जगतपुर में दबंगई का मामला उजागर, बिना अनुमति तालाब खाली कराने का आरोप
खबर सार :-
जगतपुर गांव के रहने वाले लोगों ने आरोप लगाया है कि प्रेम कुमार ने बिना किसी सरकारी अनुमति के गांव में पानी की आपूर्ति करने वाले तालाब को खाली कर दिया है। इस घटना से ग्रामीणों रोष है। उनका कहना है तालाब खाली करने से उन्हें पानी भारी किल्लत हो गई है।
खबर विस्तार : -
पीलीभीतः पीलीभीत जनपद के जगतपुर गांव में दबंगई से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है। गांव निवासी प्रेम कुमार उर्फ ओमकार पर आरोप है कि उन्होंने बिना किसी प्रशासनिक अनुमति के सार्वजनिक तालाब को खाली करा दिया। इस कथित मनमानी कार्रवाई के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है और लोग इसे कानून व्यवस्था का खुला उल्लंघन बता रहे हैं।
गांव में उत्पन्न हुआ जल संकट
ग्रामीणों के अनुसार जगतपुर गांव का यह तालाब वर्षों से सार्वजनिक उपयोग में रहा है। इसी तालाब से गांव के लोगों की घरेलू जल आवश्यकताएं पूरी होती थीं और पशु-पक्षियों के लिए भी यह पानी का प्रमुख स्रोत था। तालाब को अचानक खाली कर दिए जाने से गांव में जल संकट उत्पन्न हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि अब उन्हें दूर-दराज के क्षेत्रों से पानी लाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि प्रेम कुमार उर्फ ओमकार ने दबंगई के बल पर यह कार्य कराया। न तो ग्राम पंचायत से कोई अनुमति ली गई और न ही राजस्व विभाग या अन्य संबंधित विभागों को इसकी जानकारी दी गई। ग्रामीणों का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया नियमों और कानूनों के खिलाफ है तथा इससे सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा है।
राजस्व विभाग को हो रहा नुकसान
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि तालाब खाली कराए जाने से राजस्व विभाग को आर्थिक क्षति हुई है, क्योंकि तालाब से जुड़े अभिलेखों और सरकारी संसाधनों की अनदेखी की गई। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में ऐसे मामलों को बढ़ावा मिलेगा और सार्वजनिक संपत्तियों पर अवैध कब्जे की घटनाएं बढ़ सकती हैं।
ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी
मामले को लेकर ग्रामीणों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि दोबारा कोई भी व्यक्ति सार्वजनिक संसाधनों के साथ इस तरह की मनमानी करने का साहस न कर सके। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र संज्ञान नहीं लिया गया तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। फिलहाल यह मामला प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर प्रकरण में क्या कदम उठाता है और ग्रामीणों को कब तक न्याय मिलता है।
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