सिंचाई शुल्क की शत-प्रतिशत वसूली के निर्देश, जल उपयोक्ता संगम अध्यक्षों की बैठक आयोजित
खबर सार :-
अधीक्षण अभियंता धीरज चावला की अध्यक्षता में, सिंचाई शुल्क की वसूली के संबंध में एक बैठक हुई। जिसमें अधिकारियों ने कहा कि निर्धारित समय में शुल्क जमा नहीं करने वालों के विरुद्ध नियमों के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि जल संसाधनों का उचित प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके।
खबर विस्तार : -
श्री गंगानगर: जल संसाधन विभाग की ओर से सिंचाई शुल्क वसूली की प्रगति की समीक्षा के लिए जल संसाधन उपखण्ड श्रीकरणपुर, कृषि अनुसंधान केन्द्र पदमपुर और जल संसाधन उपखण्ड जैतसर में अधीक्षण अभियंता धीरज चावला की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। बैठक में अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता, डिप्टी कलेक्टर, विभिन्न क्षेत्रों के अधिकारी तथा जल उपयोक्ता संगम अध्यक्ष उपस्थित रहे।
सिंचाई शुल्क बकाया रखने वाले किसानों की मांगी सूची
बैठक में सिंचाई शुल्क की वसूली को लेकर विस्तृत चर्चा की गई और सभी जल उपयोक्ता संगम अध्यक्षों को लक्ष्य के अनुसार शत-प्रतिशत वसूली सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। अधीक्षण अभियंता धीरज चावला ने कहा कि जिन संगमों के वसूली शिविर समाप्त हो चुके हैं, वे अधिकतम बकाया वाले काश्तकारों की सूची अधिशासी अभियंता को उपलब्ध करवाएं, ताकि नियमों के अनुसार उनकी बारी विवर्जित करने की कार्रवाई की जा सके।
उन्होंने बताया कि जिन संगमों के वसूली शिविर अभी जारी हैं, वे शिविर के अगले दिन दो या दो से अधिक फसलों का सिंचाई शुल्क बकाया रखने वाले काश्तकारों की सूची प्रस्तुत करें। इसके आधार पर राजस्थान सिंचाई एवं जल निकास नियम 1954 के नियम 10 (ड) के तहत संबंधित काश्तकारों की बारी काटने के आदेश जारी किए जाएंगे।
बैठक में यह भी निर्देश दिया गया कि जिन किसानों की बारी पूर्व में सिंचाई शुल्क बकाया होने के कारण काटी जा चुकी है, उनकी बारी एक वर्ष तक बहाल नहीं की जाएगी। इसके साथ ही जिन जल उपयोक्ता संगम अध्यक्षों ने न तो बैठक में भाग लिया और न ही बकाया काश्तकारों की सूची प्रस्तुत की, उन्हें तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण देने के लिए नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए।
नोटिस जारी करने के निर्देश
धीरज चावला ने बताया कि यदि संबंधित अध्यक्षों का स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया गया तो उनके खिलाफ राजस्थान सिंचाई प्रणाली के प्रबंधन में कृषकों की सहभागिता अधिनियम 2000 एवं 2002 के नियम 45 के तहत कार्रवाई के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि 15 अप्रैल 2026 से ई-बारी पोर्टल के माध्यम से सिंचाई बारी तैयार की जाएगी तथा ई-आबियाना पोर्टल पर सिंचाई शुल्क से संबंधित सभी जानकारियां उपलब्ध कराई जाएंगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वसूली संबंधी जानकारी और बकाया काश्तकारों के नाम सार्वजनिक किए जाएं तथा बारी एकत्रित (लिफ्ट) केवल उन्हीं काश्तकारों को दी जाए जिन्होंने सिंचाई शुल्क जमा कराया हो।
बैठक के दौरान श्रीकरणपुर, पदमपुर और जैतसर क्षेत्रों के कई जल उपयोक्ता संगमों द्वारा न तो सिंचाई शुल्क की वसूली करने और न ही बकाया काश्तकारों की सूची उपलब्ध कराने की जानकारी सामने आई। ऐसे संगम अध्यक्षों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण प्राप्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
अधिशासी अभियंताओं द्वारा प्रस्तुत सूची के आधार पर जिन काश्तकारों पर सिंचाई शुल्क का अधिकतम बकाया है, उनकी सिंचाई बारी विवर्जित करने के आदेश भी अनुमोदित किए गए।
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