Parliament E-Cigarette Controversy: लोकसभा के अंदर ई-सिगरेट पीने की कथित घटना ने पार्लियामेंट में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। केंद्रीय मंत्री और BJP MP अनुराग सिंह ठाकुर ने अब इस घटना को बेहद गंभीर बताया है और स्पीकर को औपचारिक शिकायत दी है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) के एक MP ने सदन के अंदर खुलेआम ई-सिगरेट का इस्तेमाल किया, जो न केवल पार्लियामेंट्री नियमों का उल्लंघन है, बल्कि कानूनन अपराध भी है।
अनुराग ठाकुर द्वारा लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से की गई शिकायत के अनुसार, लोकसभा जैसी पवित्र संस्था, जिसे भारतीय लोकतंत्र का सबसे पवित्र स्थान माना जाता है, में प्रतिबंधित पदार्थों और निषिद्ध उपकरण का इस्तेमाल किसी भी हालत में मंजूर नहीं है। यह कृत्य पार्लियामेंट की गरिमा को ठेस पहुंचाने और सदन की कार्यवाही की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाता है। शिकायत में कहा गया है कि सरकार और संसद ने ई-सिगरेट और निकोटीन से जुड़े प्रोडक्ट्स पर साफ तौर पर बैन लगा दिया है। इसलिए, सदन के अंदर इनका इस्तेमाल न सिर्फ पार्लियामेंट्री डिसिप्लिन का उल्लंघन है, बल्कि देश के युवाओं में भी गलत मैसेज जाता है।
अनुराग ठाकुर ने इसे गंभीर कानूनी और नैतिक उल्लंघन बताते हुए तुरंत कार्रवाई की मांग की। उन्होंने लोकसभा स्पीकर से इस घटना का तुरंत संज्ञान लेने की अपील की। सदन के अंदर किसी सही कमेटी या सिस्टम से जांच करवाई जानी चाहिए, और संबंधित MP के खिलाफ नियमों के मुताबिक डिसिप्लिनरी एक्शन शुरू किया जाना चाहिए, और एक मिसाल कायम की जानी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी सदस्य सदन की मर्यादा तोड़ने की हिम्मत न करे। अनुराग ठाकुर ने कहा कि लोकसभा की गरिमा की रक्षा करना सदन के हर सदस्य की जिम्मेदारी है और उम्मीद जताई कि स्पीकर अपने नेतृत्व में यह पक्का करेंगे कि नियमों का हर कीमत पर पालन हो।
इस घटना के बाद संसद के गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं, और अब सबकी निगाहें लोकसभा सेक्रेटेरिएट और स्पीकर पर हैं कि वे इस आरोप पर आगे क्या एक्शन लेते हैं। अब सवाल ये है कि इस मामले में तृणमूल सांसद के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी। इसकी प्रक्रिया क्या है. वैसे तो भारत में ई सिगरेट पीना बैन है और इसे ना केवल अपराध माना जाता है बल्कि सजा भी होती है।
संसदीय नियमों के तहत, अगर लोकसभा की कार्यवाही के दौरान सदन की गरिमा या सदन के नियमों का उल्लंघन होता है, तो स्पीकर के पास पार्लियामेंट्री प्रिविलेज और हाउस रूल्स के तहत किसी सांसद के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार है। यह कार्रवाई उल्लंघन के आधार पर होगी। स्पीकर ने साफ कहा है कि अगर कोई घटना उनके ध्यान में आती है, तो सही जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी। वैसे तो जब कोई मामला जटिल होता है, तो उसमें गहराई से जांच की आवश्यकता होती है या वह संसदीय विशेषाधिकार के उल्लंघन से जुड़ा होता है तो बेशक स्पीकर या सदन किसी संसदीय समिति को जांच सौंप सकता है.
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