Mohan Bhagwat in Lucknow : जाति की दीवारें गिराकर 'हम सब हिंदू हैं' की बड़ी लकीर खींचें- लखनऊ में मोहन भागवत का संबोधन

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Mohan Bhagwat in Lucknow :

Mohan Bhagwat in Lucknow : जाति की दीवारें गिराकर 'हम सब हिंदू हैं' की बड़ी लकीर खींचें- लखनऊ में मोहन भागवत का संबोधन
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Mohan Bhagwat in Lucknow : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने बुधवार को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ (Lucknow) में समाज को एकता का एक नया सूत्र दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राष्ट्र निर्माण की पहली शर्त सामाजिक समरसता और जातिगत भेदभाव का पूर्ण उन्मूलन है। भागवत ने आह्वान किया कि हमें संकीर्ण पहचानों से ऊपर उठकर 'हम सब हिंदू हैं' के भाव को आत्मसात करना होगा, क्योंकि यही वह शक्ति है जो अस्पृश्यता जैसी कुरीतियों को जड़ से समाप्त कर सकती है।

Mohan Bhagwat in Lucknow : जाति अब व्यवस्था नहीं, अव्यवस्था है

अपने संबोधन के दौरान संघ प्रमुख ने ऐतिहासिक संदर्भों और वर्तमान चुनौतियों पर बेबाकी से बात की। उन्होंने कहा कि जाति कभी शाश्वत व्यवस्था नहीं रही, बल्कि आज के दौर में यह एक बड़ी 'अव्यवस्था' बन चुकी है। प्राचीन काल में यह कार्य-आधारित हो सकती थी, लेकिन आज के बदलते परिवेश में हर व्यक्ति हर कार्य करने में सक्षम है। उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि नई पीढ़ी और तरुण वर्ग के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव आ रहा है और जाति की दीवारें धीरे-धीरे ढह रही हैं। उन्होंने समाज से आग्रह किया कि एक ऐसी बड़ी लकीर खींची जाए जहाँ केवल 'हिंदू' की पहचान सर्वोपरि हो।

Mohan Bhagwat in Lucknow : आधुनिकीकरण बनाम पश्चिमीकरण, विवेक जरूरी

मोहन भागवत ने तकनीक और प्रगति पर संघ के दृष्टिकोण को स्पष्ट करते हुए कहा कि वे आधुनिकीकरण के विरोधी नहीं हैं, बल्कि 'अंधानुकरण' के विरुद्ध हैं। उन्होंने कहा, "हमें आधुनिक बनने की आवश्यकता है, लेकिन पश्चिमीकरण की अंधी दौड़ से बचना होगा।" जो नया है उसे परखें, और यदि वह हमारे शाश्वत मूल्यों के अनुरूप है, तभी उसे स्वीकार करें। बदलते पारिवारिक परिवेश पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि संयुक्त परिवारों का टूटना समाज के लिए चुनौती है। उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी कि वे बच्चों के 'स्क्रीन टाइम' पर नियंत्रण रखें और 12 वर्ष की आयु तक उनके चरित्र निर्माण पर विशेष ध्यान दें।


प्रमुख बिंदुओं पर एक नजर:

  •  मंदिरों का प्रबंधन: मंदिरों का संचालन भक्तों और समाज के प्रतिष्ठित व्यक्तियों के पास होना चाहिए ताकि वे समाज सेवा के केंद्र बन सकें।
  •  महिला शक्ति: राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भूमिका को सीमित नहीं किया जा सकता; महिला शक्ति ही समाज के उत्थान की धुरी है।
  •  संस्कार और शिक्षा: धर्म और परंपरा की शिक्षा घर से शुरू होनी चाहिए, जबकि विद्यालय केवल मूल्यों का संचार करें।

Mohan Bhagwat in Lucknow : राजनीति और समाज का अंतर्संबंध

राजनीतिक शुद्धिकरण के मुद्दे पर सरसंघचालक ने कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि नेता केवल समाज का एक उपकरण मात्र होते हैं। यदि समाज जागरूक और संगठित होगा, तो राजनीति में व्याप्त विकृतियां अपने आप दूर हो जाएंगी। उन्होंने भारत को एक 'बहुसांस्कृतिक' देश के बजाय 'विविधतापूर्ण एक संस्कृति' वाला राष्ट्र बताया, जहाँ भाषा और खानपान अलग होने के बावजूद मूल आत्मा एक है।

Mohan Bhagwat in Lucknow : आर्थिक और वैश्विक दृष्टिकोण

वैश्विक स्तर पर चल रहे 'टैरिफ वॉर' (शुल्क युद्ध) पर डॉ. भागवत ने भरोसा जताया कि भारत पर इसका असर सीमित होगा। उन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था के लिए 'मास प्रोडक्शन' (बड़ी मशीनों द्वारा उत्पादन) के बजाय 'प्रोडक्शन बाय मासेज' (जनसामान्य द्वारा उत्पादन) की वकालत की। उनके अनुसार, जब संपत्ति का वितरण न्यायपूर्ण होगा और नैतिक विकास साथ चलेगा, तभी भारत वास्तव में एक विकसित राष्ट्र कहलाएगा। अंत में, उन्होंने जोर देकर कहा कि हिंदू समाज देश की सबसे बड़ी ताकत है। यदि यह समाज संगठित और व्यसनमुक्त होकर जल संरक्षण और स्वावलंबन जैसे कार्यों में जुट जाए, तो भारत को विश्व गुरु बनने से कोई नहीं रोक सकता।

 

 

 

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