निष्पक्ष जांच न होने के कारण क्षेत्र पंचायत के सदस्य ने आत्महत्या करने की दी चेतावनी
खबर सार :-
ग्राम पंचायत में निष्पक्ष जांच न होने के कारण शिकायतकर्ता गलत कदम उठाने को मजबूर हैं। आज एक शिकायतकर्ता ने अधूरी जांच के कारण आत्महत्या करने की धमकी दी है। चेतावनी देते हुए शिकायतकर्ता ने कहा कि मेरी मौत के लिए ग्राम प्रधान, रोजगार अधिकारी और पीलीभीत जिले का सोया हुआ प्रशासन जिम्मेदार होगा।
खबर विस्तार : -
पीलीभीतः मल्लपुर खजुरिया में क्षेत्र पंचायत सदस्य ने 11 मामलों की निष्पक्ष जांच न होने पर जिलाधिकारी ऑफिस के सामने आत्महत्या की धमकी दी है। ग्राम पंचायत में विकास कार्य के नाम पर सरकारी पैसे के गलत इस्तेमाल के बारे में 19 महीने पहले एफिडेविट के साथ दर्ज की गई दो शिकायतों पर कोई कार्रवाई न होने का हवाला देते हुए क्षेत्र पंचायत सदस्य ने जिलाधिकारी को एक पत्र दिया है। उन्होंने जल्द ही निष्पक्ष जांच और कार्रवाई न होने पर आत्महत्या की धमकी दी है।
सरकारी धन के गलत इस्तेमाल का आरोप
घटना पूरनपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत मल्लपुर खजुरिया की है। जिलाधिकारी को दिए गए पत्र में कहा गया है कि 2021 से पंचायत द्वारा जमीनी काम करने के बजाय सिर्फ कागजों पर विकास कार्य दिखाकर सरकारी पैसे का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। गांव के फंड से करीब 50 लाख रुपये और एडमिनिस्ट्रेटिव खर्च के नाम पर कई लाख रुपये का गबन किया गया है।
23 जुलाई 2024 और 26 सितंबर 2025 को महेश कुशवाहा, मेवाराम, शिवम कुमार, दिनेश, बृजबिहारी और अन्य लोगों ने DM को एफिडेविट देकर पंचायत के विकास कार्यों और प्रधान द्वारा खरीदी गई प्रॉपर्टी की जांच की मांग की थी। आरोप है कि अब तक कोई जांच नहीं हुई है। लेटर में 2021 से अब तक हुए विकास कार्यों की निष्पक्ष जांच और सरकारी पैसे की रिकवरी की मांग की गई है। क्षेत्र पंचायत सदस्य महेश कुशवाहा ने जल्द ही अपनी मांगें पूरी न होने पर सुसाइड करने की धमकी दी है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी मौत के लिए प्रधान, एम्प्लॉयमेंट ऑफिसर और डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन जिम्मेदार होंगे।
पहले भी सामने आ चुकी है शिकायतें
आपको बता दें, पीलीभीत में यह सिर्फ एक ऐसा मामला नहीं है जो सामने आया हो। पहले भी भ्रष्टाचार के कई मामले सामने आ चुके हैं और जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह के पास लगातार भ्रष्टाचार के खिलाफ शिकायतें की जा रही हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जिलाधिकारी शिकायत के आधार पर कार्रवाई का भरोसा देते हैं, लेकिन जांच के लिए बनाई गई जांच टीम ग्राम पंचायत से मिलीभगत करके प्रधान के कुछ चहेतों के साइन करवा लेती है, जिससे जांच पूरी तरह से रुक जाती है।
ग्राम पंचायत में निष्पक्ष जांच न होने की वजह से शिकायत करने वाले गलत कदम उठाने को मजबूर हो जाते हैं। आज एक शिकायत करने वाले ने अधूरी जांच की वजह से आत्महत्या करने की धमकी दी। शिकायत करने वाले ने कहा कि उसकी मौत के लिए ग्राम प्रधान, रोजगार अधिकारी और पीलीभीत जिले का सोया हुआ प्रशासन जिम्मेदार होगा।
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