नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली का प्रगति मैदान इन दिनों केवल कंक्रीट का ढांचा नहीं, बल्कि भविष्य की इबारत लिखने वाला एक वैश्विक मंच बन गया है। 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' (India AI Impact Summit 2026) के समापन सत्र में केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnav) ने जो आंकड़े और तथ्य पेश किए, वे भारत की बदलती वैश्विक छवि की तस्दीक करते हैं। करीब 5 लाख से अधिक लोगों की सक्रिय भागीदारी और 250 अरब डॉलर (लगभग 21 लाख करोड़ रुपये) से अधिक के निवेश के वादों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि एआई (Artificial Intelligence) के इस दौर में भारत केवल एक 'उपयोगकर्ता' नहीं, बल्कि 'विश्व गुरु' की भूमिका में आ गया है।
इस आयोजन (इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026) की सबसे बड़ी कामयाबी इसकी व्यापक पहुंच रही। अश्विनी वैष्णव ने पत्रकारों से बात करते हुए बड़े गर्व से बताया कि प्रदर्शनी और अलग-अलग कार्यक्रमों में 5 लाख से ज्यादा लोग पहुंचे। दुनिया भर में होने वाले तकनीक से जुड़े कार्यक्रमों के लिहाज से यह एक हैरान कर देने वाली संख्या है। खास बात यह रही कि यहाँ सिर्फ मशीनों को समझने वाले विशेषज्ञ ही नहीं थे, बल्कि छात्रों, कारोबारियों और आम लोगों ने भी इसमें इतनी दिलचस्पी दिखाई कि यह एक 'जन-आंदोलन' जैसा लगने लगा। मंत्री ने कहा, "हम यहाँ तक अचानक नहीं पहुंचे हैं। इसके पीछे एक सोची-समझी योजना और कड़ी मेहनत रही है। पहले भारत ने एआई के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा तैयार किया, फिर उसकी बारीकियों और उलझनों को दूर किया और आज नतीजा यह है कि हमने दुनिया के तमाम देशों को एक साथ लाकर खड़ा कर दिया है। यह हमारी डिजिटल ताकत का असली नजारा है।"
इस पूरे सम्मेलन का सबसे दमदार और उत्साहजनक पहलू आर्थिक मोर्चे पर दिखाई दिया। अश्विनी वैष्णव ने मीडिया के सामने यह साफ कर दिया कि भारत की एआई (AI) ताकत पर दुनिया भर के निवेशकों का भरोसा चरम पर है। आंकड़ों की बात करें तो डेटा सेंटर, इंटरनेट कनेक्टिविटी और मशीनी कलपुर्जों (हार्डवेयर) के क्षेत्र में 250 अरब डॉलर (करीब 21 लाख करोड़ रुपये) से भी ज्यादा के निवेश के प्रस्ताव मिल चुके हैं। वहीं, नई खोज और रिसर्च के काम के लिए बड़े विदेशी निवेशकों ने करीब 20 अरब डॉलर लगाने का पक्का वादा किया है। मंत्री ने इस बात पर खास जोर दिया कि निवेश का यह सिलसिला अभी थमा नहीं है, बल्कि आंकड़े हर दिन बढ़ रहे हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि यह पैसा सिर्फ दिल्ली-मुंबई जैसे बड़े महानगरों तक सिमट कर नहीं रहेगा, बल्कि इसे छोटे शहरों और कस्बों तक पहुँचाया जाएगा ताकि वहां भी तकनीक का एक मजबूत जाल बिछाया जा सके। जानकारों का तो यहाँ तक कहना है कि अगर यह सब जमीन पर उतरा, तो आने वाले 10 सालों में देश में रोजगार के करोड़ों नए अवसर पैदा होंगे।
आज पूरी दुनिया में एक अनजाना सा डर घर कर गया है कि कहीं कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) हाड़-मांस के इंसानों की जगह न ले ले और रोजगार के अवसर न छीन ले। ऐसे नाजुक वक्त में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 'मानव केंद्रित एआई' का मंत्र "इंसानों के लिए, इंसानों द्वारा और इंसानों के भले के लिए" वैश्विक बिरादरी के लिए एक नई उम्मीद बनकर उभरा है। अश्विनी वैष्णव ने मीडिया से चर्चा के दौरान साफ तौर पर कहा कि समिट में आए विदेशी मेहमानों और मंत्रियों ने भारत के इस नजरिए को न केवल सराहा, बल्कि इसे हाथों-हाथ लिया है। भारत ने दुनिया को यह कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है कि तकनीक का असली मकसद सिर्फ अंधाधुंध मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि समाज के हर तबके को साथ लेकर चलना और न्याय दिलाना होना चाहिए। इसीलिए 'जिम्मेदार एआई' की इस मुहिम में देश के ढाई लाख छात्र-छात्राओं को भी जोड़ा गया है। यह इस बात का सीधा प्रमाण है कि भारत अपनी आने वाली पीढ़ी को सिर्फ मशीनों के साथ काम करना ही नहीं सिखा रहा, बल्कि उन्हें उन संस्कारों और नैतिक मूल्यों से भी लैस कर रहा है जो तकनीक को बेलगाम होने से रोकेंगे।
