बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पहले दिन ही बाघिन देख रोमांचित हो उठे पर्यटक, 195 गाइड देंगे वन्यजीवों की जानकारी
खबर सार :-
1 अक्टूबर से बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में नए पर्यटन सीजन की शुरुआत हो गई। पहले दिन पार्क मैनेजमेंट और अधिकारियों-कर्मचारियों ने पर्यटकों का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया।
खबर विस्तार : -
भोपाल: मध्य प्रदेश के उमरिया जिले में स्थित मशहूर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, मानसून के कारण तीन महीने बंद रहने के बाद गुरुवार (1 अक्टूबर) को पर्यटकों के लिए फिर से खुल गया। नए टूरिज्म सीजन की शुरुआत के साथ ही रिजर्व के कोर जोन में जंगल सफारी भी शुरू हो गई, जिससे माहौल में उत्साह था। सीजन के पहले दिन ताला, मगधी और खितौली गेट को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। पार्क मैनेजमेंट और वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने पारंपरिक तरीके से पर्यटकों का स्वागत किया। गेट खुलने से पहले, वन्यजीवों की सुरक्षा और टूरिज्म सीजन के सफल संचालन के लिए प्रार्थना सभा आयोजित की गई।
ताला गेट से पार्क में प्रवेश करने वाले पर्यटकों के लिए पहला दिन यादगार रहा। सिद्धा बाबा इलाके के पास पर्यटकों को एक बाघिन दिखाई दी। वे बाघिन को उसके प्राकृतिक आवास में घूमते हुए देखकर रोमांचित हो गए। सफारी गाड़ियों में सवार पर्यटकों ने काफी देर तक बाघिन की गतिविधियों को देखा और इस खास पल को कैमरे में कैद किया। नए सीजन के पहले ही दिन बाघिन को देखने से पर्यटकों का उत्साह और बढ़ गया। गौरतलब है कि बांधवगढ़ रिजर्व के कोर जोन में टूरिज्म 1 अक्टूबर से 30 जून तक चलता है, जबकि बफर जोन में टूरिज्म सालभर चलता रहता है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व मैनेजमेंट ने पर्यटकों के स्वागत के लिए सभी जरूरी तैयारियां की थीं। गुरुवार को तीनों मुख्य गेटों पर तय समय पर प्रवेश प्रक्रिया शुरू हुई। प्रवेश द्वारों को फूलों और अन्य सजावटी सामानों से सजाया गया था। पर्यटकों को पार्क के नियमों और वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने के महत्व के बारे में भी जानकारी दी गई।
घरेलू-विदेशी पर्यटकों की संख्या में भी बढ़ोतरी
सहाय के अनुसार, पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों से पता चलता है कि बांधवगढ़ आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या में घरेलू पर्यटकों के साथ-साथ बढ़ोतरी हुई है। विदेशी पर्यटकों की बढ़ती संख्या से पर्यटन गतिविधियों और क्षेत्र के राजस्व, दोनों को बढ़ावा मिल रहा है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के आंकड़ों से पता चलता है कि 2021-22 से 2025-26 तक के पांच पर्यटन सीजन के दौरान कुल 9,50,177 पर्यटकों ने रिजर्व का दौरा किया। इस संख्या में 8,34,693 घरेलू पर्यटक और 1,15,484 विदेशी पर्यटक शामिल थे। इस अवधि के दौरान, पर्यटन से कुल ₹76,01,32,188 का राजस्व प्राप्त हुआ।
खास तौर पर, वर्ष 2021-22 में 1,76,051 पर्यटक आए, जिनमें 1,70,106 घरेलू और 5,945 विदेशी पर्यटक शामिल थे, जिससे ₹12,06,60,748 का राजस्व प्राप्त हुआ। 2022-23 में कुल 1,85,825 पर्यटक आए (1,64,559 घरेलू और 21,266 विदेशी), जिससे ₹13,89,74,913 का राजस्व मिला। 2023-24 में पर्यटकों की कुल संख्या 1,78,926 थी (1,53,032 घरेलू और 25,894 विदेशी) और राजस्व ₹14,15,70,318 रहा। 2024-25 की अवधि में पर्यटकों की संख्या बढ़कर 1,96,889 हो गई, जिसमें 1,66,123 घरेलू और 30,766 विदेशी पर्यटक शामिल थे। उस वर्ष प्राप्त राजस्व ₹16,38,78,420 था। 2025-26 में, सबसे अधिक संख्या में पर्यटक 2,12,486 बांधवगढ़ आए; इस संख्या में 1,80,873 घरेलू और 31,613 विदेशी पर्यटक शामिल थे। उस साल पर्यटन से हुई कमाई ₹19,50,47,789 थी।
