शंकराचार्य विवादः 'बटुक' के बहाने डैमेज कंट्रोल में उतरे डिप्टी CM ब्रजेश पाठक, घर बुलाकर किया बटुकों का सम्मान
खबर सार :-
Shankaracharya Controversy: प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़ी घटना को दो महीने हो गए हैं, लेकिन राजनीतिक घमासान जारी है। BJP बैकफुट पर है, और डिप्टी CM ब्रजेश पाठक लगातार डैमेज कंट्रोल में लगे हैं। लेकिन देखना यह है कि ब्रजेश पाठक की इन कोशिशों से शंकराचार्य का मामला थमेगा या नहीं?
खबर विस्तार : -
Shankaracharya Controversy Brajesh Pathak: उत्तर प्रदेश में शंकराचार्य विवाद को लेकर इस समय सियासत अपने चरम पर है। माघ मेले की मौनी अमावस्या से शुरू हुआ यह विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। लगातार बयानों की बौछार जारी है। उधर शंकराचार्य विवाद के डैमेज को कंट्रोल करने के लिए डिप्टी CM ब्रजेश पाठक (Deputy CM Brajesh Pathak) ने बटुक ब्राह्मणों को अपने घर बुलाकर उनका सम्मान किया, साथ ही एक बड़ा सियासी संदेश दिया।
एक ओर जहां यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक (Deputy CM Brajesh Pathak) ने डैमेज कंट्रोल करने के लिए 101 बटुकों को अपने घर पर सम्मानित किया, तो वहीं दूसरी ओर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इस पर बड़ा बयान देते हुए पलटवार किया। उन्होंने साफ कहा है कि उनके यह करने से शांति हो जाएगी क्या? साथ ही उन्होंने सीएम योगी को कालनेमि बताकर 11 मार्च को लखनऊ कूच करने का फैसला भी लिया है।
Shankaracharya Controversy: 'बटुक' के बहाने डैमेज कंट्रोल में जुटे डिप्टी सीएम
दरअसल उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में माघ मेले में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और प्रशासन के बीच विवाद अब राजनीतिक मुद्दा बन गया है। मामले को लेकर बयानबाजी बढ़ती जा रही है, और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी जारी है। इस बीच, उत्तर प्रदेश के डिप्टी CM ब्रजेश पाठक ने गुरुवार को बड़ी संख्या में बटुकों को अपने सरकारी आवास पर बुलाकर उनका सम्मान किया। डिप्टी CM ने ब्रजेश पाठक ने अपनी पत्नी के साथ बच्चों की पूजा की और बटुकों को फूल-मालाएं पहनाईं, तिलक लगाया और उनकी शिखा का आदर करते हुए आशीर्वाद लिया।
इस दौरान घर पहुंचे बटुकों ने कहा, "ब्रजेश पाठक ने बहुत अच्छा काम किया है। बटुक की शिखा सनातन पहचान है। शिखा उखाड़ना सनातन धर्म का अपमान है। पूरे देश में योगी आदित्यनाथ जैसा सनातन मुख्यमंत्री होना चाहिए।" उन्होंने पुलिसवालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी मांग की। उधर राजनीतिक पंडित इसे डैमेज कंट्रोल के तौर पर देख रहे हैं। उनके आवास पर उत्सव जैसा महौल देख राजनीतिक चर्चा दूर तक पहुंच रही है। इस बहाने ब्रजेश पाठक स्वयं को सबसे बड़े ब्राहृमण चेहरे के रूप में उभारना चाहते हैं।
ब्रजेश पाठक पर शंकराचार्य का पटलवार
ब्रजेश पाठक को अपने घर बुलाने और 101 बटुक ब्राह्मणों को सम्मानित करने के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पटलवार किया। उन्होंने ने साफ कहा, "क्या उनके यज्ञ करने से शांति आएगी? आप किसी को मारकर फूल कैसे चढ़ा सकते हैं?" ब्रजेश पाठक पर दबाव के बारे में उन्होंने कहा, "उन पर दबाव है क्योंकि वह अभी कुछ नहीं बोल रहे हैं। वह कालनेमि के साथ कैसे मिले हुए हो सकते हैं?"
शंकराचार्य ने सीएम योगी पर साधा निशाना
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ को 20 दिन का अल्टीमेटम दिया गया था, जो अब खत्म हो गया है। हालांकि, इस समय में आदित्यनाथ ने अपनी हिंदू पहचान का कोई संकेत नहीं दिया, लेकिन उनके कालनेमि होने के संकेत जरूर मिले। उन्होंने आगे सवाल किया कि योगी आदित्यनाथ के कामों को पाखंड क्यों नहीं माना जाना चाहिए।
शिवपाल यादव ने ब्रजेश पाठक को घेरा
दरअसल शंकराचार्य विवाद पर डिप्टी CM ब्रजेश पाठक डैमेज कंट्रोल में जुट गए हैं। हाल ही में उन्होंने कहा था कि किसी की चोटी खींचना गलत और बहुत बड़ा पाप है, और इसे छूने वालों को भी पाल लगेगा। उन्हें चोटी नहीं खींचनी चाहिए थी। ये सब खाता-बही में दर्ज हो रहा है। उनके खिलाफ कड़ी कारवाई होनी चाहिए।
उनके इस बयान पर सियासी गरमा गई। इसे पूरे प्रदेश में ब्राह्मणों को साधने की कोशिश के तौर पर देखा गया, जो चोटी खींचने की घटना से नाराज थे। उनसे यह भी सवाल किया गया कि जब वह खुद डिप्टी सीएम हैं, तो वह किससे कह रहे हैं कि दोषियों पर कारवाई होनी चाहिए। इस पर समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता शिवपाल यादव ने बुधवार को तीखी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि अगर ब्रजेश पाठक इतने दुखी हैं, तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
शिवपाल यादव ने कहा- कैबिनेट सदस्य होने के नाते वह (ब्रजेश पाठक) भी पाप के दोषी होंगे। इसलिए उन्हें तुरंत कैबिनेट से इस्तीफा दे देना चाहिए। अखिलेश यादव पहले भी इस मुद्दे पर सरकार की आलोचना कर चुके हैं और कई बार सीएम योगी आदित्यनाथ पर निशाना साध चुके हैं। शिवपाल के आक्रामक रुख और समाजवादी पार्टी के शंकराचार्य को खुले समर्थन के बाद ब्रजेश पाठक लगातार डैमेज कंट्रोल में लग गए हैं। लेकिन देखना यह है कि ब्रजेश पाठक की इन कोशिशों से शंकराचार्य का मामला थमेगा या नहीं?
Shankaracharya Controversy: जानें क्या है शंकराचार्य विवाद
गौरतलब है कि यह विवाद मौनी अमावस्या के दिन शुरू हुआ, जब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पालकी पर सवार होकर संगम में स्नान करने जा रहे थे। आरोप है कि इस दौरान पुलिस ने उन्हें रोक दिया, जिससे अधिकारियों के साथ उनकी तीखी बहस हो गई। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन पर उन्हें संगम में स्नान करने से रोकने और शिष्यों के साथ दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया। उन्होंने उन पुलिसकर्मियों की तस्वीरें भी दिखाईं जिन पर उन्होंने कथित तौर पर अपनी चोटी खींचने का आरोप लगाया था और इस मुद्दे पर धरना दिया।
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