Azzu' : भारतीय क्रिकेट के इतिहास में कुछ नाम ऐसे हैं जिन्हें चाहकर भी भुलाया नहीं जा सकता। मोहम्मद अज़हरुद्दीन एक ऐसा ही व्यक्तित्व हैं, जिनका आज (8 फरवरी) जन्मदिन है। अज़हर के खेल में वह नजाकत थी जो करोड़ों प्रशंसकों का दिल जीत लेती थी, लेकिन उनके करियर का अंत एक ऐसे मोड़ पर हुआ जिसने पूरे खेल जगत को झकझोर कर रख दिया। 8 फरवरी 1963 को हैदराबाद में एक ऐसे क्रिकेटर का जन्म हुआ, जिसने आने वाले समय में बल्लेबाजी की परिभाषा ही बदल दी। अज़हरुद्दीन जब अपनी लय में होते थे, तो क्रिकेट के मैदान पर किसी कविता जैसा दृश्य उभरता था। उनकी कलाई का उपयोग इतना सटीक था कि सीधी आती गेंदों को भी वे बड़ी आसानी से मिडविकेट की दिशा में मोड़ देते थे।

अज़हर का टेस्ट डेब्यू किसी सुनहरे सपने से कम नहीं था। उन्होंने अपने करियर के शुरुआती तीन टेस्ट मैचों में लगातार तीन शतक जड़कर दुनिया को अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा दिया। यह एक ऐसा रिकॉर्ड था जिसने उन्हें रातों-रात भारतीय क्रिकेट का नया चमकता सितारा बना दिया।


अज़हरुद्दीन न केवल एक महान बल्लेबाज थे, बल्कि वे भारत के सबसे सफल कप्तानों में से एक और बेहतरीन फील्डर भी थे। उनकी कप्तानी में भारतीय टीम ने घरेलू मैदानों पर अजेय होने का तमगा हासिल किया। मैदान पर उनकी फुर्ती और कैच पकड़ने की क्षमता ने फील्डिंग के स्तर को एक नई ऊंचाई दी।

दुर्भाग्यवश, अज़हर के करियर का अंतिम अध्याय उनके खेल जैसा गरिमामय नहीं रहा। साल 2000 में मैच फिक्सिंग के आरोपों ने उनके सुनहरे करियर पर ग्रहण लगा दिया। जिस खिलाड़ी को दुनिया 'हीरो' मानती थी, वह अचानक विवादों के घेरे में आ गया। बीसीसीआई ने उन पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया, जिसे हालांकि वर्षों बाद अदालत ने हटा लिया, लेकिन उनकी साख पर लगा दाग कभी पूरी तरह नहीं धुल पाया।
आज जब हम मोहम्मद अज़हरुद्दीन के करियर को मुड़कर देखते हैं, तो दिल में एक टीस उठती है। वे एक ऐसे कलाकार थे जिनकी बल्लेबाजी को देखना किसी आनंदोत्सव से कम नहीं था। अफ़सोस की बात यह है कि इतिहास उन्हें उनकी शानदार कलाई के काम (Wrist work) के साथ-साथ फिक्सिंग के काले अध्याय के लिए भी याद रखेगा।

जब हम भारतीय क्रिकेट के सफल कप्तानों की चर्चा करते हैं, तो अक्सर सौरव गांगुली, एमएस धोनी और विराट कोहली के नाम सबसे पहले आते हैं। लेकिन 1990 के दशक में मोहम्मद अज़हरुद्दीन ने भारतीय टीम को एक नई पहचान दी थी। उनकी कप्तानी में भारत ने घरेलू मैदान पर अपना वर्चस्व स्थापित किया।
अज़हरुद्दीन ने लंबे समय तक भारतीय वनडे और टेस्ट टीम की कमान संभाली। उनके नेतृत्व में भारत ने कई ऐतिहासिक जीत दर्ज कीं:
अज़हर ने 1990 से 1999 के बीच 47 टेस्ट मैचों में भारत का नेतृत्व किया।
खास बात: अज़हर ने अपनी 14 टेस्ट जीत में से 13 जीत घरेलू मैदानों (भारत) पर हासिल की थीं, जिसने भारत को "स्पिन का किला" बनाने में मदद की।
एक समय अज़हरुद्दीन भारत के सबसे सफल वनडे कप्तान थे। उन्होंने रिकॉर्ड 174 मैचों में कप्तानी की।


अक्सर कप्तानी के दबाव में बल्लेबाजों का प्रदर्शन गिर जाता है, लेकिन अज़हर के साथ ऐसा नहीं था। कप्तान के तौर पर उन्होंने टेस्ट में 9 और वनडे में 4 शतक लगाए। उन्होंने अपनी शानदार कलाई के जादू से टीम को मोर्चे से लीड किया। भले ही बाद में सौरव गांगुली और धोनी ने उनके जीत के आंकड़ों को पीछे छोड़ दिया, लेकिन अज़हरुद्दीन ने ही वह नींव रखी थी जिस पर भारतीय क्रिकेट ने 90 के दशक में अपनी पहचान बनाई। वे एक ऐसे कप्तान थे जो शांत रहकर मैदान पर चपलता दिखाते थे।
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