पीलीभीत में करोड़ों के सरकारी गबन का खुलासा, 7 महिलाएं गिरफ्तार
खबर सार :-
पीलीभीत में सरकारी धन के गबन मामले में कार्रवाई करते विशेष रूप से सार्वजनिक कोष को हड़पने के लिए फर्जी और मनगढ़ंत लाभार्थी ID बनाने की साजिश—से जुड़े एक मामले में शामिल सात आरोपियों को कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
खबर विस्तार : -
पीलीभीतः जनपद में करोड़ों रुपये के सरकारी गबन के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 7 अभियुक्ताओं को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। यह मामला फर्जी और कूटरचित बेनिफिशियरी आईडी बनाकर सरकारी धनराशि के गबन से जुड़ा है, जिसमें सुनियोजित तरीके से ट्रेजरी के माध्यम से धन का अवैध लेनदेन किया गया।
जांच में सामने आई सच्चाई
अपर पुलिस अधीक्षक विक्रम दहिया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि 13 फरवरी 2026 को जिला विद्यालय निरीक्षक राजीव कुमार ने थाना कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि इल्हाम उर्र रहमान शम्सी, जो जनता टेक्निकल इंटर कॉलेज बीसलपुर में कार्यरत था और जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से संबद्ध था, वेतन बिल और टोकन जनरेशन जैसे महत्वपूर्ण कार्यों की जिम्मेदारी संभाल रहा था।
जांच में सामने आया कि आरोपी ने फर्जी तरीके से बेनिफिशियरी तैयार कर 12 सितंबर 2024 से 98 ट्रांजेक्शन के जरिए करीब 1.01 करोड़ रुपये अपनी पत्नी के खाते में ट्रेजरी के माध्यम से NEFT द्वारा ट्रांसफर किए। इस मामले में थाना कोतवाली नगर में मुकदमा अपराध संख्या 60/26 के तहत विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया।
अलग-अलग जगहों से पकड़े गए आरोपी
पुलिस जांच के दौरान यह भी सामने आया कि इस पूरे गबन कांड में कई अन्य खातों का उपयोग किया गया। अब तक 53 संदिग्ध खातों में लगभग 5.50 करोड़ रुपये के लेनदेन को चिन्हित कर फ्रीज किया जा चुका है। यह दर्शाता है कि गबन का दायरा प्रारंभिक अनुमान से कहीं अधिक बड़ा है।
पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में गठित टीमों ने 1 मई 2026 को कार्रवाई करते हुए लुबना, फातिमा, परवीन खातून, आशकारा परवीन, अजारा खान, नाहिद और आफिया खान को अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार किया। इससे पहले मुख्य आरोपी इल्हाम उर्र रहमान शम्सी की पत्नी अर्शी खातून को भी गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।
आगे की जांच जारी
विवेचना में यह तथ्य भी सामने आया कि आरोपी ने योजनाबद्ध तरीके से अपनी पत्नी और अन्य रिश्तेदारों के खातों में धनराशि ट्रांसफर की, जिससे इस संगठित गबन को अंजाम दिया गया।
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और आगे भी अन्य संलिप्त लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यह मामला सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और निगरानी की आवश्यकता को एक बार फिर उजागर करता है।
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