Operation Sindoor : हाल ही में लोकसभा में एक चर्चा के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शब्दों ने देश को एक बार फिर उस अविश्वसनीय क्षण की याद दिला दी जब भारत ने आतंकवादियों को ऐसी सज़ा दी कि उनके आकाओं की रातों की नींद हराम हो गई। यह सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि भारत के दृढ़ संकल्प, सामरिक कौशल और आत्मनिर्भरता की एक सशक्त घोषणा थी।
प्रधानमंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर पर हुई चर्चा के दौरान ज़ोर देकर कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों को खुली छूट दी गई थी। उन्हें कब, कहाँ और कैसे कार्रवाई करनी है, इसका निर्णय पूरी तरह से उन पर छोड़ दिया गया था। 22 अप्रैल के बाद, जब उन्होंने सार्वजनिक रूप से यह संकल्प लिया था कि आतंकवादियों को मिट्टी में मिला दिया जाएगा और उनके सरगनाओं को ऐसी सज़ा मिलेगी जिसकी वे कल्पना भी नहीं कर सकते, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि यह वादा इतनी तेज़ी और सटीकता से पूरा होगा।
6 मई की रात, भारत ने अपनी योजना को अंजाम दिया, और पाकिस्तान कुछ नहीं कर पाया। केवल 22 मिनट में, हमारी सेना ने 22 अप्रैल की घटना का बदला ले लिया, अपने निर्धारित लक्ष्यों को सफलतापूर्वक भेदते हुए। यह सिर्फ गति का मामला नहीं था, बल्कि यह दर्शाता था कि भारत की तैयारी कितनी पुख्ता थी।
मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत ने यह साबित कर दिया है कि परमाणु ब्लैकमेलिंग का युग अब खत्म हो गया है और भारत अब ऐसी धमकियों के आगे झुकेगा नहीं। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान के हवाई अड्डों और संपत्तियों को भारी नुकसान हुआ, और आज भी उनके कई हवाई अड्डे 'आईसीयू में' हैं। बहावलपुर और मुरीदके जैसे आतंकी ठिकाने, जिनके बारे में कोई सोच भी नहीं सकता था कि वहां तक पहुंचा जा सकता है, उन्हें भी जमींदोज कर दिया गया। हमारी सेना ने अकल्पनीय को संभव कर दिखाया।
यह एक तकनीक-आधारित युद्ध का युग है। यदि पिछले 10 वर्षों में की गई तैयारियां पूरी नहीं की गई होतीं, तो कल्पना करना भी मुश्किल है कि हमें कितना नुकसान हो सकता था। ऑपरेशन सिंदूर ने न केवल पाकिस्तान को एक कड़ा संदेश दिया, बल्कि दुनिया को भारत की तकनीकी क्षमता का भी परिचय दिया। भारत ने पाक के सीने पर सटीक वार किया, यह दर्शाता है कि हमारी तकनीकी दक्षता कितनी उन्नत है।
शायद इस ऑपरेशन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह था कि ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से दुनिया ने पहली बार आत्मनिर्भर भारत की ताकत को पहचाना। भारत में बने ड्रोन और मिसाइलों ने पाकिस्तान की हथियार प्रणाली की पोल खोल दी। यह दर्शाता है कि भारत अब केवल आयात पर निर्भर नहीं है, बल्कि अपनी रक्षा क्षमताओं को स्वयं विकसित करने में सक्षम है। यह हमारी बढ़ती हुई सैन्य शक्ति और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम था।
इस घटना ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि भारत अब वह देश नहीं है जो केवल प्रतिक्रिया देगा, बल्कि वह सक्रिय रूप से अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने और आतंकवाद को उसकी जड़ से खत्म करने के लिए कदम उठाएगा। आतंक के आकाओं की नींद उड़ी हुई है, और यह इस बात का प्रमाण है कि भारत ने अपने संकल्प को कितनी गंभीरता से लिया है।
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