नई दिल्ली: एयर इंडिया की फ्लाइट एआई 171 दुर्घटना की जांच पूरी होने की खबरों पर विराम लगाते हुए विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो ने साफ कर दिया है कि जांच अब भी जारी है और कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। एजेंसी ने कहा है कि मीडिया में चल रही अटकलें तथ्यहीन हैं और आधिकारिक रिपोर्ट आने से पहले किसी भी तरह का निष्कर्ष निकालना गलत होगा। विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो ने बयान जारी कर स्पष्ट किया कि वह एयरक्राफ्ट दुर्घटनाओं और घटनाओं की जांच नियमावली 2025 और अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन के अनुलग्नक 13 के तहत निर्धारित प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन कर रहा है। जांच एक तकनीकी और साक्ष्य आधारित प्रक्रिया है जिसका उद्देश्य दोष तय करना नहीं बल्कि वास्तविक कारणों की पहचान कर भविष्य में सुरक्षा मानकों को मजबूत करना होता है।
12 जून 2025 को अहमदाबाद हवाई अड्डे से उड़ान भरने के कुछ ही सेकंड बाद एयर इंडिया की फ्लाइट एआई 171 दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। विमान एक मेडिकल कॉलेज परिसर पर गिरा। इस भयावह हादसे में 241 यात्री और चालक दल के सदस्य तथा जमीन पर मौजूद 19 लोगों की मौत हुई। देश ने इसे हाल के वर्षों की सबसे त्रासद विमान दुर्घटनाओं में गिना। हादसे के बाद से जांच कई स्तरों पर चल रही है। तकनीकी विशेषज्ञों, एयरलाइन प्रतिनिधियों, विमान निर्माता कंपनी और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की भागीदारी से डेटा एकत्र किया गया है। ब्लैक बॉक्स, फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर से प्राप्त सूचनाओं का विश्लेषण किया जा रहा है। साथ ही मौसम, तकनीकी रखरखाव रिकॉर्ड, पायलट प्रशिक्षण और एयर ट्रैफिक कंट्रोल के संचार का भी परीक्षण हो रहा है।
एएआईबी ने यह भी कहा कि पहले जारी की गई प्रारंभिक रिपोर्ट उस समय उपलब्ध तथ्यों पर आधारित थी। ऐसी रिपोर्टें जांच की प्रगति के बीच पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जारी की जाती हैं। लेकिन इन्हें अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। अंतिम रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार की जाएगी और उसमें कारणों के साथ साथ सुरक्षा संबंधी सिफारिशें भी शामिल होंगी। एजेंसी ने मीडिया संगठनों से संयम बरतने की अपील की है। बयान में कहा गया कि बिना सत्यापन के रिपोर्टिंग से पीड़ित परिवारों में अनावश्यक चिंता पैदा होती है और पेशेवर जांच की निष्पक्षता पर असर पड़ सकता है। जांच की प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली अटकलें न तो सार्वजनिक हित में हैं और न ही विमानन सुरक्षा के लिए लाभकारी।
नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने भी हाल में राज्यसभा में कहा था कि जांच सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर की जा रही है। उन्होंने सदन में लिखित उत्तर में बताया कि अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन के नियमों के अनुसार समयबद्ध तरीके से जांच पूरी करने के प्रयास जारी हैं। उनका कहना था कि किसी भी संभावित कारण को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा। विशेषज्ञों के अनुसार विमान दुर्घटना जांच अक्सर लंबी और जटिल प्रक्रिया होती है। हर परत को खोलकर देखा जाता है। यांत्रिक विफलता, मानव त्रुटि, पर्यावरणीय कारक या इनका संयोजन, सभी संभावनाओं की गहन पड़ताल की जाती है। कई बार अंतिम रिपोर्ट आने में महीनों लग जाते हैं क्योंकि हर तथ्य को तकनीकी परीक्षण और स्वतंत्र सत्यापन से गुजरना पड़ता है।
एआई 171 हादसे ने विमानन सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। देश में तेजी से बढ़ते हवाई यातायात के बीच यह घटना नियामकीय ढांचे और एयरलाइन परिचालन की सतर्क समीक्षा की मांग करती है। हालांकि अभी किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी, लेकिन जांच से निकले निष्कर्ष भविष्य की नीतियों और सुरक्षा प्रोटोकॉल को आकार देंगे। अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन मानकों के तहत जांच का उद्देश्य दंड तय करना नहीं बल्कि दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना है। इसलिए अंतिम रिपोर्ट में संभावित तकनीकी खामियों, प्रशिक्षण प्रक्रियाओं या निगरानी तंत्र में सुधार के सुझाव दिए जा सकते हैं। यह रिपोर्ट न केवल संबंधित एयरलाइन बल्कि पूरे विमानन क्षेत्र के लिए मार्गदर्शक दस्तावेज बन सकती है।
एएआईबी ने दोहराया है कि वह पारदर्शिता और पेशेवर ईमानदारी के उच्चतम मानकों के प्रति प्रतिबद्ध है। एजेंसी का कहना है कि जैसे ही जांच पूरी होगी, अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी। तब तक किसी भी तरह की अपुष्ट जानकारी पर भरोसा करने से बचना चाहिए। फिलहाल देश की नजर इस बात पर है कि इस त्रासदी के पीछे वास्तविक कारण क्या थे और भविष्य में ऐसी घटनाओं को कैसे रोका जा सकता है। जांच की दिशा और निष्कर्ष आने वाले समय में विमानन सुरक्षा की बहस को नई दिशा देंगे।
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