लोकसभा में गूँजी राजस्थान के किसानों की पीड़ा: सांसद कुलदीप इंदौरा ने उठाया नहरों में पानी की कमी और ज़हरीले पेयजल का मुद्दा
खबर सार :-
श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ सांसद कुलदीप इंदौरा ने लोकसभा में राजस्थान की नहरों में पानी की कमी और दूषित पेयजल से बढ़ते कैंसर के खतरों का मुद्दा उठाया। जानें क्या हैं उनकी माँगें।
खबर विस्तार : -
नई दिल्ली/श्रीगंगानगर: संसद के वर्तमान सत्र में श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ संसदीय क्षेत्र के सांसद कुलदीप इंदौरा ने इलाके की जीवनरेखा मानी जाने वाली नहरों और पीने के पानी की बदतर स्थिति पर केंद्र सरकार को घेरा। शुक्रवार को लोकसभा में शून्यकाल के दौरान उन्होंने राजस्थान के हिस्से का पूरा पानी न मिलने और नदियों के प्रदूषित जल से बढ़ती जानलेवा बीमारियों पर गहरी चिंता व्यक्त की।
नहरों में पानी की भारी कटौती: राजस्थान के हक के लिए बुलंद की आवाज
लोकसभा में राजस्थान के किसानों की व्यथा रखते हुए सांसद कुलदीप इंदौरा ने सिंचाई और पेयजल संकट का कच्चा चिट्ठा खोलकर रख दिया। उन्होंने सदन को याद दिलाया कि आजादी के बाद पोंग बांध के निर्माण के साथ भाखड़ा और इंदिरा गांधी नहर जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की नींव इसलिए रखी गई थी ताकि राजस्थान की प्यासी धरती को नया जीवन मिल सके। लेकिन आज जमीनी हकीकत इसके ठीक उलट और बेहद चिंताजनक है।
सांसद इंदौरा ने बेहद स्पष्ट और सटीक आंकड़ों के साथ सरकार को बताया कि राजस्थान की जीवनरेखा मानी जाने वाली प्रमुख नहरों को उनकी निर्धारित क्षमता का आधा पानी भी नसीब नहीं हो रहा है। उन्होंने गंगनहर का उदाहरण देते हुए कहा कि जिसकी क्षमता 3000 क्यूसेक है, वहां किसानों को मात्र 1800 से 2000 क्यूसेक पानी से ही संतोष करना पड़ रहा है। इसी तरह, भाखड़ा नहर में भी 1800 क्यूसेक की क्षमता के मुकाबले केवल 1200 क्यूसेक पानी ही पहुंच पा रहा है। सबसे बुरी स्थिति इंदिरा गांधी नहर की है, जहाँ 18500 क्यूसेक की विशाल क्षमता होने के बावजूद आपूर्ति का स्तर गिरकर महज 10500 से 11000 क्यूसेक के बीच सिमट गया है।
सांसद ने सदन में तल्ख लहजे में सवाल उठाया कि जब सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं, तो फिर राजस्थान को उसके कोटे का निर्धारित 8.60 MAF पानी क्यों नहीं मिल रहा? उन्होंने इसे राज्य के अन्नदाता के साथ सरासर अन्याय करार देते हुए मांग की कि बांधों के भराव और नहरों की आपूर्ति में राजस्थान के हिस्से की अनदेखी तुरंत बंद की जाए।
BBMB में राजस्थान के प्रतिनिधित्व पर सवाल
सांसद कुलदीप इंदौरा ने एक और महत्वपूर्ण तकनीकी खामी की ओर सरकार का ध्यान खींचा। उन्होंने कहा कि भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) में राजस्थान का कोई सदस्य न होना एक गंभीर प्रशासनिक चिंता का विषय है। सदस्य न होने के कारण बोर्ड की बैठकों में राजस्थान का पक्ष प्रभावी ढंग से नहीं रखा जा पा रहा है, जिससे पानी के बंटवारे में राज्य पिछड़ रहा है।
ज़हरीला पानी और बढ़ता कैंसर: स्वास्थ्य पर मंडराता गंभीर संकट
सांसद कुलदीप इंदौरा ने सदन में केवल पानी की मात्रा का मुद्दा ही नहीं उठाया, बल्कि जल की गुणवत्ता को लेकर भी सरकार को कड़े शब्दों में आगाह किया। उन्होंने बेहद चिंताजनक स्थिति बयां करते हुए कहा कि आज राजस्थान की नहरों में पानी नहीं, बल्कि 'ज़हर' बह रहा है। सतलुज, ब्यास और यमुना जैसी प्रमुख नदियों में औद्योगिक इकाइयों द्वारा बेरोकटोक छोड़ा जा रहा केमिकल युक्त अपशिष्ट और चमड़ा उद्योगों का जहरीला कचरा सीधे नहरों के माध्यम से आम जनता के घरों तक पहुँच रहा है।
सांसद इंदौरा ने इस मानवीय संकट पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा, "यह केवल जल आपूर्ति या तकनीकी बँटवारे का विषय नहीं है, बल्कि यह लाखों निर्दोष लोगों के जीवन और मौत से जुड़ा सवाल है।" उन्होंने आँकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि दूषित पेयजल के निरंतर सेवन से इलाके में कैंसर, लिवर और किडनी की बीमारियाँ खतरनाक स्तर तक बढ़ गई हैं। यहाँ तक कि दूषित पानी के कारण लोग गंभीर अवसाद (डिप्रेशन) का शिकार हो रहे हैं, जो अब एक सामाजिक महामारी का रूप ले चुका है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि नदियों और नहरों को प्रदूषण मुक्त करने के लिए तत्काल प्रभाव से कठोर और प्रभावी कदम उठाए जाएं ताकि क्षेत्र के नागरिकों को बीमारियों के इस जाल से निकाला जा सके।
सांसद की मांग: पाइपलाइन नेटवर्क और दीर्घकालिक समाधान
इस गंभीर संकट के समाधान के लिए सांसद इंदौरा ने सरकार के सामने एक क्रांतिकारी प्रस्ताव रखा। उन्होंने सुझाव दिया कि जिस तरह देश भर में पेट्रोलियम उत्पादों के लिए पाइपलाइन का जाल बिछाया गया है, उसी तर्ज पर नदियों के उद्गम स्थल (Source) से सीधे बड़े पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए शुद्ध पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की कि वह इस विषय पर राजनीति से ऊपर उठकर एक व्यापक और दीर्घकालिक योजना बनाए ताकि राजस्थान की आने वाली पीढ़ियों को ज़हरीले पानी से बचाया जा सके।
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