Mumbai Ahmedabad Bullet Train Project : वडोदरा में वडसर रोड ओवर ब्रिज पर फुल स्पैन लॉन्चिंग मेथड से 2 घंटे 13 मिनट में स्थापित हुआ बड़ा गर्डर

खबर सार :-
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना भारत की सबसे आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में से एक है। यह परियोजना हाई-स्पीड रेल तकनीक की दिशा में बड़ा कदम है। इस प्रोजेक्ट में वडोदरा में 40 मीटर लंबे गर्डर को 2 घंटे 13 मिनट में सफलतापूर्व स्थापित किया गया। इस प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लि़ के पास है। यह बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का विकास कर रहा है। यह प्रोजेक्ट करीब 508 किमी लंबा है जो मुंबई से अहमदाबाद को जोड़ता है।

Mumbai Ahmedabad Bullet Train Project : वडोदरा में वडसर रोड ओवर ब्रिज पर फुल स्पैन लॉन्चिंग मेथड से 2 घंटे 13 मिनट में स्थापित हुआ बड़ा गर्डर
खबर विस्तार : -

Mumbai Ahmedabad Bullet Train Project : मुंबई–अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना भारत की सबसे बड़ी और सबसे आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में से एक मानी जा रही है। यह सिर्फ एक ट्रेन लाइन नहीं है बल्कि भारत में हाई-स्पीड रेल तकनीक की दिशा में एक बड़ा कदम है। हाल ही में इस प्रोजेक्ट में वडोदरा के वडसर रोड ओवर ब्रिज पर 40 मीटर लंबे गर्डर को फुल स्पैन लॉन्चिंग मेथड (एफएसएलएम) के जरिए स्थापित किया गया।  

फुल स्पैन लॉन्चिंग मेथड एक साथ लॉन्च किया जाता है पूरा स्ट्रक्चर 

फुल स्पैन लॉन्चिंग मेथड खास इसलिए है क्योंकि इसमें पूरा स्ट्रक्चर एक साथ लॉन्च किया जाता है, जिससे काम तेजी से और सुरक्षित तरीके से पूरा हो जाता है। यह काम किसी खाली जगह पर नहीं बल्कि एक बेहद व्यस्त शहरी कॉरिडोर में किया गया, जहां हर दिन 100 से ज्यादा ट्रेनें और करीब 70,000 वाहन सड़क से गुजरते हैं। ऐसे माहौल में निर्माण कार्य करना अपने आप में बहुत चुनौतीपूर्ण होता है लेकिन इसे सिर्फ 2 घंटे 13 मिनट में सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया।

एनएचएसआरसीएल पर है इस पूरे प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी 

इस पूरे प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) के पास है, जो इस बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का विकास कर रही है। यह प्रोजेक्ट लगभग 508 किलोमीटर लंबा है जो मुंबई से अहमदाबाद को जोड़ता है। इसमें से अब तक करीब 349 किलोमीटर वायाडक्ट और 443 पियर्स का काम पूरा हो चुका है। इसके अलावा 17 नदी पुल, 5 प्री-स्ट्रेस्ड कंक्रीट (पीएससी) और 13 स्टील ब्रिज भी पूरे हो चुके हैं। शोर को कम करने के लिए 5.7 लाख से ज्यादा नॉइज बैरियर्स लगाए जा चुके हैं, जो लगभग 288 किलोमीटर के हिस्से को कवर करते हैं।

तेजी से चल रहा ट्रैक बिछाने का काम 

ट्रैक बिछाने का काम भी तेजी से चल रहा है। अब तक 374 ट्रैक किलोमीटर (187 रूट किलोमीटर) का आरसी ट्रैक बेड तैयार हो चुका है और 191 रूट किलोमीटर ट्रैक स्लैब भी बनकर तैयार हैं। इनमें से 74 रूट किलोमीटर में ट्रैक स्लैब बिछाकर सीमेंट अस्फाल्ट मोर्टार (सीएएम) इंजेक्ट किया जा चुका है। इलेक्ट्रिकल सिस्टम की बात करें तो 7700 से ज्यादा ओएचई मास्ट लगाए जा चुके हैं, जो लगभग 179 रूट किलोमीटर क्षेत्र को कवर करते हैं। अब टॉप कंडक्टर स्ट्रिंगिंग का काम भी शुरू हो चुका है, जो ट्रेन के इलेक्ट्रिक संचालन के लिए जरूरी है।

 प्रोजेक्ट का बड़ा हिस्सा है टनल निर्माण  

टनल निर्माण भी इस प्रोजेक्ट का एक बड़ा हिस्सा है। गुजरात में एकमात्र माउंटेन टनल का काम पूरा हो चुका है, जबकि महाराष्ट्र के पालघर जिले में सात टनलों में से दो का ब्रेकथ्रू हासिल हो चुका है। मुंबई के पास बीकेसी और शिलफाटा के बीच 21 किलोमीटर लंबी टनल में से 5 किलोमीटर का काम पूरा हो चुका है, और बाकी काम टनल बोरिंग मशीनों (टीबीएम) से किया जा रहा है।

डिपो की बात करें तो सूरत रोलिंग स्टॉक डिपो में व्हील लेथ इंस्टॉलेशन पूरा हो चुका है, जबकि सबर्मती डिपो में स्टील स्ट्रक्चर का काम चल रहा है। सभी आठ स्टेशनों वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, आनंद-नाडियाड, वडोदरा, अहमदाबाद और साबरमती की नींव पूरी हो चुकी है और फिनिशिंग का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है।
 

अन्य प्रमुख खबरें