खेजड़ी जैसे गंभीर मुद्दे पर संसद में चर्चा से सरकार का बचना दुर्भाग्यपूर्णः कुलदीप इंदौरा
खबर सार :-
श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ सांसद कुलदीप इंदौरा ने लोकसभा में खेजड़ी वृक्षों की अवैध कटाई पर चर्चा न होने पर केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने स्थगन प्रस्ताव देकर मुद्दा उठाया, लेकिन अनुमति नहीं मिली। इसके विरोध में अन्य सांसदों के साथ संसद परिसर में प्रदर्शन किया और खेजड़ी को राजस्थान की सांस्कृतिक व पर्यावरणीय पहचान बताया।
खबर विस्तार : -
श्री गंगानगर-हनुमानगढ़ से लोकसभा सांसद कुलदीप इंदौरा ने राजस्थान के राज्य वृक्ष खेजड़ी के अवैध और अंधाधुंध कटाई जैसे गंभीर मुद्दे पर लोकसभा में चर्चा न कराने के लिए केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाया है। इंदौरा ने कहा कि उन्होंने आज, सोमवार को लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया था, ताकि राजस्थान में खेजड़ी के पेड़ों की अवैध कटाई, उन्हें बचाने में सरकार की नाकामी और इसके खिलाफ चल रहे बड़े जन आंदोलन पर सदन में तुरंत चर्चा हो सके।
सरकार नहीं दे रही चर्चा की अनुमति
उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले भी कई बार संसद में यह मुद्दा उठाने की कोशिश की थी, लेकिन हर बार सरकार ने चर्चा की इजाज़त नहीं दी। इंदौरा ने कहा कि खेजड़ी का पेड़ सिर्फ़ एक पेड़ नहीं है, बल्कि राजस्थान की सांस्कृतिक, पर्यावरणीय और आजीविका पहचान का एक अभिन्न अंग है। यह रेगिस्तानी इकोसिस्टम की रीढ़ है, जो लाखों किसानों, पशुपालकों और ग्रामीण परिवारों की ज़िंदगी को सीधे तौर पर सहारा देता है। इसके बावजूद, राज्य के अलग-अलग हिस्सों में सोलर और दूसरे प्रोजेक्ट्स के नाम पर बड़े पैमाने पर खेजड़ी के पेड़ काटे जा रहे हैं।
सांसद कुलदीप इंदौरा ने सभी को याद दिलाया कि 1730 में माता अमृता देवी बिश्नोई और 363 शहीदों ने खेजड़ी के पेड़ों को बचाने के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी थी, जिससे दुनिया को पहला संगठित पर्यावरण आंदोलन मिला। उन्होंने कहा, "आज, उसी ज़मीन पर, उस विरासत के उलट, खेजड़ी के पेड़ों को नष्ट किया जा रहा है, और सरकार संसद में इस पर चर्चा करने से भी बच रही है।" सांसद इंदौरा ने कहा कि जब उन्हें सदन के अंदर इस मुद्दे पर बोलने नहीं दिया गया, तो उन्होंने दूसरे सांसदों के साथ मिलकर संसद परिसर के बाहर विरोध प्रदर्शन करके खेजड़ी का मुद्दा उठाया।
कई सांसदों ने दिया मुद्दे पर सहयोग
इस विरोध प्रदर्शन में सांसद बृजेंद्र ओला, मुरारी लाल मीणा, अमराराम, उमेदराम बेनीवाल, वरिष्ठ नेता और सांसद दीपेंद्र हुड्डा, जयप्रकाश, सतपाल ब्रह्मचारी, अरुण चौधरी और हरियाणा और महाराष्ट्र के कई अन्य सांसद शामिल थे। उन्होंने कहा कि यह विरोध सिर्फ़ एक पार्टी या एक राज्य का नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और जनहित से जुड़ी राष्ट्रीय चिंता का प्रतीक है। उन्होंने यह भी बताया कि पश्चिमी राजस्थान, जिसमें बीकानेर भी शामिल है, में साधु-संतों, पर्यावरणविदों और आम नागरिकों द्वारा 'खेजड़ी बचाओ' आंदोलन चलाया जा रहा है, और अनिश्चितकालीन भूख हड़तालें चल रही हैं, लेकिन सरकार न तो ज़मीन पर कोई समाधान दे रही है और न ही संसद में बातचीत के लिए तैयार है।
कुलदीप इंदोरा ने कहा, "जब कोई मुद्दा तुरंत सार्वजनिक महत्व का हो, एक जन आंदोलन का रूप ले चुका हो, और सीधे पर्यावरण और आजीविका से जुड़ा हो, तो उस पर चर्चा करने से इनकार करना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। यह सिर्फ़ राजस्थान का सवाल नहीं है, बल्कि पूरे देश के पर्यावरणीय भविष्य का सवाल है।" उन्होंने साफ तौर पर कहा कि अगर सरकार चर्चा से बचती है, तो भी वे पीछे नहीं हटेंगे। इंदोरा ने कहा कि आने वाले दिनों में, वह खेजड़ी के पेड़ों की सुरक्षा और राजस्थान के लोगों के पर्यावरणीय अधिकारों के लिए, सदन के अंदर और बाहर, हर लोकतांत्रिक तरीके से इस मुद्दे को उठाते रहेंगे।
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