Pilibhit: किसान यूनियन के उपाध्यक्ष ने डीएम संग की बैठक, ट्रेड डील पर चेतावनी
खबर सार :-
सैकड़ों किसानों के साथ यूपी के पीलीभीत जिले में पहुंचे किसान यूनियन टिकैत ग्रुप के प्रदेश उपाध्यक्ष ने किसानो की समस्याओं को लेकर जिला मजिस्ट्रेट और जिले के अधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर सरकार को चेतावनी कि इसे किसानों के हित के लिए निरस्त कर दिया जाए।
खबर विस्तार : -
पीलीभीतः उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जनपद में किसान दिवस के अवसर पर सैकड़ों किसानों के साथ पहुंचे किसान यूनियन (टिकैत ग्रुप) के प्रदेश उपाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह ने जिलाधिकारी और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक कर किसानों की विभिन्न समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। बैठक में जनप्रतिनिधियों द्वारा जिले में विकास के दावों पर सवाल उठाते हुए जमीनी हकीकत सामने रखी गई।
किसानों की समस्याओं पर हुई चर्चा
किसान नेताओं ने कहा कि जिले की सीमा को जोड़ने वाले कई पुल अंग्रेजों के जमाने के बने हुए हैं, जो अब जर्जर हो चुके हैं। इन पुलों की मरम्मत या पुनर्निर्माण न होने के कारण कई गांवों का संपर्क मुख्यालय से प्रभावित हो रहा है। इसके अलावा जंगल से सटे इलाकों और खेतों में जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा के लिए तार फेंसिंग कराने की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई गई। किसानों ने कहा कि फसलों को भारी नुकसान हो रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर हो रही है।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील को निरस्त करने की मांग
बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए वीरेंद्र सिंह ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इस समझौते को भारतीय किसानों के लिए “डेथ वारंट” करार दिया। उनका कहना था कि देश का किसान पहले ही महंगे कृषि उपकरण, खाद और दवाओं पर 18 प्रतिशत जीएसटी का बोझ झेल रहा है, जबकि विदेशी किसानों को कई तरह की रियायतें मिलती हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समझौते भारतीय किसानों को प्रतिस्पर्धा में कमजोर कर देंगे।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह डील किसानों के हितों की अनदेखी कर की गई है और यदि इसे वापस नहीं लिया गया तो किसान फिर से बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उन्होंने दिल्ली की तर्ज पर धरना-प्रदर्शन की चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार को किसानों की आवाज सुननी होगी।
वीरेंद्र सिंह ने यह भी कहा कि भारत जैसे विशाल कृषि प्रधान देश में छोटे और मध्यम किसान बड़ी संख्या में हैं, जो सीमित संसाधनों में खेती करते हैं। ऐसे में किसी भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते से पहले किसानों की सुरक्षा, समर्थन मूल्य और लागत नियंत्रण जैसे मुद्दों पर ठोस नीति बनाना आवश्यक है। किसान यूनियन ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की रूपरेखा जल्द घोषित की जाएगी।
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