Indian Navy P8I Aircraft: हिंद महासागर क्षेत्र वैश्विक व्यापार की धुरी बन चुका है। दुनिया का लगभग 70-80 प्रतिशत समुद्री व्यापार इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे रणनीतिक और आर्थिक महत्व को देखते हुए भारत अपनी समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को लगातार मजबूत कर रहा है। इसी दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने भारतीय नौसेना के लिए 6 अतिरिक्त पी-8आई (P-8I) लंबी दूरी के समुद्री टोही विमानों की खरीद को ‘एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी’ (AON) की मंजूरी दे दी है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस प्रस्ताव को स्वीकृति मिली। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन विमानों की खरीद से नौसेना की पनडुब्बी रोधी युद्ध (ASW) क्षमता, समुद्री निगरानी और समुद्री हमले की ताकत में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी। यह विमान अमेरिका से खरीदे जाएंगे।
भारतीय नौसेना पहले से ही पी-8आई विमानों का सफलतापूर्वक संचालन कर रही है। अब तक भारत अमेरिका से कुल 12 पी-8आई विमान खरीद चुका है। वर्ष 2009 में पहले चरण में 8 और 2016 में दूसरे चरण में 4 विमान शामिल किए गए थे। नवंबर 2019 में भी 6 अतिरिक्त विमानों की खरीद के लिए AON दी गई थी, लेकिन निर्धारित समयसीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। ऐसे में इस प्रस्ताव को नए सिरे से मंजूरी दी गई है। हर AON की एक निश्चित समय सीमा होती है। यदि इस अवधि में खरीद प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तो उसे या तो बढ़ाया जाता है या फिर नए प्रस्ताव के रूप में स्वीकृति लेनी पड़ती है। अब ताजा मंजूरी के साथ यह प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। मई 2021 में अमेरिका ने भी 6 पी-8आई विमानों और संबंधित उपकरणों की संभावित बिक्री को मंजूरी दी थी।
पिछले वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान जारी संयुक्त बयान में भी 6 अतिरिक्त पी-8आई विमानों की खरीद का उल्लेख किया गया था। दोनों देशों के बीच बिक्री की शर्तों पर सहमति बनने की बात कही गई थी। यह सौदा भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग को और मजबूती देने वाला कदम माना जा रहा है।

पी-8आई विमान को दुनिया के सबसे उन्नत समुद्री निगरानी और पनडुब्बी रोधी विमानों में गिना जाता है। यह विमान करीब 41,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ान भरते हुए समुद्र की गहराइयों में छिपी दुश्मन पनडुब्बियों का पता लगाने में सक्षम है। इसकी अधिकतम रेंज लगभग 8,300 किलोमीटर है, जिससे यह लंबी दूरी तक बिना रुके मिशन पूरा कर सकता है। इस विमान में कुल 11 हार्ड पॉइंट्स हैं—5 इंटरनल और 6 विंग के नीचे। इनके जरिए यह एंटी-शिप मिसाइल हारपून, क्रूज मिसाइल, लाइटवेट टॉरपीडो, एंटी-सबमरीन वारफेयर चार्ज और माइन लॉन्च कर सकता है। इसके अलावा, यह अत्याधुनिक मल्टी-मिशन सर्फेस सर्च रडार से लैस है, जो समुद्र की सतह और गहराई दोनों में गतिविधियों की सटीक निगरानी करता है।
हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती भू-राजनीतिक गतिविधियों और चीन की बढ़ती समुद्री मौजूदगी को देखते हुए भारत के लिए समुद्री सतर्कता बेहद जरूरी हो गई है। ऐसे में पी-8आई जैसे अत्याधुनिक विमान भारतीय नौसेना को निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने और जरूरत पड़ने पर त्वरित कार्रवाई करने में सक्षम बनाते हैं। इन विमानों की तैनाती से अंडमान-निकोबार से लेकर अरब सागर तक भारत की समुद्री सीमाओं पर निगरानी और अधिक प्रभावी होगी। साथ ही, यह भारतीय नौसेना की ‘ब्लू वॉटर’ क्षमता को भी और मजबूत करेगा।
अन्य प्रमुख खबरें
Sarla Maheshwari Death: दूरदर्शन की लोकप्रिय न्यूज एंकर सरला माहेश्वरी का निधन
'वंदे मातरम' पर सियासी घमासान तेज, विपक्ष ने मोदी सरकार की मंशा पर उठाए सवाल
आईटी मंत्रालय का Deepfake पर सख्त प्रहार: भ्रामक एआई कंटेंट पर सरकार का बड़ा एक्शन
CSR खर्च 1.44 लाख करोड़ के पार: पांच साल में रिकॉर्ड निवेश, एमसीए21 पर 3.84 करोड़ फाइलिंग दर्ज
Pappu Yadav: जेल से बाहर आएंगे पूर्णिया सांसद, पप्पू यादव को 31 साल पुराने मामले में मिली जमानत
Sharad Pawar: NCP प्रमुख शरद पवार की अचानक बिगड़ी तबीयत, अस्पताल के बाहर जुटी समर्थकों की भीड़
आतंकी अब्दुल रहमान की पत्थर से कुचलकर हत्या, न्यायिक जांच जारी