थाने से नहीं मिला न्याय तो बरेली दरबार पहुंचा पीड़ित, पुलिस पर लगाए आरोप
खबर सार :-
पूरनपुर तहसील क्षेत्र के थाना सेहरामऊ उत्तरी इलाके के रहने वाले पप्पू राठौर ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं। पीड़ित का कहना है कि उसे न्याय देने के बजाय उस पर समझौते का दबाव बनाया जा रहा है।
खबर विस्तार : -
पीलीभीत: पूरनपुर तहसील क्षेत्र के थाना सेहरामऊ उत्तरी की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। ग्राम मढ़ा खुर्द कलां उर्फ बिलवुक्षिया निवासी पप्पू राठौर ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए उच्च अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई है। पीड़ित का कहना है कि गांव में हुए एक विवाद के बाद उसने थाना सेहरामऊ उत्तरी में तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन पुलिस ने उसकी शिकायत को गंभीरता से लेने के बजाय उसे ही समझौता करने के लिए दबाव में लेना शुरू कर दिया।
धमकाने और डराने का प्रयास
पप्पू राठौर के अनुसार घटना के बाद वह न्याय की उम्मीद लेकर थाने पहुंचा था, लेकिन उसकी शिकायत पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उनका आरोप है कि पुलिस ने मामले की निष्पक्ष जांच करने के बजाय उसे समझौता करने के लिए कहा। जब उसने समझौते से इनकार किया तो कथित रूप से उसे डराने-धमकाने का प्रयास किया गया। पीड़ित का कहना है कि उसे मारपीट करने, झूठे मुकदमे में फंसाने और जेल भेजने तक की धमकी दी गई, जिससे वह काफी भयभीत और परेशान हो गया।
पीड़ित के मुताबिक, जब थाने स्तर पर उसकी बात नहीं सुनी गई तो उसने पूरे मामले की शिकायत पुलिस अधीक्षक पीलीभीत से की और उनसे न्याय की उम्मीद जताई। हालांकि पप्पू राठौर का आरोप है कि वहां भी उसकी शिकायत पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इससे वह काफी निराश हो गया और उसे लगा कि उसकी बात कहीं भी गंभीरता से नहीं सुनी जा रही है।
सख्त कार्रवाई की मांग
लगातार न्याय न मिलने से परेशान होकर पप्पू राठौर ने मामले को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने का फैसला किया। इसी क्रम में वह बरेली पहुंचा और पुलिस महानिदेशक परिक्षेत्र बरेली तथा अपर पुलिस महानिदेशक बरेली जोन से मिलकर पूरे मामले से उन्हें अवगत कराया। पीड़ित ने अधिकारियों को एक लिखित शिकायती पत्र सौंपते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।
पप्पू राठौर का कहना है कि यदि समय रहते थाना स्तर पर ही उसकी शिकायत पर निष्पक्ष कार्रवाई कर दी जाती तो उसे न्याय के लिए दर-दर भटकना नहीं पड़ता और न ही उसे उच्च अधिकारियों के पास जाना पड़ता। उनका कहना है कि आम नागरिक पुलिस पर भरोसा करके ही थाने पहुंचता है, लेकिन जब वहीं से उसे निराशा हाथ लगे तो उसकी उम्मीदें टूट जाती हैं।
इस घटना के बाद क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पुलिस पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ काम करे तो आम जनता का भरोसा पुलिस व्यवस्था पर बना रहेगा और लोगों को न्याय के लिए बार-बार अधिकारियों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। फिलहाल पीड़ित को उम्मीद है कि उच्च अधिकारी मामले को गंभीरता से लेकर निष्पक्ष जांच कराएंगे और उसे न्याय दिलाने की दिशा में ठोस कदम उठाएंगे।
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