Land For Job Case: लालू यादव को झटका, सुप्रीम कोर्ट ने 'लैंड फॉर जॉब' केस में FIR रद्द करने की अर्जी ठुकराई
खबर सार :-
Land for Jobs Case: लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) को सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। शीर्ष अदालत ने CBI के मुकदमा चलाने के लिए कानूनी मंजूरी ना लेने की दलील को भी खारिज कर दिया है।
खबर विस्तार : -
Land For Job Case : बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने 'जमीन के बदले नौकरी' घोटाले में लालू प्रसाद यादव को राहत देने से इनकार करते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी।
Land For Job Case: सुप्रीम कोर्ट ने ठुकराई लालू की अर्जी
लालू यादव ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर इस मामले में CBI की FIR और चार्जशीट को रद्द करने की मांग की थी। सोमवार को जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस एन.के. सिंह की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद याचिका खारिज कर दी गई। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने लालू यादव को निचली अदालत में चल रही कार्यवाही के दौरान व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट दे दी है। आदेश में कहा गया है, "याचिकाकर्ता को ट्रायल कोर्ट के सामने व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट दी जाती है।"
पिछले महीने, दिल्ली हाई कोर्ट ने भी लालू प्रसाद यादव द्वारा दायर इसी तरह की एक याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट में लालू प्रसाद यादव ने दलील दी थी कि CBI उन्हें अभियोजित करने के लिए ज़रूरी मंज़ूरी लेने में नाकाम रही है, और इसलिए, पूरा मामला रद्द कर दिया जाना चाहिए। हालांकि, हाई कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि याचिका में कोई दम नहीं है। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में कानून के मुताबिक, उचित प्रक्रिया का पालन किया गया है।
क्या है 'जमीन के बदले नौकरी' मामला
बता दें कि 'जमीन के बदले नौकरी' मामला उन आरोपों से जुड़ा है कि 2004 से 2009 के बीच रेल मंत्री के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान, लालू प्रसाद यादव ने रेलवे में नियुक्तियां करने के लिए अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग किया; इन नियुक्तियों के बदले कथित तौर पर ज़मीन के टुकड़े उनके परिवार के सदस्यों या उनसे जुड़ी संस्थाओं को हस्तांतरित किए गए थे। CBI के मुताबिक, उम्मीदवारों या उनके रिश्तेदारों ने कथित तौर पर बाज़ार दरों से काफी कम कीमतों पर ज़मीन हस्तांतरित की, जो विभिन्न रेलवे ज़ोन में नौकरियों के बदले दी गई थी। हालांकि, लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के सदस्य इन आरोपों से इनकार करते हैं और खुद को बेकसूर बताते हैं।
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