राजकीय मेडिकल कॉलेज की टीम ने 600 ग्राम के शिशु को बचाकर पेश की मिसाल
खबर सार :-
राजकीय मेडिकल कॉलेज और उसके सम्बद्ध चिकित्सालय के डॉक्टरों व नर्सिंग स्टाफ ने एक असंभव को संभव कर दिखाया है। शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. पल्लवी बंसल के नेतृत्व में मात्र 600 ग्राम वजन की नन्ही बच्ची को 70 दिनों के कड़े संघर्ष के बाद सुरक्षित बचाया गया है।
खबर विस्तार : -
श्रीगंगानगरः राजकीय मेडिकल कॉलेज और एसोसिएटेड हॉस्पिटल के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के मिलकर किए गए पक्के इरादे ने नामुमकिन को मुमकिन कर दिखाया है। प्रिंसिपल डॉ. पी.के. बरवाल के अच्छे गाइडेंस, PMO डॉ. सुखपाल सिंह बराड़ के एडमिनिस्ट्रेटिव सपोर्ट और पीडियाट्रिक्स डिपार्टमेंट की हेड डॉ. पल्लवी बंसल की लीडरशिप में, सिर्फ़ 600 ग्राम वज़न की एक छोटी बच्ची को 70 दिनों की कड़ी मेहनत के बाद बचाया गया। बच्ची का जन्म सिर्फ़ 26 हफ़्ते (लगभग छह महीने) के प्रेग्नेंसी पीरियड के बाद हुआ, जो मेडिकल साइंस में एक बड़ी चुनौती है।
एक्सपर्ट डॉक्टरों और नर्सिंग टीम के बीच तालमेल
यह ऐतिहासिक कामयाबी डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के शानदार तालमेल की वजह से मिली। डॉ. संजय राठी, डॉ. पवन गोयल की एक्सपर्ट टीम ने डिपार्टमेंट की हेड डॉ. पल्लवी बंसल के साथ मिलकर दिन-रात मेहनत करके बच्ची को सांस लेने में दिक्कत, नेक्रोटाइजिंग एंटरोकोलाइटिस (आंतों का एक गंभीर इन्फेक्शन), जॉन्डिस और शॉक जैसी जानलेवा बीमारियों से बचाया। इस उपचार को सफल बनाने का श्रेय वार्ड इंचार्ज गुरप्रेम सिंह के नेतृत्व में पूरी एसएनसीयू नर्सिंग टीम को जाता है। वार्ड इंचार्ज गुरप्रेम सिंह ने अपनी बहादुर टीम के सदस्यों विनोद कुमार, प्रमिला, महेंद्र कुमार, सुनीता मार्टिन, मुनेश और संतोष के साथ मिलकर 70 दिनों तक 24/7 बच्ची की निगरानी की। इस टीम के अटूट धैर्य और समर्पण की बदौलत बच्ची का वजन 600 ग्राम से बढ़कर 1200 ग्राम हो गया है।
चमत्कार से कम नहीं है डॉक्टरों की सफलत
विजयनगर के माता-पिता को नई उम्मीद मिली है। यह बच्ची विजयनगर के गोल्डन सिटी के वार्ड नंबर 7 निवासी कश्मीरी लाल कैंथ के बेटों रेखा और मुकेश की बेटी है। महज 26 सप्ताह के गर्भ में पैदा हुई बच्ची का वजन इतना कम था कि उसे बचाना बेहद मुश्किल माना जा रहा था।
यह उपलब्धि पूरे श्रीगंगानगर क्षेत्र के लिए एक मिसाल है। प्राचार्य डॉ. पी.के. डॉ. बरवाल, PMO डॉ. सुखपाल सिंह बराड़ और HOD डॉ. पल्लवी बंसल की लीडरशिप में इस टीम ने साबित कर दिया है कि जब डॉक्टरों का ज्ञान और नर्सिंग स्टाफ का डेडिकेशन एक पॉजिटिव, सुरक्षित माहौल में मिलता है, तो सरकारी संस्थानों में भी चमत्कार हो सकते हैं। टीम का कोऑर्डिनेशन और डेडिकेशन समाज के लिए एक प्रेरणा है। सरकारी अस्पताल की इस बड़ी सफलता ने मेडिकल दुनिया में भरोसे का एक नया अध्याय लिखा है।
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