RBI Dividend 2026: भारतीय रिजर्व बैंक एक बार फिर केंद्र सरकार के खजाने को बड़ी राहत देने की तैयारी में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरबीआई वित्त वर्ष 2026 के लिए केंद्र सरकार को रिकॉर्ड सरप्लस डिविडेंड ट्रांसफर कर सकती है। यह राशि 2.7 लाख करोड़ रुपए से लेकर 3.5 लाख करोड़ रुपए तक हो सकती है। अगर यह अनुमान सही साबित होता है तो यह अब तक का सबसे बड़ा डिविडेंड भुगतान होगा, जो भारतीय अर्थव्यवस्था और सरकारी वित्तीय स्थिति के लिए बड़ा सहारा माना जा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, डिविडेंड ट्रांसफर को लेकर आरबीआई बोर्ड की अहम बैठक शुक्रवार को प्रस्तावित है। इस बैठक में अंतिम राशि को मंजूरी दी जाएगी। यदि बोर्ड ऊपरी सीमा यानी 3.5 लाख करोड़ रुपए के भुगतान को मंजूरी देता है, तो यह केंद्रीय बैंक द्वारा सरकार को दिया गया सबसे बड़ा सरप्लस ट्रांसफर बन जाएगा। बीते वित्त वर्ष में आरबीआई ने केंद्र सरकार को 2.69 लाख करोड़ रुपए का डिविडेंड दिया था। इस बार अनुमानित राशि उससे काफी अधिक बताई जा रही है, जिससे सरकार की गैर-कर आय में बड़ा उछाल आ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार आरबीआई की आय में जबरदस्त बढ़ोतरी की मुख्य वजह रुपए का अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगभग 10 प्रतिशत कमजोर होना रहा। इससे आरबीआई की विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों का मूल्य बढ़ा और उसकी बैलेंस शीट मजबूत हुई। इसके अलावा केंद्रीय बैंक ने विदेशी मुद्रा बाजार में सक्रिय हस्तक्षेप करते हुए डॉलर की बिक्री भी की। इस रणनीति से भी आरबीआई को उल्लेखनीय लाभ हुआ। बाजार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए किए गए इन कदमों ने केंद्रीय बैंक की कमाई बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।

वित्त वर्ष 2026 के दौरान भारत का विदेशी मुद्रा भंडार करीब 3 प्रतिशत बढ़कर लगभग 688 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इससे आरबीआई की आय को और मजबूती मिली। विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि का सीधा असर केंद्रीय बैंक की निवेश आय और बैलेंस शीट पर पड़ा है। विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी मुद्रा संचालन के अलावा सरकारी बॉन्ड निवेश, ब्याज आय और मुद्रा मुद्रण गतिविधियों से हुई कमाई ने भी संभावित सरप्लस बढ़ाने में योगदान दिया है।
आरबीआई का डिविडेंड केंद्र सरकार के लिए गैर-कर राजस्व का बड़ा स्रोत बन चुका है। पिछले तीन वर्षों में केंद्रीय बैंक द्वारा सरकार को दिए गए डिविडेंड में तीन गुना से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है। इससे सरकार को राजकोषीय घाटा नियंत्रित रखने और विकास योजनाओं पर खर्च बढ़ाने में मदद मिलती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सरकार को इस बार 3 लाख करोड़ रुपए से अधिक का डिविडेंड मिलता है, तो इससे इंफ्रास्ट्रक्चर, सामाजिक योजनाओं और पूंजीगत व्यय को अतिरिक्त समर्थन मिल सकता है। इससे सरकार पर अतिरिक्त कर्ज लेने का दबाव भी कम होगा।
इस वर्ष की शुरुआत में जारी एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया था कि आरबीआई का डिविडेंड ट्रांसफर वित्त वर्ष 2027 में भी 2 से 2.5 लाख करोड़ रुपए के ऊंचे स्तर पर बना रह सकता है। हालांकि, आरबीआई ने अभी तक संभावित भुगतान को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। आर्थिक जानकारों के मुताबिक, वैश्विक बाजार में डॉलर की स्थिति, विदेशी मुद्रा भंडार और ब्याज दरों में बदलाव आने वाले वर्षों में आरबीआई की आय पर असर डाल सकते हैं। फिलहाल, रिकॉर्ड डिविडेंड की संभावना ने वित्तीय बाजारों और सरकारी हलकों में उत्साह बढ़ा दिया है।
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