निर्झरा धाम आश्रम में उमड़ा आस्था का सैलाब: 108 कुण्डीय महायज्ञ की तैयारियों को लेकर धर्म सभा आयोजित
खबर सार :-
नीमकाथाना के राणासर स्थित निर्झरा धाम आश्रम में 8 से 16 मार्च तक होने वाले 108 कुण्डीय श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ की तैयारियाँ तेज। धर्म सभा में कार्यकर्ताओं को सौंपी गई जिम्मेदारियां।
खबर विस्तार : -
उदयपुरवाटी/नीमकाथाना: आध्यात्मिक चेतना के केंद्र, राणासर स्थित निर्झरा धाम आश्रम में आगामी मार्च माह में होने वाले भव्य धार्मिक आयोजन की गूँज अभी से सुनाई देने लगी है। आश्रम परिसर में आयोजित एक विशाल धर्म सभा के दौरान 108 कुण्डीय श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ की रूपरेखा तैयार की गई। डॉ. रामकुमार सिराधना की अध्यक्षता में संपन्न हुई इस सभा में बड़ी संख्या में भक्तों और प्रबुद्ध जनों ने शिरकत की। यज्ञ समिति से प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह महायज्ञ 8 मार्च से प्रारंभ होकर 16 मार्च तक अनवरत चलेगा। नौ दिनों तक चलने वाले इस अनुष्ठान में देश के विभिन्न हिस्सों से साधु-संतों और श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना है। धर्म सभा के दौरान सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि कार्यक्रम को भव्य और सुव्यवस्थित बनाने के लिए सामूहिक प्रयास किए जाएंगे।
कार्यकर्ताओं को सौंपी गई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां
यज्ञ के सफल और सुव्यवस्थित क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए आयोजन समिति द्वारा विभिन्न विभागों का गठन कर कार्यकर्ताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। बैठक में सर्वसम्मति से लिए गए निर्णयों के अनुसार, पूरे कार्यक्रम के मुख्य व्यवस्थापक के रूप में धर्मपाल पूनिया को कमान दी गई है, जो सभी गतिविधियों की देखरेख करेंगे। वहीं, अनुष्ठान में बैठने वाले यज्ञ जोड़ों की समुचित व्यवस्था का दायित्व जयचंद रोहिलाण और राम सिंह यादव को सौंपा गया है। कार्यालय संचालन की कमान नवरंगपुरा स्थित बूढ वाले बालाजी धाम के ट्रस्टी डॉ. रामकुमार सिराधना संभालेंगे, जबकि वित्तीय प्रबंधन और लेखा-जोखा की जिम्मेदारी बजरंग लाल पटेल व उनके सहयोगियों को दी गई है। इसके अतिरिक्त, कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं के लिए पेयजल की सुचारू व्यवस्था का जिम्मा मुखराम गुर्जर और उनकी टीम को दिया गया है, ताकि आयोजन के दौरान किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।
आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश
यज्ञ प्रेमी मदनलाल भावरिया ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ केवल एक धार्मिक कर्मकांड नहीं है, बल्कि यह भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने का एक अत्यंत शक्तिशाली माध्यम है। उन्होंने बताया कि इस अनुष्ठान से क्षेत्र में सुख-समृद्धि और शांति का वास होता है। इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान मनरूप सिंह माठ, शीशराम जाखड़, महेंद्र सिंह, रोहिताश यादव, मानसिंह, सावंत राम जाखड़, दयाराम महला, रतिराम पूनिया, विकास साई, सुरेश साई, धर्मेंद्र साई, गोपाल यादव, लक्ष्मी नारायण यादव और बाबूलाल माठ सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में संकल्प लिया कि इस महायज्ञ को ऐतिहासिक बनाया जाएगा।
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