पटना में दारोगा अभ्यर्थियों का जोरदार प्रदर्शन, मुख्य परीक्षा रद्द करने का फैसला वापस लेने की मांग

खबर सार :-

पटना में दारोगा अभ्यर्थियों ने BPSSC की मुख्य परीक्षा रद्द करने के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन किया। अभ्यर्थियों ने घोषित परिणाम मान्य करने और परीक्षा रद्द करने का फैसला वापस लेने की मांग की।
पटना में सड़क पर उतरे दारोगा अभ्यर्थी,  फैसला वापस लेने की मांग

खबर विस्तार : -

पटनाः बिहार की राजधानी पटना में सोमवार को दारोगा अभ्यर्थियों ने बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (BPSSC) की ओर से मुख्य परीक्षा रद्द किए जाने के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में अभ्यर्थी जेपी गोलंबर के पास जुटे और आयोग के फैसले के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों की प्रमुख मांग थी कि मुख्य परीक्षा रद्द करने का निर्णय वापस लिया जाए और पहले घोषित किए गए परिणाम को मान्य किया जाए।

अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने भर्ती प्रक्रिया के लिए लंबे समय तक तैयारी की और परीक्षा में शामिल हुए। मुख्य परीक्षा का परिणाम घोषित होने के बाद अचानक इसे रद्द किए जाने से उनके भविष्य पर असर पड़ रहा है। उनका आरोप है कि अगर परीक्षा में किसी तरह की अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए, लेकिन सभी अभ्यर्थियों को इसका खामियाजा नहीं भुगतना चाहिए।

मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने की कोशिश

प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों ने बताया कि वे पिछले सात दिनों से पटना के गर्दनीबाग में धरना दे रहे हैं। उनका दावा है कि लगातार धरना देने के बावजूद उनकी मांगों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद सोमवार को अभ्यर्थी बड़ी संख्या में सड़क पर उतरे और मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने का प्रयास किया। अभ्यर्थी मौर्य लोक की तरफ से आगे बढ़ना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया। पुलिस की ओर से प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास किया गया। इस दौरान कुछ स्थानों पर अभ्यर्थियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। प्रदर्शन के कारण आसपास के इलाकों में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।

मौके पर भारी पुलिस बल तैनात

प्रदर्शन को देखते हुए जेपी गोलंबर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। मौके पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए महिला पुलिसकर्मियों को भी लगाया गया था। प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों के हाथों में अलग-अलग पोस्टर और बैनर नजर आए। अभ्यर्थी आयोग और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए परीक्षा रद्द किए जाने के फैसले को वापस लेने की मांग कर रहे थे। एक पोस्टर ने खास तौर पर लोगों का ध्यान खींचा। उस पर लिखा था—“दो कचौड़ी, एक समोसा, बीपीएसएससी का क्या भरोसा।” इस नारे के जरिए प्रदर्शनकारियों ने बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग की कार्यप्रणाली और परीक्षा रद्द करने के फैसले पर सवाल उठाया।

1,799 पदों पर होनी है दारोगा की भर्ती

गौरतलब है कि बिहार में दारोगा के 1,799 पदों पर नियुक्ति के लिए भर्ती परीक्षा आयोजित की गई थी। भर्ती प्रक्रिया के तहत मुख्य परीक्षा भी कराई गई और उसका परिणाम घोषित किया जा चुका था। इसके बाद परीक्षा में कथित अनियमितता के आरोप सामने आए। इन आरोपों के बाद बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग ने मुख्य परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया। आयोग के इस निर्णय के बाद अभ्यर्थियों में नाराजगी बढ़ गई और उन्होंने आंदोलन शुरू कर दिया।

अभ्यर्थियों ने की निष्पक्ष जांच की मांग

प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि पूरी भर्ती प्रक्रिया में बड़ी संख्या में उम्मीदवारों ने कड़ी मेहनत की है। उनका तर्क है कि अगर परीक्षा में किसी स्तर पर गड़बड़ी या अनियमितता हुई है तो जांच के जरिए दोषियों की पहचान की जानी चाहिए। इसके बजाय पूरी परीक्षा रद्द करना उन अभ्यर्थियों के साथ अन्याय है, जिन्होंने मेहनत और तैयारी के बाद परीक्षा दी और परिणाम का इंतजार किया।

अभ्यर्थियों ने सरकार से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनका कहना है कि मुख्य परीक्षा रद्द करने के फैसले को वापस लिया जाए और पहले घोषित परिणाम को मान्य किया जाए। फिलहाल दारोगा अभ्यर्थियों का आंदोलन जारी है। सोमवार को हुए प्रदर्शन के बाद एक बार फिर BPSSC की मुख्य परीक्षा रद्द करने के फैसले को लेकर विवाद सामने आ गया है। अब अभ्यर्थियों की नजर सरकार और आयोग की ओर से उठाए जाने वाले अगले कदम पर है।

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