मधवापुर में घटिया निर्माण का आरोप, पंचायत भवन की बाउंड्री वाल में अनियमितताओं पर ग्रामीणों का विरोध
खबर सार :-
पीलीभीत ज़िले के बरखेड़ा विकास खंड में स्थित माधवापुर ग्राम पंचायत में, इस समय घटिया सामग्री का इस्तेमाल करके निर्माण कार्य चल रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत भवन के चारों ओर बनाई जा रही चारदीवारी के निर्माण में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध रेत और पीली ईंटों का उपयोग किया जा रहा है।
खबर विस्तार : -
पीलीभीतः जनपद के विकास खंड बरखेड़ा क्षेत्र की ग्राम पंचायत मधवापुर में निर्माण कार्यों को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत भवन के चारों ओर बनाई जा रही बाउंड्री वाल में घटिया सामग्री का उपयोग किया जा रहा है, जिससे निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
नियमों की अनदेखी का आरोप
ग्रामीणों के अनुसार, निर्माण कार्य में देशी रेत और पीली ईंटों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो मानकों के अनुरूप नहीं है। आरोप है कि ठेकेदार देशराज द्वारा सरकारी नियमों की अनदेखी करते हुए निर्माण कराया जा रहा है। इस मामले की शिकायत ग्राम सचिव से लेकर खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) तक की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई दिन बीत जाने के बावजूद न तो निर्माण कार्य रोका गया और न ही ठेकेदार के खिलाफ जांच शुरू की गई। इससे ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। उनका आरोप है कि ग्राम प्रधान और सचिव द्वारा ठेकेदार को संरक्षण दिया जा रहा है, जिसके चलते कार्रवाई नहीं हो रही।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि यदि समय रहते निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच की जाए तो अनियमितताएं उजागर हो सकती हैं और दोषियों पर कार्रवाई संभव है। लेकिन जिम्मेदार अधिकारी केवल औपचारिकता निभा रहे हैं और मामले को नजरअंदाज कर रहे हैं।
प्रशासन की कार्यशैली पर उठे सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के बजाय कमीशनखोरी को प्राथमिकता दी जा रही है। उनका आरोप है कि निर्माण कार्य शुरू होने से पहले ही अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच कमीशन तय हो जाता है, जिसके बाद ठेकेदार मनमाने तरीके से काम करता है।
इस पूरे मामले ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार खत्म करने के दावे करती है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर इस तरह के आरोप सामने आना चिंता का विषय है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच हो और दोषी पाए जाने पर ठेकेदार सहित संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही, निर्माण कार्य को मानकों के अनुसार पुनः कराया जाए ताकि पंचायत भवन जैसी महत्वपूर्ण सार्वजनिक संपत्ति की गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और ग्रामीणों को न्याय दिलाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
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