नई दिल्ली: भारत का औद्योगिक उत्पादन (Industrial Production) सितंबर 2025 में सालाना आधार पर 4 प्रतिशत बढ़ा है। मंगलवार को जारी सांख्यिकी मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, इस वृद्धि की सबसे बड़ी वजह मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का बेहतर प्रदर्शन रहा। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) के आधार पर अगस्त में भी उत्पादन वृद्धि दर 4 प्रतिशत थी, जबकि जुलाई में यह 3.5 प्रतिशत और जून में 1.5 प्रतिशत दर्ज की गई थी।
मंत्रालय के अनुसार, सितंबर में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की वृद्धि दर 4.8 प्रतिशत रही, जो अगस्त के 3.8 प्रतिशत से अधिक है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, क्योंकि यह बड़ी संख्या में तकनीकी और इंजीनियरिंग स्नातकों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराता है।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 23 में से 13 इंडस्ट्री ग्रुप ने सितंबर में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की। इनमें सबसे अधिक योगदान बेसिक मेटल्स, इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट और मोटर व्हीकल्स, ट्रेलर्स व सेमी-ट्रेलर्स के निर्माण से आया। इनकी वृद्धि दर क्रमशः 12.3 प्रतिशत, 28.7 प्रतिशत और 14.6 प्रतिशत रही। इन उद्योगों की मजबूती से यह संकेत मिलता है कि घरेलू मांग के साथ-साथ निर्यात बाजार में भी भारतीय उत्पादों की स्थिति मजबूत हुई है।
देश में इलेक्ट्रिसिटी उत्पादन में 3.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो ऊर्जा मांग में स्थिरता को दर्शाती है। हालांकि, माइनिंग सेक्टर का प्रदर्शन कमजोर रहा और इसमें 0.4 प्रतिशत की गिरावट आई। विश्लेषकों के अनुसार, मानसूनी रुकावटों और खनन गतिविधियों में मंदी इसका प्रमुख कारण रहा है। पूंजीगत वस्तुओं (Capital Goods) का उत्पादन सितंबर में 4.7 प्रतिशत बढ़ा। इसमें फैक्ट्रियों में उपयोग की जाने वाली मशीनें और उपकरण शामिल होते हैं। यह वृद्धि संकेत देती है कि निवेश गतिविधियों में तेजी आई है, जिससे रोजगार और आय दोनों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं (Consumer Durables) — जैसे रेफ्रिजरेटर, एसी और टेलीविज़न — के उत्पादन में 10.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। यह घरेलू बाजार में मजबूत उपभोक्ता मांग का संकेत है। वहीं, इन्फ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में भी 10.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो सरकार के निरंतर इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश और परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित करने का नतीजा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद भारत की औद्योगिक गतिविधियां स्थिरता की ओर बढ़ रही हैं। लगातार बढ़ता उपभोग, निवेश में सुधार और सरकारी नीतियों का समर्थन आने वाले महीनों में औद्योगिक उत्पादन को और गति दे सकता है।
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