उत्तराखंड कैबिनेट के 24 प्रस्तावों पर मुहर, TDC को 66 करोड़ का पैकेज

खबर सार :-

बनबसा में सीएम पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई उत्तराखंड कैबिनेट बैठक में 24 प्रस्तावों को मंजूरी मिली। TDC पैकेज, संपत्ति विवरण, कौशल विकास और निजी विश्वविद्यालयों के नियमों में बदलाव हुए।
उत्तराखंड कैबिनेटः कर्मचारियों को देना होगा संपत्ति ब्योरा

खबर विस्तार : -

चंपावत: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में रविवार को चंपावत जिले के बनबसा में हुई उत्तराखंड कैबिनेट की बैठक में कई अहम फैसलों पर मुहर लगी। बैठक में कुल 24 प्रस्तावों पर चर्चा हुई और उन्हें मंजूरी दी गई। कैबिनेट के फैसलों में रोजगार, कौशल विकास, शिक्षा, कर्मचारी जवाबदेही, कृषि एवं आजीविका, भू-राजस्व और निजी विश्वविद्यालयों से जुड़े महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं। सरकार के मुताबिक, इन फैसलों का उद्देश्य राज्य में रोजगार के अवसर बढ़ाने, युवाओं को कौशल प्रशिक्षण से जोड़ने, प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही मजबूत करने और पर्वतीय क्षेत्रों में आजीविका के नए अवसर पैदा करना है।

TDC को 66 करोड़ रुपये का विशेष पैकेज

कैबिनेट ने तराई विकास निगम लिमिटेड (TDC) के लिए 66 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज को मंजूरी दी। सरकार की ओर से इसे निगम से जुड़े कार्यों और गतिविधियों को मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बैठक में राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में विकास को गति देने से संबंधित अन्य प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई। कैबिनेट ने रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने के साथ प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया।

कर्मचारियों के लिए संपत्ति का ब्योरा देना होगा

कैबिनेट ने कर्मचारी आचरण नियमों में बदलाव को मंजूरी दी है। संशोधित व्यवस्था के तहत ग्रुप ए और ग्रुप सी कर्मचारियों को हर वर्ष अपनी संपत्ति का विवरण देना अनिवार्य होगा। वहीं, ग्रुप बी कर्मचारियों के लिए संपत्ति का विवरण हर पांच साल में एक बार प्रस्तुत करने का प्रावधान किया गया है। सरकार के इस निर्णय का उद्देश्य कर्मचारियों की संपत्ति संबंधी जानकारी को व्यवस्थित रूप से दर्ज करना और प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूत करना है।

PAC अधिकारियों की नियुक्ति को मंजूरी

उत्तराखंड मंत्रिमंडल ने प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबुलरी (PAC) के अधिकारियों को ग्रुप बी पदों पर नियुक्त करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी। इस निर्णय के तहत पात्र अधिकारियों को निर्धारित पदों पर नियुक्ति का व्यवस्थित अवसर मिलने का रास्ता साफ होगा। वहीं पर्वतीय क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका के अवसर बढ़ाने के लिए सरकार ने मुर्गी पालन से जुड़ी सब्सिडी को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण यानी DBT के माध्यम से देने का फैसला किया है। सरकार के अनुसार, इस योजना से करीब 2,000 लाभार्थियों को फायदा मिलने की उम्मीद है। इसका उद्देश्य पहाड़ी क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना तथा ग्रामीण परिवारों की आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित करना है।

200 करोड़ की कौशल विकास योजना

युवाओं को रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण से जोड़ने के लिए कैबिनेट ने 200 करोड़ रुपये की कौशल विकास योजना को मंजूरी दी। इस पहल के तहत उच्च शिक्षा विभाग युवाओं को विभिन्न कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जोड़ने और रोजगार से संबंधित अवसरों तक उनकी पहुंच बढ़ाने की दिशा में काम करेगा। इसके अलावा छात्रों के लिए कौशल डिप्लोमा पाठ्यक्रम शुरू करने को भी मंजूरी दी गई। इन पाठ्यक्रमों के जरिए छात्रों को नियमित शिक्षा के साथ अतिरिक्त व्यावसायिक और तकनीकी कौशल हासिल करने का अवसर मिलेगा। सरकार के मुताबिक, इस पहल से एक लाख से अधिक छात्रों को लाभ मिलने की उम्मीद है। चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े प्रस्ताव पर भी कैबिनेट ने फैसला लिया। राज्य सरकार ने डॉक्टरों को दिए जाने वाले वजीफे में वृद्धि को मंजूरी दी है। इससे चिकित्सा क्षेत्र में प्रशिक्षण और सेवाओं से जुड़े डॉक्टरों को आर्थिक स्तर पर राहत मिलने की उम्मीद है।

निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के नियम बदले

उत्तराखंड में निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना को लेकर भी कैबिनेट ने महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। संशोधित प्रावधानों के तहत विश्वविद्यालय स्थापित करने के लिए पहले लागू 10 एकड़ भूमि की अनिवार्यता में बदलाव किया गया है। अब 20,000 वर्ग मीटर भूमि के आधार पर निजी विश्वविद्यालय स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त होगा। इसके साथ ही विश्वविद्यालय के लिए 5 करोड़ रुपये की गारंटी निधि बनाए रखने की पूर्व अनिवार्यता को भी समाप्त कर दिया गया है। सरकार का यह फैसला राज्य में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नए संस्थानों की स्थापना से जुड़ी प्रक्रिया को प्रभावित करेगा। हालांकि, विश्वविद्यालयों की स्थापना और संचालन के लिए अन्य निर्धारित मानकों का पालन करना होगा।

नजूल भूमि के नियमितीकरण का रास्ता आगे बढ़ा

कैबिनेट ने नजूल भूमि के नियमितीकरण से संबंधित प्रस्तावों पर भी निर्णय लिया। राज्य के विभिन्न क्षेत्रों के साथ खटीमा, बनबसा और चंपावत में नजूल भूमि के नियमितीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का फैसला किया गया है। इससे संबंधित मामलों में निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी। नजूल भूमि से जुड़े मामलों को लेकर लंबे समय से नियमितीकरण की मांग और प्रक्रिया राज्य के कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण मुद्दा रही है।

रोजगार और जवाबदेही पर सरकार का फोकस

बनबसा में हुई कैबिनेट बैठक के फैसलों से सरकार के एजेंडे में रोजगार, कौशल विकास, शिक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही को प्रमुखता मिलने की बात सामने आती है। एक ओर जहां 200 करोड़ रुपये की कौशल विकास योजना और कौशल डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के जरिए युवाओं को रोजगार से जोड़ने की कोशिश की गई है, वहीं कर्मचारियों के संपत्ति विवरण से जुड़े नियमों में बदलाव प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर को दर्शाता है। पर्वतीय क्षेत्रों में मुर्गी पालन के लिए DBT आधारित सब्सिडी से स्थानीय आजीविका को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं निजी विश्वविद्यालयों से जुड़े नियमों में बदलाव उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नए संस्थानों की स्थापना के लिए संशोधित ढांचा उपलब्ध कराएगा।

कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में राज्य के आर्थिक, शैक्षिक और प्रशासनिक ढांचे से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। सरकार के अनुसार, इन फैसलों को लागू करने से रोजगार के अवसर बढ़ाने, युवाओं को कौशल से जोड़ने और राज्य के पर्वतीय एवं मैदानी दोनों क्षेत्रों में विकास गतिविधियों को गति देने में मदद मिलेगी।

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