West Bengal Election पर चुनाव आयोग सख्त: हिंसा बर्दाश्त नहीं, दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई
खबर सार :-
पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर चुनाव आयोग पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है। मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण, प्रशासनिक तैयारियों और कानून-व्यवस्था की समीक्षा से साफ संकेत मिलता है कि आयोग निष्पक्ष और भयमुक्त चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध है। यदि सभी संस्थाएं समन्वय के साथ काम करती हैं, तो राज्य में शांतिपूर्ण और पारदर्शी मतदान सुनिश्चित किया जा सकता है।
खबर विस्तार : -
West Bengal Election: आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर पश्चिम बंगाल में चुनावी तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी कड़ी में Election Commission of India के मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar ने निर्वाचन आयुक्त Dr. Sukhbir Singh Sandhu और Dr. Vivek Joshi के साथ कोलकाता में चुनावी तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। इसके बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ने प्रेस कांफ्रेंस में स्पष्ट संदेश दिया कि पश्चिम बंगाल में आगामी चुनाव पूरी तरह भयमुक्त और निष्पक्ष माहौल में कराए जाएंगे। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग राज्य के सभी मतदाताओं को भरोसा दिलाता है कि मतदान के दौरान हिंसा या डर का कोई स्थान नहीं होगा और हर मतदाता बिना किसी दबाव के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेगा।
भयमुक्त मतदान सुनिश्चित करने का भरोसा
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि आयोग की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि हर नागरिक सुरक्षित वातावरण में मतदान कर सके। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे किसी भी तरह के डर या भ्रम से प्रभावित हुए बिना मतदान के दिन मतदान केंद्रों पर पहुंचें। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है और प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी प्रकार की हिंसा या धमकी को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मतदाता सूची की विशेष समीक्षा
प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बारे में भी जानकारी दी। आयोग के अनुसार हाल ही में 28 फरवरी को पश्चिम बंगाल की अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की गई है, जिसमें कुल 7 करोड़ 8 लाख मतदाताओं के नाम दर्ज हैं। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण आधारशिला है और आयोग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र मतदाता सूची से बाहर न रह जाए, जबकि किसी अपात्र व्यक्ति का नाम इसमें शामिल न हो। विशेष पुनरीक्षण के दौरान यह भी पाया गया कि पिछली बार किए गए पुनरीक्षण में लगभग 4 से 5 प्रतिशत मतदाताओं का मिलान वर्ष 2002 की मतदाता सूची से नहीं हो पाया था। इन मामलों को ‘अमान्य’ श्रेणी में रखा गया। इसके अलावा लगभग 7 से 8 प्रतिशत मतदाताओं द्वारा स्वयं किया गया मिलान या तो गलत पाया गया या उसमें कुछ संदिग्ध त्रुटियां सामने आईं।
अधिकारियों को सख्त चेतावनी
मुख्य चुनाव आयुक्त ने साफ कहा कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान किसी भी स्तर पर लापरवाही को बिल्कुल भी स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के सभी अधिकारी और कर्मचारी कानून, नियमों और आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार काम करेंगे। अगर किसी अधिकारी या कर्मचारी की ओर से लापरवाही या नियमों की अनदेखी पाई जाती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनावी प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखने के लिए निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया गया है।

न्यायिक निगरानी में मतदाता पात्रता की जांच
ज्ञानेश कुमार ने बताया कि कुछ विवादित या विचाराधीन नामों की जांच सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार की जा रही है। इस प्रक्रिया की निगरानी Supreme Court of India के निर्देशों के अनुरूप और West Bengal के मुख्य न्यायाधीश की देखरेख में की जा रही है। उन्होंने कहा कि न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति पहले ही की जा चुकी है, जो संविधान के अनुच्छेद 326 के तहत मतदाताओं की पात्रता से जुड़े मामलों पर निर्णय ले रहे हैं। इससे मतदाता सूची की पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित होगी।
कानून-व्यवस्था पर विशेष ध्यान
मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि पिछले दो दिनों में आयोग ने राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति की गहन समीक्षा की है। इस दौरान सभी प्रमुख राजनीतिक दलों, राज्य सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठकें की गईं। बैठक में मुख्य सचिव, जिला कलेक्टर, पुलिस आयुक्त, पुलिस महानिदेशक और विभिन्न जिलों के पुलिस अधीक्षकों ने आयोग को भरोसा दिलाया कि आगामी चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराए जाएंगे। चुनाव आयोग का मानना है कि प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के बेहतर समन्वय से राज्य में निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराना संभव होगा।
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