मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शतायु प्रतिभा जोशी को दी बधाई
खबर सार :-
इंदिरा नगर की निवासी प्रतिभा जोशी ने आज अपने जीवन के 100 वर्ष पूर्ण कर लिए। उनका जीवन अनुशासन, शिक्षा, देशभक्ति और सकारात्मक सोच का ऐसा प्रेरक उदाहरण है, जो हर पीढ़ी को जीवन जीने की नई दिशा देता है।
खबर विस्तार : -
लखनऊ, इंदिरा नगर की निवासी प्रतिभा जोशी ने आज अपने जीवन के 100 वर्ष पूर्ण कर लिए। उनका जीवन अनुशासन, शिक्षा, देशभक्ति और सकारात्मक सोच का ऐसा प्रेरक उदाहरण है, जो हर पीढ़ी को जीवन जीने की नई दिशा देता है। उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनके शतायु होने पर हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई प्रेषित की। मुख्यमंत्री की शुभकामनाएं प्रतिभा जोशी तक पहुंचाने के लिए महापौर सुषमा खर्कवाल, जिलाधिकारी विशाख जी. एवं नगर आयुक्त गौरव कुमार आज उनके आवास पहुंचे और उन्हें मुख्यमंत्री की ओर से शुभकामनाएं देते हुए अंगवस्त्र, पुष्पगुच्छ एवं 'एक जनपद एक उत्पाद (ODOP)' का स्मृति-उपहार भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी (नगर पूर्वी) महेंद्र पाल सिंह एवं उप जिलाधिकारी सदर मनोज सिंह सहित अन्य अधिकारीगण भी उपस्थित रहे।
नियमित दिनचर्या तथा सकारात्मक सोच सबसे बड़ी पूंजी
प्रतिभा जोशी का जन्म वर्ष 1926 में हुआ था। उन्होंने जीवनभर अनुशासन, सादगी, नियमित दिनचर्या तथा सकारात्मक सोच को अपनी सबसे बड़ी पूंजी माना। उनका मानना है कि संतुलित आहार, नियमित दिनचर्या, सकारात्मक दृष्टिकोण ही स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन का आधार हैं। उन्होंने अपने जीवन के विभिन्न अनुभव साझा करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी कभी धैर्य नहीं खोना चाहिए। शिक्षा, परिवार के संस्कार, समाज के प्रति संवेदनशीलता तथा राष्ट्रप्रेम ने उन्हें जीवनभर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने युवा पीढ़ी को संदेश दिया कि वे अपने माता-पिता एवं बुजुर्गों का सम्मान करें, स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं तथा सदैव सकारात्मक सोच के साथ जीवन में आगे बढ़ें।
मिडिल स्कूल की परीक्षा में स्वर्ण पदक अर्जित किया
16 जुलाई 1926 को उत्तराखंड के अल्मोड़ा में जन्मीं प्रतिभा जोशी का जीवन अनुशासन, शिक्षा और राष्ट्रसेवा की प्रेरक मिसाल है। संसाधनों के अभाव में दीये की रोशनी में पढ़ाई करते हुए उन्होंने वर्ष 1940 में एंग्लो वर्नाक्युलर मिडिल स्कूल की परीक्षा में तत्कालीन संयुक्त प्रांत (वर्तमान उत्तर प्रदेश) में प्रथम स्थान प्राप्त कर स्वर्ण पदक अर्जित किया। इसके बाद वर्ष 1944 में एडम्स गर्ल्स स्कूल से हाईस्कूल परीक्षा में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
सामाजिक परिस्थितियों के कारण उनकी औपचारिक शिक्षा आगे नहीं बढ़ सकी, लेकिन उन्होंने इसे अपनी प्रगति में बाधा नहीं बनने दिया। वर्ष 1946 में इंजीनियर तारा चरण जोशी से विवाह के बाद उन्होंने परिवार और समाज के प्रति अपने दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उन्होंने क्रांतिकारियों के लिए मफलर और बैज तैयार कर राष्ट्रसेवा में भी योगदान दिया। आज उनका परिवार तीन बेटों, दो बेटियों तथा कई पीढ़ियों तक विस्तृत हो चुका है। पूरा परिवार उनके 100वें जन्मदिवस का साक्षी बना और इस ऐतिहासिक अवसर को उत्साह एवं सम्मान के साथ मनाया।
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