PM Modi Speech Today: ईरान इज़रायल-अमेरिका के बीच जारी जंग (Iran Israel US War) हर गुज़रते दिन के साथ और बढ़ती जा रही है। एक तरफ़ जहां अमेरिका और इज़रायल लगातार ईरान पर हमले कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ़ ईरान भी इज़रायल के कई शहरों के साथ-साथ खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है। इस संघर्ष के बीच इज़रायल और अमेरिका ने ईरान के अहम इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और उसके परमाणु ठिकानों पर हमले किए। भारत ने खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा ठिकानों और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर हुए इन हमलों की निंदा की है।
मिडिल ईस्ट तनाव (middle east war) पर पीएम मोदी ने सोमवार को लोकसभा में बोलते हुए कहा कि भविष्य के लिए और बेहतर तैयारी करने के मकसद से सरकार ने 'परमाणु ऊर्जा अधिनियम' के ज़रिए परमाणु ऊर्जा के उत्पादन को बढ़ावा दिया है। कुछ दिन पहले ही 'लघु जलविद्युत विकास योजना' को भी मंज़ूरी दी गई थी; इस पहल से अगले पांच सालों में 1,500 मेगावाट की नई जलविद्युत क्षमता जुड़ने की उम्मीद है। उन्होंने आगे कहा कि जहां तक कूटनीति की बात है, भारत का रुख़ एकदम साफ़ है। शुरू से ही हमने इस संघर्ष को लेकर अपनी गहरी चिंता ज़ाहिर की है। मैंने खुद पश्चिम एशिया के सभी संबंधित नेताओं से बातचीत की है। मैंने सभी से तनाव कम करने और इस संघर्ष को खत्म करने की अपील की है।
प्रधानमंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि भारत नागरिकों को निशाना बनाने वाले हमलों के साथ-साथ ऊर्जा और परिवहन से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर पर होने वाले हमलों का भी विरोध करता है। व्यापारिक जहाज़ों पर हमले और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों जैसे कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य में किसी भी तरह की रुकावट डालना कतई मंज़ूर नहीं है। युद्ध के इस माहौल के बीच भी, भारत अपने जहाज़ों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए लगातार कूटनीतिक प्रयास कर रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर दोहराया कि भारत ने हमेशा मानवता के हित में और शांति के समर्थन में अपनी आवाज़ उठाई है। उन्होंने एक बार फिर इस बात पर ज़ोर दिया कि बातचीत और कूटनीति ही इस मुद्दे का एकमात्र व्यावहारिक समाधान हैं। हमारे द्वारा किया गया हर प्रयास तनाव कम करने और इस संघर्ष को खत्म करने के मकसद से ही होता है। इस संघर्ष में, किसी भी इंसान की जान को होने वाला कोई भी खतरा मानवता के हितों के खिलाफ़ है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत का प्रयास सभी पक्षों को जल्द से जल्द किसी शांतिपूर्ण समाधान तक पहुंचने के लिए प्रेरित करना है। जब भी इस तरह के संकट पैदा होते हैं, तो कुछ तत्व स्थिति का फ़ायदा उठाकर अपने स्वार्थ साधने की कोशिश करते हैं। इसलिए, क़ानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए ज़िम्मेदार सभी एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है।
प्रधानमंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि चाहे बात तटीय सुरक्षा की हो, सीमा सुरक्षा की, साइबर सुरक्षा की, या फिर रणनीतिक ठिकानों की—इन सभी क्षेत्रों की सुरक्षा को और मज़बूत किया जा रहा है। इस युद्ध के कारण पैदा हुई मुश्किल वैश्विक स्थिति का असर लंबे समय तक रहने की संभावना है; इसलिए, हमें हर समय तैयार रहना होगा। हमें एकजुट होकर खड़ा रहना होगा।
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