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लगभग एक महीने के लिए ऑनलाइन बुकिंग
फील्ड डायरेक्टर अनुपम सहाय ने बताया कि नए टूरिज्म सीजन के शुरू होने से पहले ही बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के लिए लगभग एक महीने की ऑनलाइन टिकट बुकिंग हो चुकी है। इससे पता चलता है कि पर्यटकों में बांधवगढ़ को लेकर कितना उत्साह और दिलचस्पी है। सफारी गाड़ियों के लिए तय नियमों का सख्ती से पालन कराया जा रहा है; सभी टूरिस्ट जिप्सियों की जांच और रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है। गाड़ियों के कागजात, उनकी तकनीकी हालत और रजिस्ट्रेशन के नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा रहा है।
पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने पर जोर
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर अनुपम सहाय ने बताया कि नए टूरिज्म सीजन से पहले सफारी सिस्टम को सुव्यवस्थित करने और पर्यटकों के समग्र अनुभव को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया। इस बार ध्यान केवल बाघों को देखने पर ही नहीं है; बल्कि जंगल, वन्यजीवों, पक्षियों, पेड़-पौधों, इतिहास, पर्यावरण और बांधवगढ़ के भौगोलिक महत्व के बारे में जानकारी देने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। यह देखा गया है कि जहां बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व अपने बाघों के लिए मशहूर है, वहीं यह अपनी प्राकृतिक विविधता, ऐतिहासिक धरोहर और स्थानीय संस्कृति से भी पर्यटकों को आकर्षित करता है। प्राचीन गुफाएं, मंदिरों के खंडहर और 'शेष-शैया' की मूर्ति जैसी ऐतिहासिक जगहें पर्यटकों के अनुभव को और भी खास बनाती हैं। जंगल सफारी के दौरान बाघों और पक्षियों को देखने का मौका और साथ ही भारतीय सांस्कृतिक धरोहर से जुड़ने का अनुभव, बांधवगढ़ को एक अनोखा पर्यटन स्थल बनाता है।
105 गाइडों को इंग्लिश और कम्युनिकेशन की ट्रेनिंग
उन्होंने बताया कि लगभग 195 गाइडों को ट्रेनिंग दी जा रही है ताकि वे पर्यटकों को जंगल और वहां के वन्यजीवों के बारे में बेहतर जानकारी दे सकें। 'जंगल की पाठशाला' पहल के तहत, गाइडों को वन्यजीवों के पैरों के निशान (पगमार्क), जानवरों के व्यवहार, पक्षियों की पहचान, जंगल की वनस्पतियों और बांधवगढ़ के इतिहास के बारे में जानकारी दी जा रही है। इसके अलावा, 105 गाइडों को इंग्लिश भाषा और कम्युनिकेशन स्किल्स की ट्रेनिंग दी जा रही है ताकि वे घरेलू और विदेशी पर्यटकों को जंगल और वन्यजीवों के बारे में आसान, दिलचस्प और असरदार तरीके से जानकारी दे सकें।
हाथियों की मौजूदगी के बावजूद सफारी जारी रहेगी
फील्ड डायरेक्टर सहाय ने बताया कि सफारी की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। जंगली हाथियों की आवाजाही के बावजूद सफारी जारी रहेगी। गाइडों और ड्राइवरों को पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ट्रेनिंग दी गई है। नए टूरिज्म सीजन के दौरान वन्यजीव संरक्षण और पर्यटकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।
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