नई दिल्ली : ठीक एक साल पहले, भारतीय सैन्य इतिहास के पन्नों में शौर्य की एक ऐसी इबारत लिखी गई थी जिसने न केवल दुश्मन के दुस्साहस को कुचला, बल्कि दक्षिण एशिया की रणनीतिक दिशा ही बदल दी। 'ऑपरेशन सिंदूर' की पहली वर्षगांठ आज देश की बढ़ती सैन्य ताकत और अटूट राजनीतिक इच्छाशक्ति की याद दिलाती है। यह केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए कायरतापूर्ण आतंकी हमले का वह करारा जवाब था, जिसने पाकिस्तान और पीओके में छिपे आतंकियों के आकाओं की नींद उड़ा दी। भारत ने इस ऑपरेशन के माध्यम से दुनिया को दिखा दिया कि 'नया भारत' अब केवल रक्षात्मक नहीं रहता, बल्कि आतंक की जड़ पर प्रहार करने के लिए घर में घुसकर मारना भी जानता है।
ऑपरेशन सिंदूर की सबसे बड़ी ताकत इसका सटीक समय और तीनों सेनाओं का अभूतपूर्व तालमेल (जॉइंटनेस) था। वायुसेना के राफेल विमानों ने स्कैल्प मिसाइलों और हैम्मर बमों के साथ महज 23 मिनट के भीतर पाकिस्तान के भीतर स्थित आतंकियों के 9 बड़े लॉन्चपैड्स को मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया। सियालकोट से लेकर बहावलपुर तक की गई इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया कि भारत की मारक क्षमता अब सीमाओं के बंधन से मुक्त है।
इस ऑपरेशन की सफलता में भारत के 'आत्मनिर्भर' होने की झलक भी साफ दिखी। जहां एक ओर ब्रह्मोस मिसाइलों और तेजस विमानों ने अपना लोहा मनवाया, वहीं दूसरी ओर इसरो की सैटेलाइट निगरानी और 'आकाशतीर' डिफेंस सिस्टम ने दुश्मन के हर जवाबी हमले को नाकाम कर दिया। रिपोर्टों के अनुसार, भारत ने पाकिस्तान की वायुसेना की करीब 20 प्रतिशत क्षमता को ध्वस्त कर दिया था, जो किसी भी परमाणु संपन्न देश के खिलाफ एक अत्यंत साहसिक रणनीतिक कदम था।
आधुनिक सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर की मिसाल इसकी 'सीमित अवधि' के लिए दी जाती है। महज चार दिनों में अपने लक्ष्यों को पूरा कर युद्धविराम स्वीकार करना भारत की परिपक्वता को दर्शाता है। इससे न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि एक जिम्मेदार शक्ति के रूप में उभरी, बल्कि नागरिकों को नुकसान पहुंचाए बिना केवल आतंकी बुनियादी ढांचे को खत्म करने की नीति की भी सराहना हुई। आज एक साल बाद, ऑपरेशन सिंदूर का असर पाकिस्तान के साथ-साथ चीन की सीमाओं पर भी महसूस किया जा रहा है। सैन्य नेतृत्व में सीडीएस (CDS) का पद और रक्षा क्षेत्र में निजी भागीदारी ने भारतीय सेना को एक ऐसी धार दी है, जिसने भविष्य के युद्धों के लिए एक 'नया मानक' तय कर दिया है।
यह ऑपरेशन गवाह है कि भारत की शांति की अपील को उसकी कमजोरी समझने की भूल अब दुश्मन को बहुत भारी पड़ेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 'सुरक्षा सर्वोपरि' की यह नीति आज हर भारतीय को गौरव की अनुभूति कराती है।
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