दुनिया के देशों के साथ भारत के सधे हुए रिश्तों और हमारी संतुलित विदेश नीति का असर इस समिट के साझा घोषणापत्र (डिक्लेरेशन पेपर) पर साफ तौर पर नजर आया। अश्विनी वैष्णव ने पत्रकारों को बताया कि इस ऐतिहासिक समझौते पर अब तक 70 से ज्यादा देश अपनी सहमति की मुहर लगा चुके हैं। उन्हें पूरा भरोसा है कि कार्यक्रम के खत्म होने तक यह संख्या 80 के पार चली जाएगी। गौर करने वाली बात यह है कि दुनिया का कोई भी ताकतवर या रसूखदार देश इस पहल से अछूता नहीं रहा है। सबने एक सुर में भारत का साथ दिया है, जो इस बात का जीता-जागता सबूत है कि अब तकनीक की दुनिया में भारत की रजामंदी के बिना कोई भी बड़ा फैसला या नियम तय नहीं किया जा सकेगा। भारत अब केवल सुझाव देने वाला देश नहीं, बल्कि नियम बनाने वाला 'ग्लोबल लीडर' बन चुका है।
एआई की ताकत के साथ आने वाले खतरों से निपटने के लिए भारत ने अपनी कमर कस ली है। अश्विनी वैष्णव ने जानकारी दी कि देश में 12 प्रमुख संस्थानों का एक नेटवर्क तैयार किया गया है। ये संस्थान एआई सुरक्षा मानकों, एल्गोरिदम की पारदर्शिता और साइबर सुरक्षा पर चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं। वहीं, हार्डवेयर के क्षेत्र में चीन और अन्य देशों पर निर्भरता कम करने के लिए 'पैक्स सिलिका' (Pax Silica) समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता भारत में पूरे सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन और चिप निर्माण (Fab units) को मजबूत करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। भारत अब 'सॉफ्टवेयर हब' से आगे बढ़कर 'हार्डवेयर और चिप मेकर' राष्ट्र बनने की ओर अग्रसर है।
एक पत्रकार की पैनी नजर से देखें, तो भारत की इस जबरदस्त कामयाबी के पीछे कोई तुक्का नहीं, बल्कि बहुत गहरी और ठोस रणनीति छिपी है। हर किसी के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर वह क्या जादू है, जो दुनिया के बड़े-बड़े पैसे वालों और तकनीक के दिग्गजों को भारत की ओर खींच लाया है? असल में, इस खिंचाव की तीन मुख्य वजहें हैं। पहली और सबसे बड़ी ताकत हमारे देश का हुनरमंद युवा है; आज शायद ही दुनिया का कोई ऐसा हिस्सा हो जहाँ भारतीय इंजीनियरों और डेवलपर्स की बुद्धि का डंका न बज रहा हो। दूसरी वजह है डेटा का खजाना। एआई (AI) को सिखाने-पढ़ाने के लिए जिस तरह का विशाल और अलग-अलग तरह का डेटा चाहिए, वह भारत के अलावा कहीं और मिलना मुमकिन ही नहीं है। और इन सबसे ऊपर, आज जब पूरी दुनिया में उथल-पुथल मची है, भारत एक भरोसेमंद साथी बनकर उभरा है। निवेशकों को पता है कि यहाँ एक स्थिर सरकार है और लोकतंत्र का पहरा है, जहाँ उनका पैसा और उनकी मेहनत की तकनीक पूरी तरह सुरक्षित है। यही वजह है कि आज दुनिया की हर बड़ी कंपनी भारत में अपनी जड़ें जमाने को बेताब है।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के संबोधन का सार भी इसी आत्मविश्वास को झलकाता है कि भारत अब एआई मिशन के अगले और अधिक चुनौतीपूर्ण चरण के लिए पूरी तरह तैयार है। आने वाले समय में देश का पूरा ध्यान उन्नत कंप्यूट क्षमता (Advanced Compute Power) के विस्तार और भारतीय भाषाओं की विविधता को समेटने वाले विशेष एआई मॉडल्स (Indic AI Models) विकसित करने पर होगा।वास्तव में, 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' (India AI Impact Summit 2026) महज एक सरकारी आयोजन या इवेंट भर नहीं था, बल्कि यह वैश्विक पटल पर भारत के 'डिजिटल सूर्योदय' का उद्घोष था। यदि आज किए गए ये वादे और निवेश धरातल पर उसी गति से उतरते हैं, तो वह दिन अब दूर नहीं जब 'मेड इन इंडिया एआई' पूरी दुनिया के प्रशासन, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा व्यवस्था की धुरी बनेगा। भारत ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि वह अब तकनीक के बाजार में केवल एक मूक उपभोक्ता बनकर नहीं रहेगा, बल्कि वह भविष्य की तकनीक का भाग्य विधाता बनने की क्षमता और संकल्प रखता है।
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