PM Modi Rolls Royce Meeting : आत्मनिर्भरता की नई उड़ान, रोल्स-रॉयस और भारत के बीच 'रणनीतिक सेतु', पीएम मोदी से मुलाकात में दिखा 'विकसित भारत' का रोडमैप

खबर सार :-
PM Modi Rolls Royce Meeting : प्रधानमंत्री मोदी और रोल्स-रॉयस के सीईओ तुफान एर्गिनबिलगिच की मुलाकात ने भारत में वैश्विक विनिर्माण के नए द्वार खोल दिए हैं। कंपनी भारत को अपना 'होम मार्केट' बनाने और यहाँ दुनिया का सबसे बड़ा ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर स्थापित करने की योजना बना रही है, जो 'विकसित भारत' की दिशा में एक बड़ा कदम है।

PM Modi Rolls Royce Meeting : आत्मनिर्भरता की नई उड़ान, रोल्स-रॉयस और भारत के बीच 'रणनीतिक सेतु', पीएम मोदी से मुलाकात में दिखा 'विकसित भारत' का रोडमैप
खबर विस्तार : -

नई दिल्ली : भारत की औद्योगिक क्रांति और रक्षा आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में बुधवार को एक नया अध्याय जुड़ गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने वैश्विक इंजीनियरिंग दिग्गज 'रोल्स-रॉयस' (Rolls-Royce) के सीईओ तुफान एर्गिनबिलगिच के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। इस मुलाकात ने न केवल भारत के बढ़ते वैश्विक कद को रेखांकित किया, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया कि दुनिया की दिग्गज कंपनियां अब भारत को सिर्फ एक बाजार नहीं, बल्कि अपना 'दूसरा घर' बनाने की ओर अग्रसर हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस मुलाकात की खुशी साझा करते हुए कहा, "भारत में अपनी गतिविधियों को विस्तार देने और हमारे नवाचारी व गतिशील युवाओं के साथ साझेदारी करने के लिए रोल्स-रॉयस के उत्साह का हम स्वागत करते हैं।" यह बयान स्पष्ट संकेत है कि सरकार वैश्विक तकनीकी दिग्गजों के लिए लाल कालीन बिछाने के साथ-साथ देश के युवाओं के लिए रोजगार और नवाचार के नए द्वार खोल रही है।

PM Modi Rolls Royce Meeting : 'ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर' बनेगा दुनिया का सबसे बड़ा केंद्र

रोल्स-रॉयस ने प्रधानमंत्री के साथ अपनी चर्चा में एक अत्यंत महत्वाकांक्षी योजना का खाका पेश किया है। कंपनी ने साझा किया कि वह भारत में अपने ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) को दुनिया का सबसे बड़ा केंद्र बनाने की दिशा में काम कर रही है। यह महज एक ऑफिस विस्तार नहीं है, बल्कि यह भारत की उच्च-मूल्य वाली इंजीनियरिंग क्षमताओं (High-Value Engineering) पर वैश्विक भरोसे की मुहर है। कंपनी का लक्ष्य जटिल विनिर्माण (Complex Manufacturing) के क्षेत्र में भारत के साथ मिलकर 'सह-निर्माण' (Co-creation) की प्रक्रिया को अपनाना है। इसका सीधा अर्थ यह है कि भविष्य में रोल्स-रॉयस के इंजन और आधुनिक मशीनरी के पुर्जे न केवल भारत में असेंबल होंगे, बल्कि उनकी डिजाइन और इंजीनियरिंग भी भारतीय दिमागों द्वारा की जाएगी।

PM Modi Rolls Royce Meeting : "भारत को बनाएंगे अपना घर"- एर्गिनबिलगिच का बड़ा विजन

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर की भारत यात्रा के दौरान व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल के साथ आए एर्गिनबिलगिच ने भारत के प्रति अपनी गहरी प्रतिबद्धता जाहिर की। उन्होंने एक ऐसा बयान दिया जो भारतीय उद्योग जगत के लिए काफी मायने रखता है। उन्होंने कहा, "हम भारत को रोल्स-रॉयस का एक घरेलू बाजार (Home Market) बनाने की गहरी महत्वाकांक्षा रखते हैं।" एर्गिनबिलगिच के अनुसार, वायु, थल और समुद्री क्षेत्रों में रोल्स-रॉयस की उन्नत तकनीकें भारत की रणनीतिक क्षमताओं को बढ़ाने में सहायक होंगी। कंपनी 'आत्मनिर्भर भारत' की यात्रा में एक सक्रिय भागीदार के रूप में खुद को देख रही है, जो महत्वपूर्ण उद्योगों में भारत की वैश्विक उपस्थिति को मजबूती प्रदान करेगी।

PM Modi Rolls Royce Meeting : इंडिया-यूके विजन 2035 और व्यापारिक रिश्ते

यह मुलाकात उस समय हुई है जब भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (ETP) पर तेजी से काम चल रहा है। रोल्स-रॉयस की यह पहल 'इंडिया-यूके विजन 2035' के लक्ष्यों के साथ पूरी तरह मेल खाती है। नागरिक उड्डयन, रक्षा और ऊर्जा क्षेत्रों में रोल्स-रॉयस की विशेषज्ञता भारत के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है। विशेष रूप से रक्षा क्षेत्र में, जहाँ भारत अपनी पुरानी तकनीक को अत्याधुनिक इंजनों और ऊर्जा प्रणालियों से बदलना चाहता है, वहां रोल्स-रॉयस जैसी कंपनियों का सहयोग 'मेक इन इंडिया' को नई ऊंचाई पर ले जाएगा। आने वाले दशकों में यह साझेदारी ऊर्जा सुरक्षा और बेहतर कनेक्टिविटी के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने विशेष रूप से भारतीय युवाओं की 'गतिशीलता' का जिक्र किया। रोल्स-रॉयस के विस्तार का मतलब है कि आने वाले समय में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग, डेटा एनालिटिक्स और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग में हजारों उच्च-कुशल नौकरियों का सृजन होगा। यह साझेदारी केवल सरकारी स्तर पर नहीं, बल्कि शैक्षणिक और नवाचार के स्तर पर भी भारतीय युवाओं को वैश्विक मंच प्रदान करेगी। रोल्स-रॉयस और भारत सरकार के बीच की यह केमिस्ट्री यह दर्शाती है कि 'विकसित भारत' का सपना अब केवल सरकारी फाइलों तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया की सबसे प्रभावशाली कंपनियां इस सपने में निवेश करने के लिए कतार में खड़ी हैं।

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